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	<title>भीष्म द्वादशी 2026 : पितरों के तर्पण के साथ क्यों जुड़ा भीष्म द्वादशी का पर्व</title>
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	<description><![CDATA[महाभारत कालीन समय से जुड़ा भीष्म द्वादशी का त्यौहार माघ माह के दौरान मनाया जाता है। हर साल माघ माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन यह उत्सव मनाया जाता है। भीष्म द्वादशी का दिन भीष्म पितामह के साथ संबंधित है इस कारण से इस दिन श्री विष्णु भगवान के पूजन के साथ ही भीष्म पितामह की भी पूजा अर्चना करते हैं। मान्यता है की इस दिन भीष्म पितामह का निर्वाण हुआ था के प्राणों का उत्सर्ग हुआ जिसके चलते आज भी इस दिन को भीष्म द्वादशी के नाम से पूजा जाता है। महाभारत काल के विशेष पात्र माने गए हैं भीष्म पितामह। इनका एक अन्य नाम देव व्रत था। शांतनु और देवी गंगा के पुत्र के रूप में इन्हेंने जन्म लिया ओर जीवन भर अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपना पूर्ण जीवन पिता के राज्य की सेवा में व्यतीत कर दिया था। देवव्रत ने कभी विवाह न करने का प्रण लिया था जिसके चलते उन्हें भीष्म नाम प्राप्त हुआ था। आइये जान लेते हैं भीष्म द्वादशी के दिन को आहिर पितृ दोष निवारण के साथ]]></description>
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        <title><![CDATA[भीष्म द्वादशी 2026 : पितरों के तर्पण के साथ क्यों जुड़ा भीष्म द्वादशी का पर्व]]></title>
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        <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 00:00:00 GMT</pubDate>
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