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	<title>बुध का पुनर्वसु नक्षत्र गोचर</title>
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	<description><![CDATA[बुध का पुनर्वसु नक्षत्र गोचर मिथुन और कर्क राशि में होने वाली स्थिति का खास समय है जिसके परिणाम भी जातक को अलग तरह से मिलते हैं। पुनर्वसु नक्षत्र के तीन चरण मिथुन राशि में आते हैं और एक चरण कर्क राशि में आता है। अब इन दो राशियों में आने वाले कारक तत्व और इस नक्षत्र के चरण स्वामी की स्थिति किसी भी जातक को प्रभावित करने वाली होती है। इस समय पर जन्म कुंडली में बुध की स्थिति और पुनर्वसु नक्षत्र का प्रभाव दोनों ही विशेष होते हैं जन्म कुंडली में ग्रह नक्षत्र की स्थिति के अलावा गोचर में होने वाले बदलाव किसी के भी जीवन पर गहरा असर डाल सकते हैं। बुध के पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर की स्थिति बुध के मिथुन राशि में अंतिम पड़ाव में होने और कर्क राशि के आरंभिक पड़ाव की स्थिति को दिखाती है। ऐसे में इस नक्षत्र के राशि स्वामी बुध और चंद्रमा दोनों हैं। और इस नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति है। देवता अदिति हैं। इस नक्षत्र को पोषण, देखभाल, शुभता और विस्तार का कारक माना जाता है भगवान श्री राम का जन्म भी इसी पुनरवसु नक्षत्र में हुआ माना गया है।]]></description>
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        <pubDate>Fri, 13 Jun 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
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