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	<title>पितृ पक्ष में क्यों पितृ दोष समेत कुंडली के अन्य दोष भी हो जाते हैं शांत</title>
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	<description><![CDATA[हिंदू धर्म में जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आधार स्तंभ हैं और इन की की प्राप्ति तभी संभव मानी जाती है जब व्यक्ति पितृ ऋण, देव ऋण और ऋषि ऋण से मुक्त हो। जन्म कुंडली में बनने वाला पितृ दोष वंश कुल परंपरा के लिए बहुत बड़ी क्षति का कारण बन सकता है। इस दोष के चलते किसी व्यक्ति के जीवन में करियर, विवाह, संतान, सुख संपत्ति से जुड़े मामले हमेशा ही परेशानी में घिरे रहते हैं इन का सुख पितृ दोष के चलते मिलना असंभव हो जाता है। इसी कारण से शास्त्रों में इस दोष की शांति के लिए श्राद्ध तर्पण के कार्यों को करने की बात कही गई है। वैसे तो हर माह में आने वाली अमावस्या का समय पितरों के पूजन के लिए विशेष होता ही है लेकिन आश्विन माह में आने वाला पहला भाग जिसे कृष्ण पक्ष के रूप में जाना जाता है श्राद्ध कार्यों के लिए ही निमित्त होता है और इस समय पर किया गया पितृ पूजन उत्तम फलों को देता है। जीवन में कोई भी ऋण अच्छा नहीं होता है और पितृ ऋण सबसे महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि यह जन्म के साथ ही हर जीव पर लग जाता है। पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और उनके कल्याण के लिए किया गया कर्म ही पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसी उद्देश्य से हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष मनाया जाता है। यह सोलह दिन का विशेष कालखंड पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत शुभ होता है और कुंडली में स्थित पितृ दोष सहित अन्य अनेक दोषों की शांति का भी अत्यंत प्रभावशाली समय होता है।]]></description>
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        <title><![CDATA[पितृ पक्ष में क्यों पितृ दोष समेत कुंडली के अन्य दोष भी हो जाते हैं शांत]]></title>
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        <description><![CDATA[हिंदू धर्म में जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आधार स्तंभ हैं और इन की की प्राप्ति तभी संभव मानी जाती है जब व्यक्ति पितृ ऋण, देव ऋण और ऋषि ऋण से मुक्त हो। जन्म कुंडली में बनने वाला पितृ दोष वंश कुल परंपरा के लिए बहुत बड़ी क्षति का कारण बन सकता है। इस दोष के चलते किसी व्यक्ति के जीवन में करियर, विवाह, संतान, सुख संपत्ति से जुड़े मामले हमेशा ही परेशानी में घिरे रहते हैं इन का सुख पितृ दोष के चलते मिलना असंभव हो जाता है। इसी कारण से शास्त्रों में इस दोष की शांति के लिए श्राद्ध तर्पण के कार्यों को करने की बात कही गई है। वैसे तो हर माह में आने वाली अमावस्या का समय पितरों के पूजन के लिए विशेष होता ही है लेकिन आश्विन माह में आने वाला पहला भाग जिसे कृष्ण पक्ष के रूप में जाना जाता है श्राद्ध कार्यों के लिए ही निमित्त होता है और इस समय पर किया गया पितृ पूजन उत्तम फलों को देता है। जीवन में कोई भी ऋण अच्छा नहीं होता है और पितृ ऋण सबसे महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि यह जन्म के साथ ही हर जीव पर लग जाता है। पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और उनके कल्याण के लिए किया गया कर्म ही पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसी उद्देश्य से हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष मनाया जाता है। यह सोलह दिन का विशेष कालखंड पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत शुभ होता है और कुंडली में स्थित पितृ दोष सहित अन्य अनेक दोषों की शांति का भी अत्यंत प्रभावशाली समय होता है।]]></description>
        <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
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