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	<title>गोवत्स द्वादशी 2025 : नोट कर लें डेट पूजा मुहूर्त और पूजा विधि</title>
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	<description><![CDATA[कार्तिक माह में आने वाली द्वादशी को गोवत्स द्वादशी के रूप में पूजनीय रही है। गोवत्स द्वादशी को कुछ स्थानों में बछ बारस नाम से भी पुकारा जाता है। इस दिन गौ के साथ बछड़े की पूजा का विधान रहा है। संतानवती स्त्रियां इस दिन गौ माता एवं उसके बछड़े की पूजा करती है। कृषि प्रधान भारत राष्ट्र में पशुधन को सदैव ही पूजनीय स्थान दिया गया है और इसी के मध्य कुछ उत्सव भी पशुओं के प्रति प्रेम स्नेह भक्ति को दर्शाने वाले रहे हैं। कार्तिक माह में आने वाली द्वादशी इसका अनुपम उदाहरण बनती है। आइये जान लेते हैं आखिर गोवत्स द्वादशी को शास्त्रों में इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है।]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
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