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	<title>काली चौदस 2025 : महारात्रि में काली पूजन का ज्योतिष महत्व</title>
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	<description><![CDATA[कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि काली चौदस के नाम से अत्यंत ही पूजनीय रही है। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक चतुर्दशी तिथि के समय देवी काली का आगमन होता है। देवी के प्राकट्य भाव को भी इस दिन के रूप में मनाते हैं। दिपावली से एक दिन पहले आने वाली यह रात्रि साधकों के लिए बहुत विशेष होती है जो देवी काली का पूजन करते हैं या जो लोग तंत्र अनुष्ठानों के कार्यों को पूर्ण आहुति देना चाहते हैं., साधना के स्तर पर आगे पहुंचना चाहते हैं। काली चौदस के दिन उन समस्त तंत्र क्रियाओं को किया जाता है जिनके द्वारा साधक अपनी साधना को सफल कर पाता है। दीपावली की पूर्व संध्या यानी काली चौदस अथवा काली पूजा का अत्य्ंत ही विशेष महत्व रहा है। सघन अंधकार से युक्त समय पर काली का आह्वान सभी नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करने वाला होता है। देवी मां भक्तों की रक्षा एवं उनके सुरक्षा हेतु सदैव उपस्थित होती हैं। काली चौदस का पर्व अपने में अनेक गहरे रहस्य, शक्ति और तांत्रिक साधना को समाहित किए हुए है भारत के कुछ क्षेत्रों में इस पर्व की अलग ही आभा देखी जा सकती है। यह पर्व विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा, त्रिपुरा, झारखंड, बिहार, नेपाल और कई अन्य भागों में अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाया जाता है|]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Oct 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
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