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	<title>अघोरा चतुर्दशी 2025 : धार्मिक एवं पितृ कार्यों का विशेष समय</title>
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	<description><![CDATA[अघोरा चतुर्दशी एक विशेष धार्मिक पर्व है जिसे पितरों की पूजा एवं तंत्र कार्यों की सिद्धि के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद माह में आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अघोरा चतुर्दशी का उत्सव मनाया जाता है। खासतौर से यह पर्व हिमाचल से जुड़े क्षेत्रों, उत्तराखंड, नेपाल और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस समय को डगयाली भी कहा जाता है और यह उत्सव दो दिनों तक चलता है। पहले दिन को छोटी डगयाली तथा दूसरे दिन इसे बड़ी डगयाली के नाम से जाना जाता है। शास्त्रीय ग्रंथों में इस चतुर्दशी को कुशाग्रहणी अमावस्या या कुशोत्पाटिनी अमावस्या के रूप में भी वर्णित किया गया है। यह पर्व विशेष रूप से भगवान शिव के उपासकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन की गई पूजा, दान, व्रत और तर्पण कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। विशेष रूप से पितरों की शांति और आत्मा की तृप्ति हेतु इस तिथि का विशेष महत्व है। आइये जान लेते हैं इस साल कब मनाई जाएगी अघोरा चतुर्दशी और इस दिन का पूजा विधान।]]></description>
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        <title><![CDATA[अघोरा चतुर्दशी 2025 : धार्मिक एवं पितृ कार्यों का विशेष समय]]></title>
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        <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 00:00:00 GMT</pubDate>
        <category>English</category>
        
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