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	<title>ज्येष्ठ अमावस्या : शनि जन्म के साथ ही ज्योतिष में हुआ बड़ा बदलाव</title>
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	<description><![CDATA[हिन्दू पंचांग के अनुसार जब ज्येष्ठ माह के मध्य का पड़ाव ज्येष्ठ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि ही ज्येष्ठ अमावस्या के रूप में पूजी जाती है। यही वह समय होता है जिस समय नव ग्रहों में एक शनि देव का अवतरण भी होता है और ज्योतिष के साथ साथ आध्यात्मिक स्तर पर बड़े बदलावों को देखा गया है। ज्येष्ठ माह में आने वाली अमावस्या तिथि का संबंध कई खास घटनाओं का साक्षात्कार करवाता है। शनि जन्म से लेकर वट सावित्री व्रत मृत्यु पर विजय की प्राप्ति का संयोग भी बन जाता है। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन को धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ, स्नान और दान, ग्रह पूजन जैसे कार्यों के लिए अत्यंत ही विशेष माना गया है। ज्येष्ठ अमावस्या को कई नामों से पुकारा जाता रहा है, इस दिन को जेठ अमावस्या, भावुका अमावस्या, शनि जन्म अमावस्या या दर्श अमावस्या इत्यादि नामों से भी पुकारा जाता है। आइये जानने की कोशिश करते हैं कि साल में आने वाली अन्य अमावस्याओं से अलग इस दिन को ज्योतिष के बदलाव में इतना विशेष क्यों माना गया है और इस दिन में किन अनुष्ठानों को करना फलदायी होता है।]]></description>
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        <title><![CDATA[ज्येष्ठ अमावस्या : शनि जन्म के साथ ही ज्योतिष में हुआ बड़ा बदलाव]]></title>
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        <pubDate>Tue, 13 May 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
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