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	<title>हरतालिका तीज : क्यों और कब रखा जाता है हरतालिका तृतीया व्रत</title>
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	<description><![CDATA[हरतालिका तीज का पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। हरतालिका तीज की परंपरा पुरातन काल से ही चली आ रही है जो सौभाग्य एवं परिवार की सुख समृद्धि का प्रतीक होती है। परंपरागत रूप से हरतालिका तीज का उत्सव महिलाओं द्वारा मनाया जाता है जिसमें विवाहित स्त्रियां अपने पति संतान एवं परिवार की सुख समृद्धि के लिए देवी गौरी और भगवान शिव की पूजा करती हैं। हरतालिका तीज का संबंध शास्त्रों एवं धार्मिक मान्यताओं से गहराई के साथ जुड़ा हुआ है जो सनातन काल से ही भक्ति और श्रद्धा का समय रहा है। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या के बाद पुनः उनसे मिलन प्राप्त किया था। ऐसा कहा जाता है कि देवी पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कई जन्म लिए ओर अंतिम पड़ाव में भाद्रपद शुक्ल तृतीया को भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था। हरतालिका तीज का व्रत सबसे पहले किसने रखा, इस दिन के पूजा विधान और हरतालिका कथा के बारे में आइये जानते हैं विस्तार पूर्वक जिससे सभी भक्त इस दिन का विशेष रूप से लाभ उठा सकें ओर जीवन में आ रही बाधाओं को दूर कर पाएं।]]></description>
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        <pubDate>Fri, 22 Aug 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
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