<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	>
<channel>
	<title>तृतीया तिथि: ज्योतिष और धार्मिक दृष्टिकोण से जानें तृतीया तिथि प्रभाव</title>
	<atom:link href="https://www.vinaybajrangi.com/feed/blog/tritiya-tithi" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.vinaybajrangi.com/blog/tritiya-tithi</link>
	<description><![CDATA[हिन्दू पंचांग के अनुसार तिथि का प्रमुख स्थान है, तृतीया तिथि को जया तिथि के नाम से भी जाना जाता है। इस समय किए जाने वाले कार्यों में सफलता की प्राप्ति होती है। चन्द्रमा अपनी यात्रा के दौरान जब सूर्य के भोगांश से दूर होता चला जाता है तो तिथियों का बनना शुरु होता है। हर तिथि चन्द्रमा की स्थिति पर आधारित होती है। चन्द्रमा की चलने एवं गति के आधार पर ही तिथियां बनती चली जाती हैं। हिन्दू पंचांग की तीसरी तिथि को तृतीया तिथि के नाम से जाना जाता है। तृतीया तिथि को शुभ तिथि के रूप में स्थान प्राप्त होता है। इस तिथि को धार्मिक कार्यों, संस्कारों, और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना गया है।]]></description>
	<lastBuildDate>Tue, 22 Sep 2026 14:46:32 GMT</lastBuildDate>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.3</generator>
    
      <item>
        <title><![CDATA[तृतीया तिथि: ज्योतिष और धार्मिक दृष्टिकोण से जानें तृतीया तिथि प्रभाव]]></title>
        <link>https://www.vinaybajrangi.com/blog/tritiya-tithi</link>
        <guid isPermaLink="true">https://www.vinaybajrangi.com/blog/tritiya-tithi</guid>
        <description><![CDATA[हिन्दू पंचांग के अनुसार तिथि का प्रमुख स्थान है, तृतीया तिथि को जया तिथि के नाम से भी जाना जाता है। इस समय किए जाने वाले कार्यों में सफलता की प्राप्ति होती है। चन्द्रमा अपनी यात्रा के दौरान जब सूर्य के भोगांश से दूर होता चला जाता है तो तिथियों का बनना शुरु होता है। हर तिथि चन्द्रमा की स्थिति पर आधारित होती है। चन्द्रमा की चलने एवं गति के आधार पर ही तिथियां बनती चली जाती हैं। हिन्दू पंचांग की तीसरी तिथि को तृतीया तिथि के नाम से जाना जाता है। तृतीया तिथि को शुभ तिथि के रूप में स्थान प्राप्त होता है। इस तिथि को धार्मिक कार्यों, संस्कारों, और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना गया है।]]></description>
        <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
      </item>
</channel>
</rss>