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	<title>निर्जला एकादशी : सभी एकादशियों का फल मिलता है निर्जला एकादशी के दिन</title>
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	<description><![CDATA[निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ और बहुत ही विशेष एकादशी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी को साल भर में आने वाली सभी एकादशियों से मिलने वाले फल की प्राप्ति का समय भी माना जाता है। अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी निर्जला एकादशी व्रत जीवन में शुभ कर्मों को बढ़ाने वाला होता है। &ldquo;ज्येष्ठे मासि नृपश्रेष्ठ या शुलैकादशी शुभा। निर्जलं समुपौष्यात्र जलकुम्भान् सशर्करान् प्रदाय विप्रमुख्येभ्यो मोदते विष्णुसन्निधौ।।&rdquo; स्कन्दपुराण के अनुसार "ज्येष्ठमास के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी तिथि है उसमें निर्जला उपवास करते हुए जल भरे कुंभ ओर चीनी के सहित ब्राह्मणों को दान देने से श्री विष्णु भगवान का सानिध्य प्राप्त होता है।" निर्जला एकादशी का दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। निर्जला एकादशी का अर्थ है जल के बिना एकादशी व्रत को रखना। इस एकादशी में अन्न और जल का त्याग करते हुए उपवास रखना होता है। जिसके चलते इस एकादशी को वर्ष की सभी एकादशियों में सबसे अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। ज्येष्ठ माह के कठोर वातावरण में रखा गया निर्जला एकादशी का व्रत एक बहुत ही प्रभावशाली व्रत है। आइये जान लेते हैं कि निर्जला एकादशी के दिन स्नान दान और पूजा लाभ इस एकादशी को भीम एकादशी, पांडव एकादशी, ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी भी कहा जाता है। इस एकादशी का संबंध महाभारत काल से भी प्राप्त होता है जिसमें "भीमसेन ने श्री व्यास जी से कहा कि वे सभी व्रतों का पालन करने में असमर्थ हैं क्योंकि उनका भोजन त्यागना अत्यंत कठिन है। तब व्यासजी ने उन्हें निर्जला एकादशी व्रत रखने का परामर्श दिया और कहा कि जो व्यक्ति यह एक व्रत करता है उसे वर्ष भर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है"।]]></description>
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        <pubDate>Thu, 22 May 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
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