<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	>
<channel>
	<title>धनु संक्रांति 2025 : जानें स्नान दान का मुहूर्त</title>
	<atom:link href="https://www.vinaybajrangi.com/feed/blog/dhanur-sankranti" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.vinaybajrangi.com/blog/dhanur-sankranti</link>
	<description><![CDATA[धनु और मीन राशि में सूर्य के प्रवेश से खरमास का निर्माण होता है। यह दोनों राशि बृहस्पति के प्रभाव में मानी जाती हैं। इस दौरान भगवान सूर्य और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। संक्रांति के दिन सुबह स्नान करने के पश्चात भगवान सूर्य को जल अर्पित करते हैं और मंत्रों का जाप करते हुए पूजा करते हैं ऐसा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। सुबह उठते ही सूर्य देव को फूल और जल चढ़ाया जाता है और भगवान को मीठे चावल का भोग लगाया जाता है। धनु संक्रांति के दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल, फूल और अन्य सामग्री अर्पित की जाती हैं। इस संक्रांति का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली पर भी विशेष रूप से देखा जाता है, क्योंकि सूर्य का धनु राशि में प्रवेश कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लाता है। श्रद्धालु सुख, समृद्धि और मानसिक शांति के लिए व्रत रखते हैं। साथ ही भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा भी होती है। पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर में इस दिन विशेष अनुष्ठान संपन्न होते हैं। मंदिर सजाया जाता है, भजन कीर्तन और धर्मग्रंथों का पाठ किया जाता है। शुद्ध हृदय से किया गया दान, जाप और प्रार्थना कई गुणा फल देती है और ज्योतिष अनुसार कुंडली में सकारात्मक फल प्रदान करती है।]]></description>
	<lastBuildDate>Fri, 17 Apr 2026 09:34:58 GMT</lastBuildDate>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.3</generator>
    
      <item>
        <title><![CDATA[धनु संक्रांति 2025 : जानें स्नान दान का मुहूर्त]]></title>
        <link>https://www.vinaybajrangi.com/blog/dhanur-sankranti</link>
        <guid isPermaLink="true">https://www.vinaybajrangi.com/blog/dhanur-sankranti</guid>
        <description><![CDATA[धनु और मीन राशि में सूर्य के प्रवेश से खरमास का निर्माण होता है। यह दोनों राशि बृहस्पति के प्रभाव में मानी जाती हैं। इस दौरान भगवान सूर्य और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। संक्रांति के दिन सुबह स्नान करने के पश्चात भगवान सूर्य को जल अर्पित करते हैं और मंत्रों का जाप करते हुए पूजा करते हैं ऐसा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। सुबह उठते ही सूर्य देव को फूल और जल चढ़ाया जाता है और भगवान को मीठे चावल का भोग लगाया जाता है। धनु संक्रांति के दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल, फूल और अन्य सामग्री अर्पित की जाती हैं। इस संक्रांति का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली पर भी विशेष रूप से देखा जाता है, क्योंकि सूर्य का धनु राशि में प्रवेश कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लाता है। श्रद्धालु सुख, समृद्धि और मानसिक शांति के लिए व्रत रखते हैं। साथ ही भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा भी होती है। पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर में इस दिन विशेष अनुष्ठान संपन्न होते हैं। मंदिर सजाया जाता है, भजन कीर्तन और धर्मग्रंथों का पाठ किया जाता है। शुद्ध हृदय से किया गया दान, जाप और प्रार्थना कई गुणा फल देती है और ज्योतिष अनुसार कुंडली में सकारात्मक फल प्रदान करती है।]]></description>
        <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
      </item>
</channel>
</rss>