ज्योतिष की सहायता से बिजनेस पार्टनरशिप / पार्टनर का चयन

बिजनेस पार्टनरशिप

जैसे-जैसे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है वैसे वैसे बाजार में बिजनेस पार्टनरशिप/Business Partnership की ज़रूरत भी बढ़ती जा रही है। जब प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, तब हर साझेदार की भूमिका सिमट कर रह जाती है। यह बात हर तरह के बिजनेस पर लागू होती है। हम सभी ने बहुत सारी कहानियां सुनी होंगी, जहां पर साझेदारी के बदौलत बिजनेस एक नई ऊंचाई पर जा खड़ा हुआ है। वर्तमान समय में साझेदारी की अहमियत और भी बढ़ गई है। यदि आप साझेदारी की वजह से सफलता का कोई कहानी की तलाश कर रहे हैं तो आपको ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है। आप रिलायंस और मुकेश अंबानी का ही उदाहरण देख सकते हैं। लेकिन कई बार साझेदारी दोनों साझेदारों के लिए एक बुरा सपना भी साबित हो सकती है। उदाहरण के लिए आप आदित्य बिरला और आइडिया की साझेदारी भी देख सकते हैं। अब यहां पर सवाल उठता है कि किसी भी साझेदारी के फायदे, नुकसान, जोखिम, और सफलता का आंकलन कैसे करें। इसके पश्चात एक और सवाल उठता है कि अपने व्यापार के हिसाब से उत्तम साझेदार का चुनाव कैसे करें। इन सभी कारकों को इस लेख के जरिए मैं आपको धीरे धीरे करके बताने वाला हूं। मैं इन सभी प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभव से दूंगा। कुछ ज्योतिषीय कारकों की सहायता से मैं आपको एक उत्तम साझेदार के चुनाव में सहायता करूंगा। आप अपने इन सभी सवालों के जवाब हमारे निःशुल्क कैल्कुलेटर का प्रयोग करके जान सकते हैं।

साझेदारी के फायदे और नुकसान/Benefits of Partnership and Risks in Business

साझेदारी, सहयोग और बिजनेस विस्तार के कुछ खास योग होते हैं। कभी कभी सही समय पर सही निर्णय ना लेने से आपकी साझेदारी आपके बिजनेस को नुकसान की तरफ ले जा सकती है। 

साझेदारी के फायदे और नुकसान/Benefits of Partnership and Risks in Business

साझेदारी, सहयोग और बिजनेस विस्तार के कुछ खास योग होते हैं। कभी कभी सही समय पर सही निर्णय ना लेने से आपकी साझेदारी आपके बिजनेस को नुकसान की तरफ ले जा सकती है। 

अच्छी साझेदारी के फायदे – 

  1. एक से भले दो – यदि दो लोग बिजनेस पर मिलकर काम करते हैं तो फायदा ज्यादा होगा क्योंकि एक साथ दो दिमाग काम करता है।

  2. ऐसा करने से किसी एक साथी के ऊपर दबाव नहीं पड़ता।

  3. व्यापार को संचालित करने के लिए ज्यादा फंड मिल जाता है।

  4. इस स्थिति में आप बाजार से ज्यादा उधार भी ले सकते हैं।

  5. अच्छे कर्मचारियों को साथी बनाया जा सकता है।

इन सबसे ऊपर होता है कि आपकी आय बंट जाती है जिससे आप टैक्स से भी बच जाते हैं।

यदि आप अपने व्यापार के लिए एक अच्छे साझेदार की खोज में हो तब आपको अपने बिजनेस के लिए उत्तम साझेदारी की आवश्यकता पड़ सकती है। पार्टनर के चुनाव के लिए सभी कारकों को दो श्रेणी में बांटा गया है। पहला कारक बिजनेस के लिए आवश्यक गुण और लक्षण है। किसी भी साझेदारी में प्रवेश करने

के लिए हर व्यक्ति के अंदर इन गुणों का होना अनिवार्य होता है। दूसरा कारक उस साझेदार की कुंडली/Natal Chart से उन गुण और लक्षण का आकलन करना है। चलिए इन दोनों के बारे में इस लेख के जरिए समझते हैं। 

व्यवसाय में साझेदारी के जोखिम

  1. साझेदारों का व्यवसाय में जुड़ जाने से आपके व्यापार में क्या जोखिम हो सकता है। इस बात का आकलन करना आपके और आपके व्यापार के लिए बेहद ज़रूरी है।

  2. व्यवसाय के ऋणों के लिए भी भागीदार का दायित्व असीमित होता है। 

  3. हर साझेदार व्यवसाय के ऋणों में बराबरी की भागीदारी होती है। ऋण भी मुनाफे और निवेश के अनुपात के आधार पर ही बांटा जाता है। 

  4. प्रबंधन और साझेदारों के बीच में असहमति भी हो सकती है।

  5. यदि व्यवसाय में बहुत सारे साझेदार होते हैं और किसी एक ने भी कोई गलती की, तो इसका परिणाम सभी को भुगतना पड़ सकता है। 

  6. यदि कोई साझेदार खुद को व्यापार से अलग करता है या फिर जुड़ता है तो इसका प्रभाव बाकी के साझेदारों पर भी पड़ सकता है। 

आप मेरे नवीनतम साक्षात्कार को आउटलुक इंडिया में पढ़ सकते हैं। वह लेख – ज्योतिष व्यापार की सफलता में कैसे सहायक होता है? How astrology helps in business success? के विषय में था। इन लेखों को आप हमारे न्यूज़ विभाग में जा कर पढ़ सकते हैं।

बिजनेस पार्टनरशिप के अनुकूलता कारक/ Business Partnership compatibility factors

बिजनेस का नाम किसी भी बिजनेस के बारे में सक्षम होता है। कुछ ऐसी बातें है जिनके कारण आपको अपने और अपने बिजनेस पार्टनर के साथ अनुकूलता कारक का पता चल सकता है। हम आपको ज्योतिष में एक महान उपकरण प्रदान करने वाले हैं जिसके माध्यम से आप ज्योतिष के अनुसार बिजनेस पार्टनरशिप संगतता/Business partnership as per astrology की जांच कर सकते हैं:

बिजनेस पार्टनरशिप के अनुकूलता कारक/ Business Partnership compatibility factors

बिजनेस का नाम किसी भी बिजनेस के बारे में सक्षम होता है। कुछ ऐसी बातें है जिनके कारण आपको अपने और अपने बिजनेस पार्टनर के साथ अनुकूलता कारक का पता चल सकता है। हम आपको ज्योतिष में एक महान उपकरण प्रदान करने वाले हैं जिसके माध्यम से आप ज्योतिष के अनुसार बिजनेस पार्टनरशिप संगतता/Business partnership as per astrology की जांच कर सकते हैं:

1. अपने सोच और सपनों पर ध्यान दें।

आपको अपनी व्यावसायिक योजना पर तब तक काम नहीं करना चाहिए जब तक आप यह नहीं जान जाएँ कि आपके और आपके बिजनेस पार्टनर के बिजनेस के सपने, लक्ष्य और दृष्टिकोण एक समान है। यदि आपको अपना बिजनेस को सफलता के शिखर पर ले जाना हैं तो दोनों पार्टनर को एक समान मूल्य, लक्ष्य और कार्य नैतिकता रखनी होगी। अन्यथा आपका बिजनेस सफल नहीं होगा।

2. समान कौशल वाले साथी का चयन करना।

जब आपकी साझेदारी में व्यवसाय के अलग-अलग मजबूत बिंदु हों, तो आपको अपनी बिजनेस टीम की शक्ति को दोगुना करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई तकनीकी विशेषज्ञ जिसे इंटरनेट बिजनेस शुरू करना हो, वह मार्केटिंग कौशल के साथ एक पार्टनर की तलाश करे तो उसके और उसके बिजनेस के लिए यह अच्छा होगा। दोनों बिजनेस पार्टनर उस काम पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे जिस काम पर उनका मन लगता है। इससे इनको लाभ भी होगा।

हमेशा उस व्यक्ति की तलाश करनी चाहिए जिसका पिछला ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा हो। इसका अर्थ यह है कि हमेशा उस व्यक्ति को चुनें जिसे उस काम का अनुभव हो और साथ साथ अपने काम को कुशलता से करता हो। आपके लिए चीजें और भी बेहतर होंगी यदि आप ऐसे व्यक्ति को चुनते हैं जिसे अपने काम करते हुए देखा हो। इससे आप दोनों का लक्ष्य एक समान रहता है और उस लक्ष्य तक आप बिना किसी समस्या के पहुंच सकते हैं।

4. प्रत्येक पार्टनर की भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।

यहि आप अनौपचारिक बिजनेस के लिए पार्टनर की तलाश कर रहे हैं तो यह आपके लिए कुछ समय तक कारगर साबित हो सकता है, लेकिन यह लंबी अवधि में कार्य नहीं करेगा। यदि हर व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं तो हर पार्टनर को अपना कार्य पता होगा और वह उस कार्य में हुई किसी भी गलती के लिए जिम्मेदार होगा। जिसके चलते वह अपने कार्य को पूर्ण निष्ठा से करेगा। इसका सीधा लाभ कर्मचारी और ग्राहक दोनों को मिलेगा।

5. सही बिजनेस संरचना का चयन करना।/Selecting the right business structure.

अपने पार्टनरशिप को पार्टनरशिप बिजनेस की तरह देखना होगा। इससे आपको पार्टनरशिप के हर पहलू के बारे में पता चल सकता है। एक बिजनेस पार्टनर के मार्केटिंग के प्रत्येक रूप में जिम्मेदारी के संदर्भ में फायदे और नुकसान होते हैं, जिसमें कर और निरंतरता होती है। यह आपको बता सकता है कि आपको अपनी समस्या के लिए किसके पास जाना चाहिए।

6. इसे लिखित रूप में रखें।

यदि आप अपने किसी करीबी मित्र के साथ पार्टनरशिप बिजनेस शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो व्यवसाय संरचना के संबंध में आपको कानूनी दस्तावेज का विशेष रूप से ख्याल रखना चाहिए। उस दस्तावेज में दोनों साथियों द्वारा प्रयोग की जाने वाली राशि का विवरण होगा। निर्णय लेने वाला कौन होगा, और वह उद्योग में विवादों को कैसे सुलझाएं, और यदि एक पार्टनर संगठन छोड़ देता है तो इसके बाद की प्रक्रिया क्या होगी, यह सब उस दस्तावेज का हिस्सा होगा। किसी भी संगठन का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आने वाली कठिनाइयों से निपटने के लिए यह बेहद अधिक आवश्यक दस्तावेज है।

7. एक दूसरे के प्रति ईमानदार रहें।

एक दूसरे के प्रति आपकी ईमानदारी ही किसी भी बिजनेस की नींव रखती है। पूरा बिजनेस ही भरोसे पर चलता है। यदि आप इसे जीवित रख पाते हैं तो आपको इसका लाभ अवश्य मिलेगा। यदि किसी मामले में आपका आपके बिजनेस पार्टनर पर भरोसा से उठ जाता है तो इसका खामियाजा आपके व्यापार को भुगतना पड़ सकता है।यह चर्चा करने के लिए एक बड़ा मुद्दा हो सकता है, खासकर जब आप स्टार्टअप के बारे में योजना बना रहे होते हैं, जिसे वह जल्दी से जल्दी शुरू करना चाहते हैं। लेकिन एक बार जब आप स्थायी साझेदारी व्यवसाय की नींव शुरू करने के लिए समय निकालते हैं, तो आप नया बिजनेस कभी भी शुरू नहीं कर पाएंगे।

आप नीचे दिए गए लिंक पर हमारे मुफ्त कैलकुलेटर का उपयोग कर कोई जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

बिजनेस पार्टनरशिप के विफलताओं के कारण/ Reasons for partnership business failures

पार्टनरशिप बिजनेस में विफलता के कुछ सामान्य कारण हैं जिन्हें नीचे दिया गया है:
  1. साझेदारों में गलतफहमी
  2. साझेदारों में धोखे की भावना
  3. साझेदारों में पारदर्शिता का ना होना
  4. सभी साझेदारों में तालमेल की कमी
  5. सभी साझेदारों में कम बोलचाल
  6. तर्क वितर्क का कम होना
  7. साझेदारें में “मैं” की भावना का आ जाना
  8. साझेदारों में अपने ही अलग विचार उत्पन्न होना
  9. किसी एक भी साझेदार के मन में कोई बात लंबे समय से दबी रहना
  10. सभी का कठिन परिश्रम ना करना
  11. साझेदारियों में अनुकूलता का ना होना
अब, आइए आगे पढ़ते हैं कि हम इन सभी कारकों को ज्योतिषीय रूप से कैसे जांचते और इनका समाधान कैसे करते हैं।
जन्म कुंडली में पार्टनरशिप बिजनेस के लिए ग्रह / पार्टनरशिप बिजनेस के संकेत

वह ग्रह जो जन्म कुंडली/ Birth Chart के आधार पर व्यापार के साझेदार के चुनाव के चुनाव में सहायक हैं

ऊपर के लेख से आप व्यवसाय के साझेदार के अन्य कारकों के बारे में जान गए होंगे। हमने उन गुणों और लक्षणों के बारे में भी जान लिया है जिनका एक साझेदारी में होना बहुत अनिवार्य होता है। चलिए अब यह समझते हैं कि कैसे ज्योतिष की सहायता से व्यापार के लिए सही साथी का चुनाव कैसे करें। इन सब का पता लगाने के लिए आपकी जन्म कुंडली/ Janam Kundli में कुछ संकेत और ग्रहों के संयोजन मौजूद हैं जो व्यापार की सफलता के लिए उत्तम साथी चुनने में सहायक साबित हो सकते हैं। इन संकेतों को देखने और उन पर काम करने से आपको अपने बिजनेस के लिए एक उत्तम साझेदार मिल सकता है।
इसके लिए आप एक योग्य ज्योतिष से जातक की जन्म कुंडली में व्यवसाय वाले भाव का आकलन करवा सकते हैं। ज्योतिष आपकी कुंडली में उन ग्रहों के संयोजन की तलाश करते हैं जो व्यापार में साझेदारी की तरफ इशारा करते हैं। व्यापार में साझेदारी के चुनाव के लिए लग्न भाव, तीसरे भाव, सातवें भाव, दसवें भाव, और ग्यारहवें भाव में संबंध का आकलन किया जाता है। तीसरा, दसवां, और ग्यारहवां भाव और इनके स्वामी सिर्फ व्यवसाय के बारे में बतते हैं। जैसे – यदि सातवें भाव या उसके स्वामी किसी व्यापार के भाव से संबंध रखे, तो जातक को किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझेदारी करने की आवश्यकता पड़ सकती है। इन सभी भावों का बुध ग्रह से संबंध व्यापार के साझेदार के विषय में बताता है।
सातवें और दसवें भाव का लग्न, दूसरे, तीसरे, और ग्यारहवें भाव से आंतरिक संबंध व्यापार साझेदारी की मदद से सफलता को दर्शाता है।
लग्नेश और सप्तम भाव के स्वामी और दोनों बिजनेस पार्टनर का मानक स्थान एक दूसरे के संबंध में 6/8 या 2/12 की स्थिति में नहीं हो।
जिस नक्षत्र में लग्न का स्वामी और सप्तम भाव का स्वामी, एक दूसरे के संबंध में 2/12 या 6/8 स्थान पर ना हो। इस स्थिति में यदि आपकी कुंडली के सातवें और बारहवें भाव में कोई संबंध होता है तो इस स्थिति में घाटा होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। यदि आपकी कुंडली के सातवें और छठे भाव में कोई संबंध हो, तब दोनों साथियों के बीच में परेशानी आ सकती है।
हमें पीड़ित ग्रह जैसे – शनि, मंगल, सूर्य और राहु की आपकी जन्म कुंडली में स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए। अच्छे योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और बुध ग्रह का शनि, मंगल, शनि, और राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव से दूर रहना अनिवार्य है। यदि बुध ग्रह राहु, मंगल, और शनि के प्रभाव में आ जाए तो जातक को साझेदारी निभाने में परेशानी हो सकती है।

ज्योतिष के अनुसार व्यापार के साझेदार के लिए उत्तम समय/ Timing for selection of Business Partner astrologically

हर शुभ कार्य के घटने में समय एक अहम भूमिका होती है। इसी प्रकार, सही समय पर साझेदार को अपने व्यापार में जोड़ने का भी निर्णय आपके और आपके व्यापार के लिए बेहद जरूरी है। ज्योतिष में दशा और अंतरदशा प्रणाली आपके बिजनेस के लिए उत्तम साझेदार के चुनाव के लिए एक अहम भूमिका निभाता है। इस विषय में जानने के लिए सभी साथियों की जन्म कुंडली का आकलन करवाना अनिवार्य होगा। यदि साझेदारी में व्यक्ति की जगह कोई संगठन है तो इस स्थिति के लिए ज्योतिष में कुछ अनोखे उपकरण मौजूद है। इस स्थिति में ज्योतिषी को दूसरे, सातवें, दसवें, और ग्यारहवें भाव में ग्रहों का संयोजन का आकलन करना चाहिए। यदि आप सभी ग्रहों के मौजूदगी आपके अनुरूप है तो आपकी साझेदारी अच्छी हो सकता है। ऐसे योग होने का मतलब यह भी होता है कि आपको और आपके साथी का संबंध अच्छा और लंबे समय तक टिक सकता है।

ज्योतिष के अनुसार व्यापार के साझेदार के लिए उत्तम समय/ Timing for selection of Business Partner astrologically

हर शुभ कार्य के घटने में समय एक अहम भूमिका होती है। इसी प्रकार, सही समय पर साझेदार को अपने व्यापार में जोड़ने का भी निर्णय आपके और आपके व्यापार के लिए बेहद जरूरी है। ज्योतिष में दशा और अंतरदशा प्रणाली आपके बिजनेस के लिए उत्तम साझेदार के चुनाव के लिए एक अहम भूमिका निभाता है। इस विषय में जानने के लिए सभी साथियों की जन्म कुंडली का आकलन करवाना अनिवार्य होगा। यदि साझेदारी में व्यक्ति की जगह कोई संगठन है तो इस स्थिति के लिए ज्योतिष में कुछ अनोखे उपकरण मौजूद है। इस स्थिति में ज्योतिषी को दूसरे, सातवें, दसवें, और ग्यारहवें भाव में ग्रहों का संयोजन का आकलन करना चाहिए। यदि आप सभी ग्रहों के मौजूदगी आपके अनुरूप है तो आपकी साझेदारी अच्छी हो सकता है। ऐसे योग होने का मतलब यह भी होता है कि आपको और आपके साथी का संबंध अच्छा और लंबे समय तक टिक सकता है।

बिजनेस पार्टनरशिप में चंद्रमा की अनुकूलता

चंद्रमा का सभी ग्रहों और भावों से संबंध बिजनेस की साझेदारी में अहम भूमिका अदा करती है। पार्टनर की चंद्र राशि प्रतिकूल लक्षणों के अंतर्गत आए और कुंडली में दूसरे ग्रहों से संबंधित स्थिति के रूप में 6/8 या 2/12 पर स्थित हो, तो यह संयोजन बिजनेस पार्टनरशिप का संकेत देता है। बिजनेस पार्टनरशिप में चंद्रमा की अनुकूलता, साझेदारी में अहम भूमिका अदा करती है।

आपके मन में प्रश्न उठ सकता है कि – “आपका, आपके साथी से कैसे संबंध रहेगा”। ज्योतिष की सहायता से लग्न के स्वामी और सातवें भाव के स्वामी में मित्रता एक अच्छे साझेदारी की और संकेत देता है। यदि सातवें भाव और बुध का छठे भाव से संबंध है तो यह साझेदारी में परेशानी को दर्शाता है।

निष्कर्ष – जब हम बिजनेस शुरू करने का निर्णय लेते हैं, तो कुछ प्रश्न लोगों के मन में उठता होगा कि क्या मुझे व्यापार करना चाहिए? साझेदारी क्या होती है? क्या मुझे व्यापार के साझेदारी की तरफ अग्रसर होना चाहिए?

इसी प्रकार जब आप पार्टनरशिप बिजनेस में होते हैं तब भी आपके मन में भी बहुत प्रश्न उठ सकते हैं। जैसे – क्या साझेदारी मेरे व्यवसाय के लिए अच्छा है? साझेदार छोड़ जाएं तो क्या करना चाहिए? व्यापार में साझेदार के चुनाव करते समय क्या ध्यान में रखना चाहिए? मुझे कैसे पता चलेगा कि मैंने गलत साझेदार का चुनाव किया है?

इस स्थिति में वही व्यक्ति मदद कर सकता है जिसे जन्म कुंडली को पढ़ने का अनुभव हो और उसे पढ़ कर आपके लिए उत्तम व्यापार के योग के बारे में बता सके। मैंने पहले ही काफी प्रश्नों के उत्तर बता दिए हैं। यदि आपको फिर भी कोई परेशानी उठता है तो आप इस पेज पर मौजूद निःशुल्क कैलकुलेटर का प्रयोग कर सकते हैं।

किसी विशिष्ट मार्गदर्शन के लिए –

व्यापार साझेदारी पर ऑनलाइन रिपोर्ट ले सकते हैं

ज्योतिषीय सत्र के लिए आप मुझसे संपर्क कर सकते हैं।

आप हमारे वेबसाइट पर व्यापार से जुड़े अन्य लेख भी पढ़ सकते हैं। जैसे – व्यवसाय की विफलता के कारण, व्यवसाय के लिए शुभ नाम का सुझाव, व्यवसाय विस्तारीकरण, आपके जन्म कुंडली (Natal Chart) के आधार पर नए व्यवसाय का निर्णय, जन्मतिथि के अनुसार सही व्यवसाय चयन और पारिवारिक व्यवसाय का चयन।

नवींतम ज्योतिष समाचार – डॉ विनय बजरंगी

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