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	<title>कोकिला व्रत : प्रेम विवाह के लिए देवी पार्वती ने रखा था कोकिला व्रत</title>
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	<description><![CDATA[कोकिला व्रत का पालन आषाढ़ माह में आने वाली पूर्णिमा तिथि के दिन रखा जाता है। इस व्रत को विशेषकर चतुर्दशी के दिन नियमों का पालन करते हुए व्रत का संकल्प आरंभ किया जाता है और पूर्णिमा पर इसे रखा जाता है। शास्त्र अनुसार इस व्रत के प्रभाव से मनोकूल वर की प्राप्ति संभव होती है। लव मैरिज योग प्रबल होता है। कुंवारी कन्याओं अपने मनपसंद वर की प्राप्ति हेतु एवं विवाहित महिलाएं अपने दांपत्य जीवन के सुख हेतु इस दिन को भक्ति भाव से के साथ मनाती हैं। कुछ स्थानों पर गायत्री यज्ञ जितना ही महत्व कोकिला उपवास को दिया जाता है। जीवनसाथी की लंबी आयु , संतान की उन्नति और घर का सुख-शांति प्राप्त करने हेतु यह व्रत किया जाता है। महिलाएं पारंपरिक वस्त्र धारण कर सुबह की विधियों को एकाग्रचित्त होकर निभाते हुए कोकिला व्रत को भक्ति भाव के साथ रखती हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न स्थानों एवं मतों में व्रत के आरंभ व समापन के समय में कुछ भिन्नता पाई जाती है लेकिन मूल उद्देश्य सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति ही माना गया है।]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Jul 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
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