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	<title>देवी शैलपुत्री पूजा से शांत होते हैं कुंडली के दोष, जानें शैलपुत्री मंत्र, कथा और महत्व</title>
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	<description><![CDATA[या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ देवी दुर्गा के नौ रुपों में पहला रुप शैल पुत्री का माना गया है. नवरात्री के दौरान माता शैल पुत्री की पूजा का विशेष विधान रहता है. नवरात्रि पूजन के अलावा भी भक्त किसी भी दिन देवी शैल पुत्री की पूजा भक्ति भाव के साथ करते हुए देवी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं. देवी शैलपुत्री की साधना भक्त को जीवन में सुख समृद्धि के साथ साथ आध्यात्मिक शक्ति भी प्रदान करती है. नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री पूजा का विधान विशेष होता है तो चलिये जान लेते हैं कैसे करें देवी की पूजा और शक्ति का यह स्वरुप कैसे देता है भक्ति को नित नए रंग. शैलपुत्री चैत्र नवरात्रि के पहले दिन की पूजा प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी । तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ॥ नवरात्रि का आरंभ शैल पुत्री के पूजन से आरंभ होता है. शास्त्रों के अनुसार देवी दुर्गा के नौ अवतारों की पूजा करने से भक्त की चेतना और उसकी मानसिकता को प्रकाश मिलता है. यही प्रकाश जीवन को आनंद एवं सुखद अनुभूति देने वाला होता है. नवरात्रि प्रथम दिन में घटस्थापना के साथ देवी शैलपुत्री / shailputri devi का आहवान किया जाता है.]]></description>
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        <title><![CDATA[देवी शैलपुत्री पूजा से शांत होते हैं कुंडली के दोष, जानें शैलपुत्री मंत्र, कथा और महत्व]]></title>
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        <pubDate>Thu, 19 Sep 2024 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
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