Monday, December 9, 2019

आदिकाल से ही मनुष्य की प्रकृति शक्ति की साधना की ही रही है। शक्ति उपासना उतनी ही प्राचीन है जितना वेद। कोई भी साधना बिना शक्ति—साधना के पूर्ण ही नहीं सकती। शक्ति ही भगवान की दिव्य ऊर्जा है। आप किसी भी देवता की पूजा करते हैं, लेकिन यदि आपने शक्ति की साधना नहीं की तो आपकी पूजा अधूरी मानी जाती है। शक्ति के बिना शिव शव हैं, ऐसा प्रायः धर्मशास्त्र में बताया गया है।

इसलिए मानव से महामानव बनने के लिए या पुरुष से पुरुषोत्तम बनने की यह परमोच्च विद्या है।

विश्व में किसी न किसी रूप में देवी की पूजा शक्ति रूप में प्रचलित रही है। शक्ति की साधना का प्रथम रूप दुर्गा ही मानी जाती हैं।

‘दुर्गा’ शब्द का अर्थ है —

‘द’ अर्थात् दैत्यनाशक,

 ‘उ’ उत्पातनाशक

‘र’ रोगनाशक

 ‘ग’ गमनाशक अर्थात दु:खों का नाशक

‘आ’ अर्थात् आमर्षनाशक।

कहने का तात्पय यह कि मां दुर्गा करुणामयी है, बुराईयों का नाश करने वाली हैं। साधक के पास अच्छाईयों के साथ आती हैं। देखा जाए तो मां का शक्ति रूप ही पूरे विश्व को चैतन्य रखता है।

यह विद्या, निद्रा, श्रद्धा, तृष्णा, क्षुधा, शांति, कांति, स्मृति, लक्ष्मी, वृत्ति, दया, तृष्टि आदि कई रूपों में विद्यमान है।

नवरात्रि के 9 दिन ही क्यों

नवरात्रि के 9 दिन ही क्यों _

कभी आपने सोचा है कि आखिर नवरात्रि में नौ दिनों तक ही शक्ति की साधना की क्यों की जाती है? दरअसल, देवी दुर्गा नव विद्या हैं, इसीलिए इनके नौ दिन तय किए गए हैं।

तृतीय शक्ति के तीन गुण हैं — सत्व, रजस एवं तमस। इनको जब हम तीन गुना करते हैं तो हमें नौ की संख्या प्राप्त होती है।

जिस प्रकार यज्ञोपवीत में तीन बड़े धागे होते हैं और वे तीन धागे भी तीन धागे से बने होते हैं। उसी प्रकार प्रकृति, योग और माया का त्रिवृतरूप नवनिध ही होता है। इसलिए देवी दुर्गा के नवनिध रूप की आराधना हो सके इसलिए नवरात्रि के नौ दिन सुनिश्चित किए गए हैं।

करें 9 कन्याओं का पूजन

kanya pujan

नवरात्रि का पावन पर्व, माँ-दुर्गा की अवधारणा भक्ति और परमात्मा की शक्ति (उदात्त, परम, परम रचनात्मक ऊर्जा) की पूजा का सबसे शुभ समय माना जाता है।

नवरात्रि कन्याओं का पूजन शक्ति के स्वरूप में किया जाता है। कोई इसे पहले दिन से लेकर नवमी तक प्रतिदिन एक कन्या का पूजन करता है तो कोई अष्टमी, नवमी वाले दिन ही नौ कन्याओं को घर में बुलाकर, उनका पूजन कर मां जगदंबे से आशीर्वाद की कामना करता है। शास्त्रों के अनुसार दो साल से दस साल तक की कन्या का पूजन करना चाहिए।

  1. एक साल की कन्या का पूजन नहीं करना चाहिए।
  2. दो साल की कन्या कुमारी कहलाती है ओर साधक के दुख—और दरिद्रता को दूर करती है
  3. तीन साल की कन्या त्रिमूर्ति कहलाती है और धर्म—काम की आशीर्वाद प्रदान करती है।
  4. चार साल की कन्या कल्याणी कहती है और सभी प्रकार से कल्याण करती है।
  5. पांच साल की कन्या रोहिणी कहलाती है जो साधक को आरोग्य और सम्मान प्रदान करती है।
  6. छह साल की कन्या कालिका कहलाती है जो कि साधक को पढ़ाई और प्रतियोगिता आदि में सफलता प्रदान करती है।
  7. आठ साल की कन्या शांभवी साधक को सत्ता—शासन से जुड़े सभी सुख प्रदान करती है।
  8. नौ साल की कन्या साक्षात दुर्गा की प्रतीक होती है। इसके आशीर्वाद से शत्रुओं का नाश होता है।
  9. दस साल की कन्या सौभाग्य का प्रतीक होती है। इसे सुभद्रा के रूप में पूजा जाता है।

अब जानिए कौन से होते हैं ये 9 प्रकार के भोग

नवरात्रि पर मां दुर्गा को नौ प्रकार के भोग लगाने से नौ प्रकार की कामनाएं पूर्ण होती है।

  1. नवरात्रि पहले दिन माता को घी से षोडषोपचार पूजा कर गौ घृत अपर्ण करने से आरोग्य लाभ होता है।
  2. दूसरे दिन शक्कर का भोग लगाकर कन्याओं को दान देने से दीर्घायु प्राप्त होती है।
  3. तीसरे दिन माता के पूजन के दौरान दूध चढ़ाएं और उसे ब्राह्मण को दान करें, इससे सभी प्रकार के दुख दूर हो जाएंगे।
  4. चतुर्थी को मां को मालपुआ का भोग लगाएं और उसे सुयोग्य ब्राह्मण को दान करें। इससे बुद्धि का विकास होता है।
  5. पंचमी तिथि को केले का भोग लगाएं। इससे परिवार फलता—फूलता है।
  6. छठे दिन माता को मधु यानी शहद चढ़ाने का विशेष प्रयोग करें। मां को मधु चढ़ाकर किसी ब्राह्मण को दान देने से कांति बढ़ती है। साधक पर मां की विशेष कृपा बरसती है और उसकी सुंदरता में दिनों—दिन वृद्धि होती है।
  7. सप्तमी के दिन गुण का नैवेद्य चढ़ाकर ब्राह्मण को दान देने से अचानक आने वाली विपत्ति दूर होती है।
  8. अष्टमी के दिन मां जगदंबा को नारियल का भोग लगाने से किसी भी प्रकार की पीड़ा हो दूर हो जाती है।
  9. नवमी के दिन माता को काले तिल से बने भोग को चढ़ाने से परलोग गमन का भय नहीं होता है।

रखें 9 चीजों का विशेष ध्‍यान

नवरात्र में पूजा-पाठ यदि यम-नियम-संयम और पूरी भक्ति भावना के साथ किया जाए तो मनचाहा फल प्राप्त किया जा सकता है।ध्यान रहे कि कोई भी साधना तभी पूर्ण या फलदायी होती है जब उसे एक निश्चित दिशा, एक निश्चित स्थामन और एक निश्चित समय पर किया जाए।साधक को चाहिए कि साधना भले ही कम समय करे लेकिन वह इस तारतम्य को भूलकर भी न बिगाड़े।

  1. ये 9 दिन में सामिष भोजन और मदिरा आदि का सेवन बिलकुल ना करें |
  2.  यदि सुबह 10—11 बजे ही वह पूजा कर सकता है, तो प्रतिदिन सुबह 10—11 बजे ही करे।इस नियम को खंडित न करे।
  3. व्यवस्थित तरीके से व्रत, उपवास करें।उपासना के दौरान या पूरे नौ दिनों तक पवित्रता का ख्याल रखें। मन, वचन व कर्मों से शुद्धता बनाए रखें।
  4. अगर आप नवरात्रि में कलश स्थापना कर रहे हैं, माता की चौकी का आयोजन कर रहे हैं या अखंड ज्योति‍ जला रहे हैं तो इन दिनों घर खाली छोड़कर नहीं जाएं |
  5. नौ दिन का व्रत रखने वालों को काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए|
  6. लाल रंग के आसन पुष्प वस्त्र का प्रयोग करे क्योकि लाल रंग माँ को सर्वोपरी है |
  7. व्रत में खाने में अनाज और नमक का सेवन न करे |
  8. नवरात्रों में दाढ़ी, नाखून व बाल नहीं कटवाए|
  9. एक घर में तीन शक्तियों की पूजा भूल कर भी ना करे |

दूर होंगे 9 ग्रहों के कष्‍ट

ज्योषिय विधा के अनुसार कुंडली के बारह खानों में स्थित नौ ग्रह ही उसके सुख-दुख के कारण बनते हैं। ऐसे में ग्रहों के कष्टों से मुक्ति के लिए नवरात्रि पर विशेष साधना—अराधना की जाती है।

यदि कोई साधक नवरात्रि के नौ दिनों में नौ देवियों की साधना करता है, तो उससे उसके नौ ग्रह से जुड़े कष्ट दूर हो जाते हैं।

शक्ति की विशेष साधना के जरिए कुंडली के काल सर्प दोष, कुमारी दोष, मंगल दोष आदि भी मुक्त हुआ जा सकता है।

माँ शैलपुत्री के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ-क्लिक करें

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However with changing Planetary Transit and Dasha, we have flexibility in our present life karmas to impact the results of what is allotted to us in Horoscope. All planets (like Earth, Sun, Moon etc) keep moving which is called planetary transit. Dasha also keep changing. That is where a right astrological guidance by a competent astrologer plays the role. My practical experience of 20 Years with a PhD IN Astrology makes me write very categorically that each horoscope has both negative and positive planetary positions but actual results depend on how we drive them through our karmas of present life. Best of positive Yogas in Horoscope may not ignite for its expected positive results. Same way most negative Doshas in Horoscope can give best positive results. Important is Karma & not the so called astrology rituals. You cannot appease the God with rituals.
Indian Vedic astrology means co-relating your horoscope with your own karmas of past life, identifying flawed and good of them. Then guiding the person how to mould karmas in present life to win over impact of flawed ones.
Accurate birth time is the soul of Indian Vedic Astrology; any doubts pls go for birth time synchronization then only go for any astrological predictions. Career astrology, business astrology, marriage astrology, good progeny, negative doshas in horoscope, positive yogas in horoscope are all embedded in Vedic Astrology depending on astrologer what way want to deal with it.

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