Monday, October 21, 2019

क्या आप कालसर्प दोष के बारे में जानते हैं ?

प्रत्येक भाव कारक व अकारक ग्रहों की उपस्थिति व उनकी अवस्था के मेल-जोल से कई प्रकार के योगों का निर्माण होता है जिसमें एक कालसर्प दोष (Kaal sarpa dosha) है | छाया ग्रह राहु व केतु काल की गति से जुडी एक अवस्था है जिसमें अधिकांश अशुभ व हानिकारक पहलु होते हैं | सबसे पहले जानते हैं कि कालसर्प की उत्पत्ति किस प्रकार  होती है जन्म कुंडली में राहु व केतु सर्वदा एक – दूसरे से सप्तम होते हैं तथा वक्र चलते हैं यदि इन दो ग्रहों के मध्य बाकि सात ग्रह आ जायें तो सभी ग्रह राहु केतु के मुख ग्रस्त होंगे अर्थात उनकी शुभता को राहु – केतु लील लेंगे इस अवस्था को कालसर्प दोष के नाम से जाना जाता है |

कालसर्प दोष के प्रकार ( Types of kaalsarp  dosha )

1- कुलिक कालसर्प योग (Kulik Kaal  Sarp Yog )

Kulik Kaal Sarp Dosh

यदि राहु द्वितीय भाव में स्थित हो व केतु अष्टम भाव  में  तथा बाकि सातों ग्रह इन दोनों के मध्य हों तब  यह योग निर्मित होता है| इसके  फलस्वरुप  जातक को पैतृक धनकी प्राप्ति नहीं होती|  और कुटुंब भी साथ नहीं होता और अत्याधिक मेहनत के बाद भी न्यूनतम फल की प्राप्ति होती हैं |

2- अनंत कालसर्प योग (Anant Kaalsarp Yog)

Anant Kaal sarp dosh

जन्म kundali  में Rahu  प्रथम व Ketu  सप्तम स्थान में और शेष सभी ग्रह एक ओर स्थित  हों  तो इस योग की निष्पत्ति होती है| प्राय: इसके परिणाम स्वरुप, जातक काले वर्ण के होते हैंऔर हमेशा  दूसरों का दोष निकालने  वाले व धूर्त प्रवृति के होते हैं| इन्हें धन का अभाव रहता  है|  या फिर धन से परिपूर्ण  होते हुए भी उसके  सुख से वंचित रहते हैं| और इन्हें  संतान की तरफ से कष्ट प्राप्त होता है

3- वासुकि कालसर्प योग  (Vasuki Kaalsarp Yog)

Vasuki kaal sarp dosh

kundali में केतु नवम व तृतीये भाव में राहु  हो तथा शेष सात ग्रह एक ओर हों  तो इस योग की अवस्था निर्मित होती है|  यह दोष होने पर व्यक्ति का जीवन कभी रंक तो कभी राजा के समान रहता है |

4- कर्कोटक कालसर्प योग (Karkotak Kaalsarp Yog)

Karkotak kaal sarp dosh

जब राहु अष्टम भाव में केतु द्वितीय में तथा शेष सात ग्रह एक ओर  केंद्रित हों  तो यह योग बनता  है| इसके परिणाम स्वरुप जातक के जीवन में कुटुंब से अलगाव ,रोग व शत्रु पीड़ा आदि समस्याएं होती हैं|

5-पदम्  कालसर्प योग (Padam Kaal Sarp Yog )

Padam Kaalsarp dosh

Kundli  में पंचम भाव में राहु व केतु एकादश में तथा बाकि  सभी ग्रहों के  एक ओर विराजमान होने पर इस योग की अवस्था उत्पन्न होती है|  इसका  परिणाम यह होता है कि जातक के जीवन में संतानअभाव ,आर्थिक कष्ट , शारीरिक  कष्ट उत्पन्न होते हैं |

6-महापदम कालसर्प योग (Maha Padam Kaalsarp Yog)

Maha Padam

जब  राहु षष्ट व केतु  द्वादश भाव में तथा शेष सभी ग्रहों के एक ओर स्थित होने से होता है| इस योग वाले जातक को विषैली वस्तु से हमेशा सावधान रहना चाहिए| अगर  राहु  पुरुष राशि में स्थित हो तो मस्तिष्क रोग ,कोढ़ , रक्त पित्त  के उत्पन्न होने की संभावनाएं  होती हैं|

7-तक्षक कालसर्प योग (Takshk Kaalsarp Yog)

Takshk kaal sarp dosh

यदि राहु सप्तम  व केतु लग्न स्थान पर  हो तथा शेष सभी ग्रह एक तरफ स्थित  हों तो यह  योग फलित  होता है| प्राय:इसके फलस्वरूप जातक मानसिक रूप से चंचल व शर्मीले स्वभाव के व विधवा स्त्रियों से सम्बन्ध स्थापित करने वाले होते हैं|  राहु अगर पुरुष राशि में स्थित हो तो घर में सदैव अशांति बनी रहती है |

8-शंखपाल कालसर्प योग (Shankhpal Kaalsarp Yog)

Shankhpal kaal sarp yog

जब राहु चतुर्थ स्थान व केतु दशम में तथा दोनों ग्रहों के मध्य किसी एक ओर सातों ग्रह विराजमान हों तो यह योग बनता है| इसका परिणाम यह होता है| क्योकि जातक के कम आयु में माता-पिता के सुखों से वंचित हो जाने की परिस्थिति उत्पन्न होती है| और उसके जीवन में   असफलतायें व अपमानजनक घटनाएं घटित होती रहती हैं |

9-शंखनाद कालसर्प योग (Shankhnad Kaal Sarp Yog)

Shankhnad kaal sarpa

जब कुंडली में  राहु नवम व केतु तृतीये भाव में तथा शेष सभी ग्रह इनके मध्य  स्थित हों तो इस योग का निर्माण होता है| प्राय: इसका परिणाम  यह होता है| कि जातक भाग्य का साथ न देने पर हीन भावना से ग्रसित तर्कवादी व नास्तिक प्रवर्ती के होते हैं |

10-पातक कालसर्प योग (Patak Kaal Sarp Yog)

Shankhnad kaal sarpa

यदि दशम भाव में राहु व केतु चतुर्थ में हो तथा शेष ग्रह एक ओर स्थित  हों  तो यह योग बनता होता है| प्राय: इसका परिणाम यह होता है| क्योकि जातक का प्रारम्भ का जीवन उतार-चढ़ाव में परन्तु प्रौढ़ अवस्था में  धन ,कीर्ति व सम्मान आदि की प्राप्ति होने लगती है |

11- विषाक्त कालसर्प योग (Vishakt Kaalsarp Yog)

Vishakt kaal sarp yog

राहु एकादश में व केतु पंचम स्थान पर हो तथा शेष  सभी  ग्रह एक ओर विराजमान हो तो यह योग बनता है| राहु पुरुष राशि में स्थित होने से  स्त्री के बांझ होने की समस्या की सम्भावना होती है| अथवा जातक अमीर बनने की लालसा में अत्याधिक रिश्वत लेने व दूसरों  का धन हड़पने में जरा भी संकोच नहीं करता |

12 – शेषनाग कालसर्प योग (Sheshnag Kaal Sarp Yog)

Sheshnag kaal sarp dosh

जब कुंडली में राहु द्वादश  में व केतु षष्ठ भाव में स्थित हो व बाकि सभी  ग्रह एक ओर स्थित  हों  तो यह  योग निर्मित  होता है|  इसके कारणवश जातक को मानसिक पीड़ा व कर्ज में डूबने के कारण इनका पारिवारिक  जीवन हमेशा अशांत रहता है|

कालसर्प दोष के सकारात्मक पहलु –

कालसर्प योग वाला व्यक्ति जीवन में बहुत ज्यादा उन्नति , अवनति देखता है|  इस योग वाले व्यक्ति यदि स्वयं से  परिश्रमी , साहसी व कर्तव्यनिष्ठ हों तो उन्नति के शिखर को छू लेते हैं| विभिन्न प्रकार के  प्रयास भी निष्फल होते देखे गये हैं|  राहु या केतु की दशा या गोचर का लग्न पर से गुजरना भी रोग ,परेशानी और असफलतायें देता है|

लग्न या लग्नेश का किसी  शुभ ग्रह से सम्बन्ध कालसर्प योग को निष्काषित करता है|  विशाखा का राहु भी इस योग को भंग करता है| इसकी  गणना लग्न से  करने पर यदि केतु पहले आये तो यह बहुत  शुभ योग मन जाता है|  यदि जन्म  के राहु के भोग्यांश पर गोचर में राहु संचार करता है तो विशेष कष्टों का सामना करना पड़ता है|  ” यदि कुंडली में सभी ग्रहों ( सातों ) का झुकाव  एक ओर  ( कालसर्प योग में ) व्यक्ति के मन – मस्तिष्क को असंतुलित कर , उसे पूर्वाग्रही या दुराग्रही बनाता है|

कालसर्प ‘ योग को भौतिक सुख की लालसा का कारक माना है|  वह व्यक्ति जिनकी कुंडली में यह दोष होता है वह  अपने भौतिक – सुख भोगने के लिए अनैतिक कार्य भी करते है और भेद खुलने पर अपमान का सामना करना पड़ता है|  यदि केतु  लग्न से प्रथम  छः भावों में हो या फिर  राहु या केतु के साथ कोई शुभ ग्रह हो तो यह ‘ कालसर्प ‘ योग भंग  हो जाता है|

कालसर्प दोष निवारण के कुछ उपाय (Kaalsarp Dosh Nivarana) 

भगवान शिव  की पूजा करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है| प्रतिदिन उनकी पूजा -अर्चना करनी चाहिए ||

* जातक को घर के मुख्य द्वार पर चांदी का स्वस्तिक व घर में मोर का पंख लगाना चाहिए |

* सर्पों को दूध पिलायें और प्रतिवर्ष नागपंचमी का उपवास करे.

* सूर्यग्रहण ओर चंद्र ग्रहण के दिन सात प्रकार के अनाज  से स्वयं के बराबर तुलादान करना चाहिए |

*  नित्य भगवान हनुमान जी की पूजा करें

* सोलह सोमवार व्रत करें |

* सभी सोमवार उपवास रखें और भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करें

* यदि घर में पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा कर नित्य घर के सभी व्यक्ति उसकी अर्चना करें|  ऐसा करने से घर के अन्य व्यक्तियों को भी कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है

इनमे से कुछ उपाय करने से कालसर्प दोष की प्रबलता कुंडली में कम हो जाती है |

Read More: Hindustan Times also captures Karma Korrection techniques of Dr. Vinay Bajrangi

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Over 2 decades of my exposure of Vedic Astrology educates me to state that Vedic Astrology is all based on our Karmas. Firstly I very firmly believe that each horoscope has both malefic and benefic planets but none should either be distressed with negative Doshas or feel pampered with positive ones. We should know through our own karmas how to de-activate the negatives & activate the positive ones. And this is what the theory of Karma Corrections says.
Secondly, my focus is to read the flawed karmas of previous life and guide the person as to how can we improve them in our present life. And that is what my theory of Karma Correction is. I firmly believe that rituals cannot please the god. It can subside your problems but cannot eradicate. I also feel that heavy rituals are actually responsible that astrology seems to be losing its basic sheen in the modern times. Another thing is that if at all some remedies are required, should be totally Vedic, self performable rather we employing professionals to perform it for us. You have the problem so you should only devote time performing these rituals to connect with the divine power yourself.
I try to spread this concept of astrology through many other media channels like Hindustan Times, Times of India, Outlook India, Amar Ujala etc which can be read in Media & Press Section on my website OR on Quora as a preferred author OR read blog section on my website vinaybajrangi.com
I have mastered the various modes of ancient Vedic astrology and have picked up the uniqueness of all. I combine the following modes while decoding the future:
• Parashari Technique
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• Krishnamurthy Paddayti
• South Indian Nadi’s
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• Vastu Shatra
I am also expert in the following fields:
• Birth time rectification
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• Chart matching for marriage
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• Vastu Expert
With headquarters at Sector-66, Noida, U.P (India) I am a travelling Guru, often visiting cities in India and abroad to meet my clients.

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1 Comment

Shivangi June 2, 2019 at 11:38 am

Hello sir My self Shivangi Bhavsar from Mumbai.
I have questions about my career & marriage and as per my kundli.will you guide something for my marriage future and if any dosh
there in kundli.

Date of birth: 16/02/1991
Time:5.45 am
Place: Khambhat , Gujarat

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