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	<title>मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 : पितरों की पूजा का दुर्लभ समय</title>
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	<description><![CDATA[मार्गशीर्ष अमावस्या का पर्व स्नान दान के लिए बहुत ही विशेष माना गया है। हर साल आने वाली अमावस्या में से एक है मार्गशीर्ष माह में आने वाली अमावस्या तिथि। इस तिथि के दौरान भक्त करते हैं पितरों का पूजन और किए जाते हैं स्नान दान से संबंधित कार्य। मार्गशीर्ष माह की अमावस्या के दौरान पवित्र धर्मस्थलों में लगता है मेला और साथ ही भक्त करते हैं अनुष्ठान जो बनता है आस्था का संगम एवं इस संगम में हर भक्त दर्ज कराता है अपनी उपस्थिति। मार्गशीर्ष माह जिसे श्री कृष्ण भगवान ने दिया है अपना आधार। इस माह में आने वाली अमावस्या के पूजन से भक्तों को मिलता है पितरों का आशीर्वाद और नहीं परेशान करता है पितृ दोष। "मासानां मार्गशीर्षोऽहम्" भगवान कृष्ण कहते हैं कि महिनों में मैं मार्गशीर्ष माह हूँ जिसका अर्थ है कि मैं इस माह का प्रतिनिधित्व करता हूं। ऎसे में इस माह आने वाली अमवस्या को बहुत ख़ास माना गया है। इस तिथि पर किया गया दान कई गुना फल देने वाला होता है। इस अमावस्या के दिन भक्त भगवान श्री कृष्ण और भगवान शिव का पूजन करते हैं। इस तिथि को पितृ शांति के लिए बहुत विशेष माना जाता है। इस समय पूर्वजों के लिए पूजा होती है उनकी मुक्ति के लिए शांति पाठ किए जाते हैं| ब्राह्मण भोज एवं मंत्र जाप शांति पूजा इत्यादि कामों को किया जाता है।]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
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