निर्जला एकादशी के दिन चंद्रमा क्यों होता है बली?

  • 2024-06-10
  • 0

Author: Dr Vinay Bajrangi

" ज्येष्ठशुक्लैकादशी निर्जला।" 

ज्येष्ठमास के शुक्लपक्ष की एकादशी निर्जला कही गई है. निर्जला एकादशी ज्येष्ठ माह के समय आने वाला बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है. यह वह शुभ समय होता है जब मन का स्वामी चंद्रमा अपनी प्रबल अवस्था में होता है. ऎसे में इस बली चंद्रमा का योग जीवन में आने वाली कई परेशानियों को दूर कर देने में भी सहायक होता है. निर्जला एकादशी का समय आध्यात्मिक रुप से अत्यंत ही विशेष माना गया है. इस दिन चंद्र ग्रह की स्थिति काफी शुभ होती है तथा मजबूत होती है. चंद्र की शुभ स्थिति का प्रभाव निर्जला एकादशी के दिन देखने को मिलता है. 

"तत्र निर्जलमुपोष्य विप्रेभ्यो जलकुम्भान दद्यात"

निर्जला एकादशी के समय निर्जल रह कर उपवास करने तथा जल से भरा घड़ा दान करना शुभ कर्म कहलाता है. ऎसा करने से चंद्रमा का शुभ आशीर्वाद हमें प्राप्त होता है. चंद्रमा के मुख्य तत्व जिसे जल कहा जाता है. इसी कारण शास्त्रों में इस दिन जल का दान करने से चंद्रमा का बल प्राप्त होता है तथा मानसिक शुभता बढ़ती है. आइये जानते हैं मिलता है निर्जला एकादशी के दिन चंद्रमा का शुभ प्रभाव और चंद्र देव का बल. 

कब है निर्जला एकादशी?

निर्जला एकादशी साल 2024 में मंगल, 18 जून, 2024 को पड़ रही है। इस बार निर्जला एकादशी पर शिव, सिद्ध, श्रीवत्स और त्रिपुष्कर नाम के शुभ योग भी बन रहें हैं, जिससे इस व्रत की पवित्रता और भी बढ़ जाएगी। निर्जला एकादशी के व्रत का पारण अगले दिन यानी 19 जून, बुधवार को किया जाएगा।

निर्जला एकादशी के दिन चंद्र देव की स्थिति 

ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिप्रदा से लेकर ज्येष्ठ पूर्णिमा का समय चंद्र के बलवान होने का समय है. वैसे तो प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष क असमय चंद्रमा के बल में वृद्धि का समय माना गया है लेकिन ज्येष्ठ मास के दौरान आने वाला शुक्ल पक्ष विशेष होता है. 

इसके साथ ही वृष और मिथुन संक्रांति के मध्य निर्जला एकादशी का आगमन होता है. वृष राशि चंद्रमा की उच्चस्थ राशि भी होती है. इसके अतिरिक्त निर्जला एकादशी के करीब इस समय के दौरान चंद्रमा को गोचर की स्थिति कन्या से धनु राशि के मध्य होती है. इन राशियों के मध्य विचरण करते हुए चंद्रमा का प्रभाव अपनी मजबूती को दर्शाता है. इसी के साथ ज्येष्ठ माह ज्येष्ठ नक्षत्र से प्रभावित होता है जो बुध और मंगल ग्रह का प्रभाव पाता है और चंद्रमा इन दोनों के साथ मित्र भाव रखता है अत: इस कारण यह स्थिति चंद्रमा के बल को दर्शाती है.

महर्षि वेद व्यास द्वारा निर्जला एकादशी तिथि महत्व 

महाभारत के एक संदर्भ अनुसार जब भीम द्वारा अपनी क्षुद्धा के कारण कोई बःई एकादशी न कर पाने में अमर्थता जताई तब महर्षि व्यास जी ने उन्हें ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी का व्रत करने को कहते हैं जिसके द्वारा भीम को वर्ष भर की एकादशी के बराबर पुण्य फल प्राप्त होते हैं. शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक तिथि अपने आप में बहुत विशेष मानी गई है. इसी तिथि क्रम अनुसार जब निर्जला एकादशी तिथि आती है तो उस समय ग्रहों की स्थिति शुभ प्रभाव देने वाली मानी गई है. जिसे मुहूर्त शास्त्र में भी अपनाया गया है. कई तरह के शुभ कार्यों हेतु एकादश तिथि का चयन किया जाता है. 

मुहूर्त शास्त्र के अलावा भी मान्यता है की इस स्थिति पर किए जाने वाले कार्यों में वृद्धि का सुख तथा शुभता का प्रभाव प्राप्त होता है. इसी श्रेणी में आने वाली एकादशी तिथि को भी काफी शुभ समय माना गया है. शास्त्रों के अनुसार इस समय चंद्रमा की स्थिति काफी उत्तम होती है. इसी के साथ ये समय मानसिक चिंताओं से मुक्ति पाने हेतु चंद्रमा को बल देने वाला होता है. 

मांगलिक दोष शांति के लिए निर्जला एकादशी 

कुंडली में मौजूद मांगलिक दोष की शांति के लिए निर्जला एकादशी का दिन बहुत ही शुभ होता है. इस दिन व्यक्ति की कुंडली में मौजूद मंगल ग्रह को भी शुभता प्राप्त होती है. इस माह पर मंगल ग्रह का विशेष प्रभाव होता है. अत: मंगल ग्रह यदि किसी की कुंडली में मांगलिक दोष है या उसका प्रभाव जीवन में विवाह के सुख को बाधित कर रहा है तो निर्जला एकादशी के दिन मांगलिक पूजा अवश्य करनी चाहिए. इस पूजा द्वारा व्यक्ति को मंगल दोष के खराब प्रभावों से मुक्ति प्राप्त होती है. ग्रह शांत होते हैं तथा शुभता प्राप्त होती है. 

निर्जला एकादशी के दिन स्वास्थ्य ज्योतिष का लाभ 

निर्जला एकादशी के दिन नव ग्रहों की शुभता यदि हमें प्राप्त होती है तो इसके द्वारा हमारे कई तरह के रोग दोष समाप्त होते हैं. शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन को तन और मन की शुद्धता का समय माना गया है यह साधना का समय होता है. महाभारत काल समय जब भीमसेन ने इस एकादशी व्रत को किया तो उसे अपनी पेट की अग्नि से मुक्ति प्राप्त होती है. 

शिवपुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास की एकादशी के समय में तिल का दान शक्ति को बढ़ाने वाला और मृत्युतुल्य कष्ट से मुक्ति दिलाने वाला होता है अत: यदि किसी रोग या व्याधी के कारण आप बहुत परेशान हैं, रोग से मुक्ति नहीं मिल पा रही है तो निर्जला एकादशी के दिन ज्योतिष अनुसार बताए गए उपायों को करने से लाभ मिलता है. स्वास्थ्य ज्योतिष का उपयोग जीवन को निरोगी काया देने में सक्षम होता है. 

निर्जला एकादशी पर दान प्रभाव से शांत होते हैं ग्रह 

" ज्येष्ठे मासि नृपश्रेष्ठ या शुक्लैकादशी शुभा " 

निर्जला एकादशी की शुभता के विषय में पद्मपुराण के अनुसार निर्जला एकादशी का समय शुभ कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है. इस दिन जहां पानी का दान महादन माना गया है उसी के साथ इस दिन मीठे जल का दान भी विशेष होता है. जल जिसे ज्योतिष अनुसार चंद्रमा के प्रमुख कारक तत्वों के साथ जोड़ा जाता है वहीं शुक्र का संबंध भी इससे बनता है तथा मीठे जल कि स्थिति शुक्र गुरु ओर चंद्रमा को प्रबल बनाने में सहक मानी गई है. 

" निर्जलं स्मुपोष्यात्र जलकुम्भान सशर्करान" 

इस दिन जल से भरा कुंभ दान अत्यंत उत्तम होता है. इस समय पर किए जाने वाली छायादार वस्तुओं का दान शनि ग्रह की शांति हेतु बहुत ही उत्तम होता है. इस समय गर्मी का ताप अत्यंत तीव्र होता है ऎसे में निर्जला एकादशी के दिन शीतलता हेतु जहां जल का दान किया जाता है वहीम इस दिन घड़ा, छाता इत्यादि वस्तुओं को भी दान करते हैं. 

निर्जला एकादशी पर नवग्रह शांति देती है लाभ 

माना गया है की ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी के दिन मंगल की वस्तुओं का दान करने से मंगल प्रबल होता है. इसी के साथ फलों के रस का दान, जल का दान, तिल का दान, चीनी का दान शुक्र ग्रह के लिए, इस दिन ग्रहों का बल प्रबल होता है. एकादशी तिथि के दिन श्री हरि के निमित्त किया गया पूजन नव ग्रहों की शुभता बढ़ाने वाला होता है. इसी के साथ राहु केतु जैसे पाप ग्रहों की अशुभता दूर होती है तथा मानसिक शांति चंद्रमा के बल द्वारा प्राप्त होती है. इसी कारण निर्जला एकादशी के दिन चंद्र मंगल ग्रह समेत अन्य ग्रहों की शांति संभव मानी गई है.

Related Blogs

नवरात्रि 2024 में ऐसे करें माँ दुर्गा की पूजा - निश्चित सफलता व परिणाम।

चैत्र नवरात्रि 2024: अप्रैल 9, 2024 से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही है, जो हिन्दू समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र व मनोकामना सिद्ध करने वाला त्यौहार है। नव रात्रि यानि नौ दिन, नाम से ही ज्ञात है कि यह त्यौहार पूरे नौ दिन तक मनाया जाता है। चैत्र नवरात्रि का त्यौहार माँ दुर्गा को समर्पित है और यह नौ दिन सभी प्रकार के कष्टों को हरने वाले और मनोकामना पूर्ण करने वाले दिन माने गए हैं। 
Read More

Vijaya Ekadashi 2024 - विजया एकादशी कब मनाया

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष विजया एकादशी 06 मार्च बुधवार को मनाया जाएगा, इस दिन श्रीहरि की विशेष पूजा करने का है विधान
Read More

Magh Purnima 2024 - जानिए माघ पूर्णिमा की तिथि और महत्व

माघ के महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा कहते हैं। माघ पूर्णिमा माघ माह के अंतिम दिन मनाई जाती है। माघ पूर्णिमा के पावन दिन पर भगवान विष्णु और माता पार्वती के साथ-साथ चंद्रमा की भी विशेष पूजा की जाती है।
Read More
0 Comments
Leave A Comments