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	<title>फुलेरा दूज : जब श्री कृष्ण राधा रानी संग खेलते हैं पृथ्वी पर होली</title>
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	<description><![CDATA[फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष के आरंभ होते ही शुरु हो जाती है रंगों के उत्सव की तैयारियां जिसका पहला पड़ाव ही फुलेरा दूज। फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन मनाई जाती है फुलेरा दूज। इस उत्सव का संबंध प्रेम, समर्पण, विवाह जीवन एवं परिवार की शुभता के साथ जुड़ा हुआ है। फुलेरा दूज के दिन को एक बहुत ही शुभ समय भी माना गया है। धार्मिक एवं ज्योतिष दोनों ही आधारों पर इस दिन की महत्ता जीवन को खुशहाल बनाने वाली मानी गई है। फुलेरा दूज का उत्सव वैसे तो उत्तर भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। ब्रज, मथुरा,वृंदावन के क्षेत्रों में इस दिन को भगवान श्री कृष्ण एवं श्री राधा जी के साथ रंगों-फूलों की होली खेलते हुए मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना होती है, विशेष शुभ मुहूर्त होने के कारण इस दिन विवाह कार्यों को भी संपन्न किया जाता है। मांगलिक एवं धार्मिक सभी तरह से फुलेरा दूज अपना विशेष स्थान रखती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण राधा जी के साथ पृथ्वी पर खेलते हैं फूलों की होली।]]></description>
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        <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
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