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	<title>कभी सोचा है कि एक रात्रि में ऐसा क्या घटा था कि स्वयं समय, स्थान और ग्रह-नक्षत्रों की चाल रुक गई थी?</title>
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	<description><![CDATA[जिस क्षण श्रीकृष्ण का जन्म हुआ &mdash; उस समय केवल एक बालक का जन्म नहीं हुआ, बल्कि धर्म, न्याय, प्रेम, और लीला स्वयं पृथ्वी पर अवतरित हुए। जन्माष्टमी की रात कोई साधारण रात नहीं, यह सर्व सिद्धि प्रदायक रात होती है, जब ब्रह्मांडीय शक्तियाँ पृथ्वी के सबसे निकट होती हैं। यह वो रात होती है, जब जन्मकुंडली के दोष शांत किए जा सकते हैं, पाप कर्मों का नाश हो सकता है और भविष्य को बदला जा सकता है। भूमिका: जब धरती पर स्वयं ब्रह्मांड ने जन्म लिया "कभी कल्पना की है कि कोई ऐसा जन्म हो, जिसे देखने के लिए देवता भी अपनी सांसें रोक लें?" जन्माष्टमी केवल एक पर्व नहीं &mdash; वह रात्रि है जब पूरा ब्रह्मांड एक दिव्य क्षण के आगे नतमस्तक हो गया था। जब बंद कारागार के भीतर, लोहे की जंजीरों और पहरेदारों के बीच, एक ऐसा प्रकाश प्रकट हुआ &mdash; जिसने समय को रोक दिया, दिशाओं को मौन कर दिया, और काल को पीछे छोड़ दिया। वह रात थी जब अधर्म पर धर्म की विजय का बीज बोया गया। जब कोई बालक नहीं, बल्कि स्वयं परब्रह्म, योगेश्वर, लीलामय, श्रीकृष्ण अवतरित हुए &mdash; एक संदेश लेकर: "हर अंधकार की कोख से एक ज्योति जन्म लेती है, यदि विश्वास कायम हो।" और इसी विश्वास को साकार करने का दिन है &mdash; जन्माष्टमी। यह रात केवल पूजन या उपवास की नहीं &mdash; यह रात है जागने की, जुड़ने की, और जन्म लेने की &mdash; दोबारा! जन्म केवल शरीर का नहीं होता &mdash; विचारों का, आत्मा का, संकल्पों का और भविष्य का भी जन्म होता है।और जन्माष्टमी 2025, ज्योतिषीय दृष्टि से, उस जन्म के लिए सबसे अधिक शक्तिशाली और उपयुक्त रात है।]]></description>
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        <title><![CDATA[कभी सोचा है कि एक रात्रि में ऐसा क्या घटा था कि स्वयं समय, स्थान और ग्रह-नक्षत्रों की चाल रुक गई थी?]]></title>
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        <pubDate>Mon, 28 Jul 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
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