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	<title>क्यों बार-बार रिश्ते टूट रहे हैं? क्या सप्तम भाव में राहु-केतु कारण हैं?</title>
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	<description><![CDATA[जब सगाई बार-बार टूटती है, शादी के बाद अचानक झगड़े बढ़ जाते हैं, या पार्टनर पर भरोसा टिक नहीं पाता &mdash; तो केवल व्यवहार को दोष देना अधूरा विश्लेषण हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार सप्तम भाव विवाह, साझेदारी और भावनात्मक संतुलन का केंद्र है। यदि इसी भाव में राहु या केतु स्थित हों, तो संबंध सामान्य नहीं रहते &mdash; वे कर्मिक, तीव्र और जटिल हो जाते हैं। राहु-केतु का प्रभाव भ्रम, असंतोष, अविश्वास या अचानक मोड़ के रूप में प्रकट हो सकता है। परंतु हर राहु-केतु तलाक नहीं देता। सही विश्लेषण के बिना निष्कर्ष निकालना खतरनाक है, क्योंकि समस्या ग्रहों की सक्रिय दशा, नवांश पुष्टि या सप्तमेश की स्थिति से भी जुड़ी हो सकती है।]]></description>
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        <title><![CDATA[क्यों बार-बार रिश्ते टूट रहे हैं? क्या सप्तम भाव में राहु-केतु कारण हैं?]]></title>
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        <description><![CDATA[जब सगाई बार-बार टूटती है, शादी के बाद अचानक झगड़े बढ़ जाते हैं, या पार्टनर पर भरोसा टिक नहीं पाता &mdash; तो केवल व्यवहार को दोष देना अधूरा विश्लेषण हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार सप्तम भाव विवाह, साझेदारी और भावनात्मक संतुलन का केंद्र है। यदि इसी भाव में राहु या केतु स्थित हों, तो संबंध सामान्य नहीं रहते &mdash; वे कर्मिक, तीव्र और जटिल हो जाते हैं। राहु-केतु का प्रभाव भ्रम, असंतोष, अविश्वास या अचानक मोड़ के रूप में प्रकट हो सकता है। परंतु हर राहु-केतु तलाक नहीं देता। सही विश्लेषण के बिना निष्कर्ष निकालना खतरनाक है, क्योंकि समस्या ग्रहों की सक्रिय दशा, नवांश पुष्टि या सप्तमेश की स्थिति से भी जुड़ी हो सकती है।]]></description>
        <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
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