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	<title>कब है वैशाख पूर्णिमा?</title>
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	<description><![CDATA[हिंदू व बौद्ध धर्म की मान्यताओं के अनुसार वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह पूर्णिमा विशेषकर दरिद्रता दूर करने के लिए जानी जाती है। श्री कृष्ण के परम मित्र सुदामा की दरिद्रता भी बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवन कृष्ण से इसके महत्त्व को जानकर दूर हुई थी। इस दिन भगवान् विष्णु के नवें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था, इसलिए वैशाख पूर्णिमा का दूसरा नाम बुद्ध पूर्णिमा भी है। यही कारण है की बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु व भगवान् बुद्ध दोनों की पूजा की जाती है। इस दिन चंद्रदेव की पूजा करने का भी विधान है। हिंदू धर्म के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने से सारी मनोकामना पूरी होती है। वैशाख के महीने को भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना माना गया है। ब्रह्म पुराण में ब्रह्मा जी ने वैशाख मास को सभी हिंदू महीनों से सर्वश्रेष्ठ बताया है। इस दिन व्रत व पूजा अर्चना से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। और इस दिन चन्द्रमा की पूजा करने से जातक की कुंडली में उपस्थित हर प्रकार का चंद्र दोष दूर होता है। इसके अलावा वैशाख पूर्णिमा/Vaishakh Purnima पर श्रद्धा पूर्वक व्रत व पूजन-पाठन से सभी प्रकार के दुष्कर्मों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु उपरांत स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं। यही कारण है कि इस व्रत का वर्णन यमराज देवता को प्रसन्न करने के लिए भी किया गया है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर यमराज को प्रसन्न कर, असमय मृत्यु को टाला जा सकता है। वैशाख पूर्णिमा 2023 तिथि हिंदू पंचांग/Hindu Panchang के अनुसार 05 मई को वैशाख पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा। वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ 04 मई 2023 रात 11 बजकर 44 मिनट पर होगा। वहीं पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 05 मई, रात 11 बजकर 03 मिनट पर होगी। बुद्ध/वैशाख पूर्णिमा पूजा विधि वैशाख पूर्णिमा के दिन विधि विधान से व्रत रखने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वैशाख पूर्णिमा का व्रत रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें। फिर स्नान करें। स्नान करने के पश्चात सूर्य देवता को अर्घ्य दें और गायत्री मंत्र का जाप करें। अर्घ देते हुए आप &lsquo;ओम सूर्याय नमः&rsquo; का तीन बार जाप करें। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ने से लाभ मिलता है। घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर विष्णु जी को नमन करें और उनके नाम का जाप व आरती करें। इस दिन कई लोग सत्यनारायण की कथा भी करवाते हैं जिससे घर में सुख समृद्धि आती है। पूरा दिन फलाहार ही लें और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें। उसके बाद भगवान को भोग लगाने के बाद ही भोजन ग्रहण करें। वैशाख पूर्णिमा का महत्व पौराणिक धारणाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के सहपाठी व उनके परम मित्र सुदामा जब द्वारका नगरी में श्रीकृष्ण से मिलने गए तो भगवान कृष्ण ने उन्हें इस व्रत का महत्व बताया। उन्होनें कहा की इस व्रत के प्रभाव से दरिद्रता का नाश होता है। बौद्ध धर्म के संस्थापक व विष्णु जी के नवें अवतार महात्मा बुद्ध का जन्म भी इसी दिन हुआ था, जिसके कारण इस दिन बुद्ध पूर्णिमा/Buddha Purnima भी बनायीं जाती है। वैशाख पूर्णिमा 05 मई 2023, सोमवार को है और इसी दिन चंद्र ग्रहण भी है। ऐसा माना गया है की बिना चंद्र ग्रहण के वैशाख पूर्णिमा का व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है। इस दिन चंद्र देवता के दर्शन करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और मन की कलुषिता मिटती है। वैशाख पूर्णिमा को सभी तिथियों में सर्वोपरि माना गया है और इस दिन पवित्र नदी में डुबकी लगाने से व दान करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन साल का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण भी होगा जिससे इसकी महत्वता और भी बढ़ जाती है। चंद्र ग्रहण के कारण यदि हम इस दिन सफ़ेद चीज़ों का दान करेंगे तो हमारी कुंडली/Kundli का चन्द्रमा हमें अत्यंत लाभकारी परिणाम देगा।]]></description>
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        <title><![CDATA[कब है वैशाख पूर्णिमा?]]></title>
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        <description><![CDATA[हिंदू व बौद्ध धर्म की मान्यताओं के अनुसार वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह पूर्णिमा विशेषकर दरिद्रता दूर करने के लिए जानी जाती है। श्री कृष्ण के परम मित्र सुदामा की दरिद्रता भी बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवन कृष्ण से इसके महत्त्व को जानकर दूर हुई थी। इस दिन भगवान् विष्णु के नवें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था, इसलिए वैशाख पूर्णिमा का दूसरा नाम बुद्ध पूर्णिमा भी है। यही कारण है की बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु व भगवान् बुद्ध दोनों की पूजा की जाती है। इस दिन चंद्रदेव की पूजा करने का भी विधान है। हिंदू धर्म के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने से सारी मनोकामना पूरी होती है। वैशाख के महीने को भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना माना गया है। ब्रह्म पुराण में ब्रह्मा जी ने वैशाख मास को सभी हिंदू महीनों से सर्वश्रेष्ठ बताया है। इस दिन व्रत व पूजा अर्चना से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। और इस दिन चन्द्रमा की पूजा करने से जातक की कुंडली में उपस्थित हर प्रकार का चंद्र दोष दूर होता है। इसके अलावा वैशाख पूर्णिमा/Vaishakh Purnima पर श्रद्धा पूर्वक व्रत व पूजन-पाठन से सभी प्रकार के दुष्कर्मों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु उपरांत स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं। यही कारण है कि इस व्रत का वर्णन यमराज देवता को प्रसन्न करने के लिए भी किया गया है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर यमराज को प्रसन्न कर, असमय मृत्यु को टाला जा सकता है। वैशाख पूर्णिमा 2023 तिथि हिंदू पंचांग/Hindu Panchang के अनुसार 05 मई को वैशाख पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा। वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ 04 मई 2023 रात 11 बजकर 44 मिनट पर होगा। वहीं पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 05 मई, रात 11 बजकर 03 मिनट पर होगी। बुद्ध/वैशाख पूर्णिमा पूजा विधि वैशाख पूर्णिमा के दिन विधि विधान से व्रत रखने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वैशाख पूर्णिमा का व्रत रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें। फिर स्नान करें। स्नान करने के पश्चात सूर्य देवता को अर्घ्य दें और गायत्री मंत्र का जाप करें। अर्घ देते हुए आप &lsquo;ओम सूर्याय नमः&rsquo; का तीन बार जाप करें। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ने से लाभ मिलता है। घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर विष्णु जी को नमन करें और उनके नाम का जाप व आरती करें। इस दिन कई लोग सत्यनारायण की कथा भी करवाते हैं जिससे घर में सुख समृद्धि आती है। पूरा दिन फलाहार ही लें और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें। उसके बाद भगवान को भोग लगाने के बाद ही भोजन ग्रहण करें। वैशाख पूर्णिमा का महत्व पौराणिक धारणाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के सहपाठी व उनके परम मित्र सुदामा जब द्वारका नगरी में श्रीकृष्ण से मिलने गए तो भगवान कृष्ण ने उन्हें इस व्रत का महत्व बताया। उन्होनें कहा की इस व्रत के प्रभाव से दरिद्रता का नाश होता है। बौद्ध धर्म के संस्थापक व विष्णु जी के नवें अवतार महात्मा बुद्ध का जन्म भी इसी दिन हुआ था, जिसके कारण इस दिन बुद्ध पूर्णिमा/Buddha Purnima भी बनायीं जाती है। वैशाख पूर्णिमा 05 मई 2023, सोमवार को है और इसी दिन चंद्र ग्रहण भी है। ऐसा माना गया है की बिना चंद्र ग्रहण के वैशाख पूर्णिमा का व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है। इस दिन चंद्र देवता के दर्शन करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और मन की कलुषिता मिटती है। वैशाख पूर्णिमा को सभी तिथियों में सर्वोपरि माना गया है और इस दिन पवित्र नदी में डुबकी लगाने से व दान करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन साल का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण भी होगा जिससे इसकी महत्वता और भी बढ़ जाती है। चंद्र ग्रहण के कारण यदि हम इस दिन सफ़ेद चीज़ों का दान करेंगे तो हमारी कुंडली/Kundli का चन्द्रमा हमें अत्यंत लाभकारी परिणाम देगा।]]></description>
        <pubDate>Mon, 01 May 2023 00:00:00 GMT</pubDate>
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