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	<title>पूर्ण चंद्रग्रहण 2026: भारत के इन शहरों में आज लगेगा चंद्र ग्रहण — दिल्ली, मुंबई, लखनऊ सहित टाइमिंग जारी</title>
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	<description><![CDATA[पूर्ण चंद्रग्रहण 2026 आज भारत के कई प्रमुख शहरों में दिखाई देगा। राजधानी दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु सहित अनेक क्षेत्रों में ग्रहण के सभी चरण स्पष्ट रहेंगे। खगोलीय रूप से यह एक सामान्य प्राकृतिक घटना है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से पूर्ण चंद्रग्रहण को सामूहिक भावनाओं, मन और चेतना से जोड़ा जाता है। इस दौरान चंद्रमा पर राहु&ndash;केतु का प्रभाव आत्ममंथन, संयम और संतुलन का संकेत देता है। यह समय भय का नहीं, बल्कि ठहरकर सोचने और भावनात्मक स्पष्टता पाने का माना जाता है। क्या है पूर्ण चंद्रग्रहण और क्यों है यह खास पूर्ण चंद्रग्रहण तब बनता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है। इस अवस्था में चंद्रमा तांबे या लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे आमतौर पर ब्लड मून कहा जाता है।2026 का पूर्ण चंद्रग्रहण इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यह भारत के बड़े हिस्से में साफ़ दिखाई देगा और इसकी अवधि भी अपेक्षाकृत लंबी रहेगी। मुख्य बिंदु: चंद्रमा पर पृथ्वी की पूर्ण छाया पड़ने से रंग में बदलाव भारत के अधिकांश क्षेत्रों में स्पष्ट दृश्यता लंबी अवधि के कारण खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व भारत के किन राज्यों में शहरों में दिखेगा ये चंद्रग्रहण? साल का पहला चंद्रग्रहण भारत की राजधानी दिल्ली समेत लखनऊ, कोलकाता, भोपाल, चेन्नई, पटना, बेंगलुरु, हैदराबाद और कानपुर में दिखाई देगा। इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों&mdash;अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा&mdash;में यह पूर्ण रूप से नजर आएगा। आपके शहर में कितने बजे दिखाई देगा चंद्र ग्रहण दिल्ली शाम 6:26 से 06:46 तक दिखाई देगा, कुल अवधि 20 मिनट 28 सेकेंड की होगी मुंबई शाम 6:42 पर दिखाई देगा, कुल 5 मिनट तक दिखाई देगा कोलकाता शाम 5:32 से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, लगभग 1 घंटा 15 मिनट तक दिखाई देगा ईटानगर शाम 5:07 मिनट से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, करीब 1 घंटा 40 मिनट तक दिखाई देगा पटना शाम 5:44 बजे से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, करीब 1 घंटा 3 मिनट तक ग्रहण नजर आएगा लखनऊ शाम 6:02 बजे से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, यहां लगभग 45 मिनट तक ही दिखेगा भोपाल शाम 6:21 बजे से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, करीब 26 मिनट तक दिखेगा चेन्नई शाम 6:18 बजे से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, लगभग 29 मिनट तक दिखेगा बेंगलुरु शाम 6:28 बजे से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, सिर्फ 19 मिनट तक नजर आएगा चंद्रग्रहण 2026: शहर-वार टाइमिंग मीडिया रिपोर्ट्स और खगोलीय संस्थानों के अनुसार 2026 का चंद्रग्रहण भारत के कई शहरों में दिखाई देगा। यह ग्रहण खगोलीय दृष्टि से खास होगा और आध्यात्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्य बिंदु: ग्रहण प्रारंभ: देर शाम, चंद्रमा पर छाया पड़ना शुरू पूर्ण चंद्रग्रहण: मध्य रात्रि के आसपास, ब्लड मून दृश्य ग्रहण समाप्त: तड़के, चंद्रमा फिर सामान्य रूप में धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्व भारत में चंद्रग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताएं गहरी हैं। कई स्थानों पर सूतक काल माना जाता है, जिसमें पूजा-पाठ से परहेज़ किया जाता है। वहीं वैज्ञानिक समुदाय इसे पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया मानता है और सामान्य जीवन पर किसी नकारात्मक प्रभाव से इनकार करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं या आम लोगों को लेकर फैली आशंकाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। सूतक काल को कई जगह धार्मिक रूप से माना जाता है विज्ञान इसे सामान्य खगोलीय घटना बताता है स्वास्थ्य से जुड़ी आशंकाओं का कोई प्रमाण नहीं ज्योतिषीय दृष्टिकोण यह खंड किसी भी प्रकार की सटीक भविष्यवाणी का दावा नहीं करता। ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रग्रहण को समय-ऊर्जा में परिवर्तन का संकेत माना जाता है, जो भावनाओं, विचारों और सामूहिक मानसिक प्रवृत्तियों को प्रभावित कर सकता है। ग्रहों की स्थिति को प्रतीकात्मक संकेतों के रूप में देखा जाता है, न कि निश्चित घटनाओं के रूप में। इसका उद्देश्य केवल आत्मचिंतन और सजगता को बढ़ाना है। भविष्यवाणी नहीं, केवल प्रतीकात्मक विश्लेषण समय-ऊर्जा और मानसिक प्रवृत्तियों पर फोकस आत्मचिंतन और जागरूकता का संकेत राहु-केतु की भूमिका ज्योतिष के अनुसार ग्रहण का संबंध राहु-केतु से जोड़ा जाता है। राहु भ्रम और अस्थिरता का प्रतीक है, जबकि केतु वैराग्य और अंतर्मुखी सोच दर्शाता है। ऐसे समय में भावनात्मक फैसलों से बचना और तथ्यों पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है। राहु: भ्रम व अनिश्चितता केतु: वैराग्य व आत्मचिंतन सलाह: विवेक और स्पष्ट जानकारी शनि का संकेत: संयम और अनुशासन शनि को जिम्मेदारी, अनुशासन और धैर्य का ग्रह माना जाता है। चंद्रग्रहण के आसपास शनि का प्रतीकात्मक संदेश यह माना जाता है कि जल्दबाज़ी या भावनात्मक फैसलों से बचें। व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर स्थिरता बनाए रखना अधिक उपयोगी रहता है। शनि जिम्मेदारी, संयम और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है संदेश: चंद्रग्रहण के समय जल्दबाज़ी और भावनात्मक फैसलों से बचें सलाह: व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर स्थिरता बनाए रखना उपयोगी माना जाता है चंद्रग्रहण और सामूहिक ऊर्जा ज्योतिषीय प्रतीकों के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और सामूहिक चेतना से जुड़ा माना जाता है। चंद्रग्रहण के समय भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इसे भय का नहीं, बल्कि आत्म-मंथन, ठहराव और मानसिक संतुलन बनाने का समय माना जाता है। भावनात्मक संवेदनशीलता में वृद्धि आत्म-मंथन और मानसिक ठहराव का संकेत डर नहीं, संतुलन पर ध्यान निष्कर्ष पूर्ण चंद्रग्रहण 2026 एक महत्वपूर्ण और आकर्षक खगोलीय घटना है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना सबसे आवश्यक है। यह पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्वाभाविक गति का परिणाम है, न कि किसी अशुभ संकेत का। ज्योतिषीय प्रतीकों का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि मानसिक सजगता, संयम और आत्म-संतुलन की याद दिलाना माना जाता है। ग्रहण के समय भावनात्मक संतुलन बनाए रखना, अफवाहों से दूर रहना और तथ्यों पर भरोसा करना ज़रूरी है। संदेश साफ है&mdash;ग्रहण को भय से नहीं, बल्कि प्रकृति की एक सुंदर, नियमित और दुर्लभ प्रक्रिया के रूप में देखें। शांत मन से इसका अवलोकन करें और वैज्ञानिक जानकारी को प्राथमिकता दें।]]></description>
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साल का पहला चंद्रग्रहण भारत की राजधानी दिल्ली समेत लखनऊ, कोलकाता, भोपाल, चेन्नई, पटना, बेंगलुरु, हैदराबाद और कानपुर में दिखाई देगा। इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों&mdash;अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा&mdash;में यह पूर्ण रूप से नजर आएगा। आपके शहर में कितने बजे दिखाई देगा चंद्र ग्रहण दिल्ली शाम 6:26 से 06:46 तक दिखाई देगा, कुल अवधि 20 मिनट 28 सेकेंड की होगी मुंबई शाम 6:42 पर दिखाई देगा, कुल 5 मिनट तक दिखाई देगा कोलकाता शाम 5:32 से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, लगभग 1 घंटा 15 मिनट तक दिखाई देगा ईटानगर शाम 5:07 मिनट से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, करीब 1 घंटा 40 मिनट तक दिखाई देगा पटना शाम 5:44 बजे से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, करीब 1 घंटा 3 मिनट तक ग्रहण नजर आएगा लखनऊ शाम 6:02 बजे से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, यहां लगभग 45 मिनट तक ही दिखेगा भोपाल शाम 6:21 बजे से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, करीब 26 मिनट तक दिखेगा चेन्नई शाम 6:18 बजे से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, लगभग 29 मिनट तक दिखेगा बेंगलुरु शाम 6:28 बजे से लेकर 06:46 तक दिखाई देगा, सिर्फ 19 मिनट तक नजर आएगा चंद्रग्रहण 2026: शहर-वार टाइमिंग मीडिया रिपोर्ट्स और खगोलीय संस्थानों के अनुसार 2026 का चंद्रग्रहण भारत के कई शहरों में दिखाई देगा। यह ग्रहण खगोलीय दृष्टि से खास होगा और आध्यात्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्य बिंदु: ग्रहण प्रारंभ: देर शाम, चंद्रमा पर छाया पड़ना शुरू पूर्ण चंद्रग्रहण: मध्य रात्रि के आसपास, ब्लड मून दृश्य ग्रहण समाप्त: तड़के, चंद्रमा फिर सामान्य रूप में धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्व भारत में चंद्रग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताएं गहरी हैं। कई स्थानों पर सूतक काल माना जाता है, जिसमें पूजा-पाठ से परहेज़ किया जाता है। वहीं वैज्ञानिक समुदाय इसे पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया मानता है और सामान्य जीवन पर किसी नकारात्मक प्रभाव से इनकार करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं या आम लोगों को लेकर फैली आशंकाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। सूतक काल को कई जगह धार्मिक रूप से माना जाता है विज्ञान इसे सामान्य खगोलीय घटना बताता है स्वास्थ्य से जुड़ी आशंकाओं का कोई प्रमाण नहीं ज्योतिषीय दृष्टिकोण यह खंड किसी भी प्रकार की सटीक भविष्यवाणी का दावा नहीं करता। ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रग्रहण को समय-ऊर्जा में परिवर्तन का संकेत माना जाता है, जो भावनाओं, विचारों और सामूहिक मानसिक प्रवृत्तियों को प्रभावित कर सकता है। ग्रहों की स्थिति को प्रतीकात्मक संकेतों के रूप में देखा जाता है, न कि निश्चित घटनाओं के रूप में। इसका उद्देश्य केवल आत्मचिंतन और सजगता को बढ़ाना है। भविष्यवाणी नहीं, केवल प्रतीकात्मक विश्लेषण समय-ऊर्जा और मानसिक प्रवृत्तियों पर फोकस आत्मचिंतन और जागरूकता का संकेत राहु-केतु की भूमिका ज्योतिष के अनुसार ग्रहण का संबंध राहु-केतु से जोड़ा जाता है। राहु भ्रम और अस्थिरता का प्रतीक है, जबकि केतु वैराग्य और अंतर्मुखी सोच दर्शाता है। ऐसे समय में भावनात्मक फैसलों से बचना और तथ्यों पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है। राहु: भ्रम व अनिश्चितता केतु: वैराग्य व आत्मचिंतन सलाह: विवेक और स्पष्ट जानकारी शनि का संकेत: संयम और अनुशासन शनि को जिम्मेदारी, अनुशासन और धैर्य का ग्रह माना जाता है। चंद्रग्रहण के आसपास शनि का प्रतीकात्मक संदेश यह माना जाता है कि जल्दबाज़ी या भावनात्मक फैसलों से बचें। व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर स्थिरता बनाए रखना अधिक उपयोगी रहता है। शनि जिम्मेदारी, संयम और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है संदेश: चंद्रग्रहण के समय जल्दबाज़ी और भावनात्मक फैसलों से बचें सलाह: व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर स्थिरता बनाए रखना उपयोगी माना जाता है चंद्रग्रहण और सामूहिक ऊर्जा ज्योतिषीय प्रतीकों के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और सामूहिक चेतना से जुड़ा माना जाता है। चंद्रग्रहण के समय भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इसे भय का नहीं, बल्कि आत्म-मंथन, ठहराव और मानसिक संतुलन बनाने का समय माना जाता है। भावनात्मक संवेदनशीलता में वृद्धि आत्म-मंथन और मानसिक ठहराव का संकेत डर नहीं, संतुलन पर ध्यान निष्कर्ष पूर्ण चंद्रग्रहण 2026 एक महत्वपूर्ण और आकर्षक खगोलीय घटना है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना सबसे आवश्यक है। यह पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्वाभाविक गति का परिणाम है, न कि किसी अशुभ संकेत का। ज्योतिषीय प्रतीकों का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि मानसिक सजगता, संयम और आत्म-संतुलन की याद दिलाना माना जाता है। ग्रहण के समय भावनात्मक संतुलन बनाए रखना, अफवाहों से दूर रहना और तथ्यों पर भरोसा करना ज़रूरी है। संदेश साफ है&mdash;ग्रहण को भय से नहीं, बल्कि प्रकृति की एक सुंदर, नियमित और दुर्लभ प्रक्रिया के रूप में देखें। शांत मन से इसका अवलोकन करें और वैज्ञानिक जानकारी को प्राथमिकता दें।]]></description>
        <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 00:00:00 GMT</pubDate>
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