Friday, October 23, 2020

क्या है एकादशी :-

माह की ग्यारस तिथि को एकादशी कहते है | जब सूर्य और चन्द्रमा भूलोक का भ्रमण करते हुए १२१ अंश से १३२ अंश का कोण बनाते है जब चन्द्रमा की ग्यारहवीं कला होती है उस तिथि को एकादशी कहते हैं | इस दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है | जब चन्द्रमा ग्यारहवीं कला में होता है १२१ अंश से १३२ अंश का कोण बनता है तब शुक्ल पक्ष की एकादशी तथा ३०१ से ३१२ तक कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है | यदि एकादशी सोमवार के दिन पड़ जाये तो उपवास के आलावा कोई भी शुभ कार्य वर्जित है और यदि एकादशी शुक्रवार के दिन पड़े तो सिद्धिदा होती है | प्रत्येक वर्ष में २४ एकादशी एवं  प्रत्येक तीसरे वर्ष में २६ एकादशी होती हैं |

एकादशी के नाम एवं प्रकार –

माह

शुक्ल पक्ष

कृष्ण पक्ष

पूज्य देव

जनवरी -फरवरी

 जया

विजया

माधव

फरवरी- मार्च

आमलकी

पापमोचिनी

गोविन्द

मार्च-अप्रैल

कामदा

वरुथिनी

विष्णु

अप्रैल-मई

मोहिनी

अपरा

मधुसूदन

मई-जून

निर्जला

योगिनी

त्रिविक्रम

जून-जुलाई

देवशयनी

कामिका

वामन

जुलाई-अगस्त

पुत्रदा

अजा

श्री –धर

अगस्त-सितम्बर

परिवर्तनी

इंदरा

ह्रषिकेश

सितम्बर- अक्टूबर

पापाकुंशा

रमा

पद्यनाभ

अक्टूबर -नवंबर

प्रबोधनी

उत्पन्ना

दामोदर

नबंवर-दिसंबर

मोक्षदा

सफला

केशव

दिसंबर -जनवरी

पुत्रदा

षटतिला

 नारायण

अधिक

पद्यनी

परमा

 परुषोत्तम

आइये मैं आपको विस्तार से इन एकादशियों के बारे में बताता हूँ कि कौन से व्रत से क्या फल मिलता है –

जया एकादशी-jaya ekadashi dr.vinay bajrangi

यह एकादशी माघ के महीने में शुक्ल पक्ष में होती है | यह बहुत ही पुण्यदायी एकादशी है यह व्रत करने से नीच योनि जैसे – भूत , प्रेत, पिशाच की योनि से मुक्त हुआ जा सकता है |

विजया एकादशी –

VIJYA EKADASHI Dr.Vinay Bajrangi

यह एकादशी फाल्गुन माह के कृष्ण -पक्ष में पड़ती है | अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए यह व्रत बहुत ही फलदायी है | भगवान राम ने यह व्रत रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए किया था |

आमलकी एकादशी –

AMALAKI EKADASHI Dr.Vinay Bajrangi

यह एकादशी फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में पड़ती है | जो व्यक्ति स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति चाहते हैं उनके लिए यह व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है | इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए |

पापमोचिनी एकादशी –

papmochini ekadashi dr.Vinay Bajrangi

यह एकादशी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में होती है | जाने – अनजाने में हुए पापों का दंड भगवान अवश्य देते हैं अपने पापों की क्षमा मांगने के लिए उनके दंड से बचने के लिए यह व्रत अवश्य करना चाहिए |

कामदा एकादशी –

kamda ekadashi dr.Vinay Bajrangi

यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को होती है | इस एकादशी का व्रत करने से जातक के अंदर पिशाचत्व आदि दोषों का नाश होता है और वाजपेय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है |

वरुथिनी एकादशी-

varuthani ekadashi dr.Vinay Bajrangi

यह चैत्र माह के कृष्णपक्ष की ग्यारहवीं तिथि को होती है | इस एकादशी का व्रत करने से दस हजार वर्षों तक की तपस्या का फल प्राप्त होता है|

मोहिनी एकादशी –

mohini ekadashi dr. Vinay bajrangi

यह वैशाख माह के शुक्लपक्ष की ग्यारहवीं तिथि को होती है | इस व्रत को करने से मोह जाल एवं पातक समूह आदि से छुटकारा मिलता है | इस व्रत का फल गौ दान के फल के बराबर होता है |

अपरा एकादशी-

apra ekadashi dr.vinay bajrangi

यह वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में होती है | इस व्रत करने से गौ हत्या  एवं गर्भस्थ शिशु को मारने का पाप  करने वाले व्यक्तियों को भगवान विष्णु क्षमा कर देते है | इस व्रत के करने से भगवान  केदारनाथ के दर्शन एवं गया में पिंड दान के बराबर पुण्य मिलता है|

निर्जला एकादशी –

nirjala ekadashi dr.Vinay Bajrangi

यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ती है | इस व्रत में पानी पीना वर्जित है इसीलिये इस व्रत को निर्जला एकादशी  व्रत कहते है | यदि यह व्रत पूर्णतया विधि विधान से किया जाए तो वर्ष भर की एकादशियों के बराबर फल मिलता है |

योगिनी एकादशी –

yogini ekadashi dr.Vinay Bajrangi

यह ज्येष्ठ माह के कृष्णपक्ष में होती है | इस व्रत को करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन करने के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है |

देवशयनी एकादशी –

devshyani ekadashi dr. Vinay Bajrangi

यह एकादशी आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में होती है | इस दिन से भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार माह तक शयन करते है | यह सर्व मनोकामनापूर्ती  व्रत है | इस दिन के बाद चार माह तक शुभ कार्य वर्जित होते है | इस दिन दीर्घ आयु की कामना के लिए तेल का त्याग करना चाहिए |

कामिका एकादशी –

kamika ekadashi dr.Vinay Bajrangi

यह श्रावण के कृष्ण पक्ष में होती है |  यदि उपासक इस एकादशी को व्रत कर रात्रि में भगवान विष्णु के मंदिर में दीपक जलाते हैं तो उनके  पित्तर स्वर्ग लोक में अमृतपान करते हैं | इस व्रत को करने से सूर्य ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में स्नान के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है |

पुत्रदा एकादशी –

putrda ekadashi dr. Vinay Bajrangi

श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है | इस  व्रत के करने पर संतान के सुख की प्राप्ति होती है | संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले मनुष्यों को यह व्रत अवश्य रखना चाहिए |

अजा एकादशी –

aja ekadashi dr.Vinay Bajrangi

यह श्रावण के कृष्ण पक्ष में होती है | इस व्रत को विधि विधान पूर्वक करने से अश्मेघ यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है | यह व्रत अत्यंत पुण्यदायी है |

परिवर्तनी एकादशी –

parivartani ekadashi dr.Vinay Bajrangi

यह भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष में पड़ती है | यह व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है | इस एकादशी को व्रत करने वाले उपासक को तीनो लोकों की पूजा करने के बराबर फल मिलता है |

इंदिरा एकादशी –

यह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में होती है | इस व्रत को करने से उपासक के पितरों को अधोगति से मुक्ति मिलती है और वैकुण्ठ की प्राप्ति होती है |

पापाकुंशा एकादशी –

papakunsha ekadashi dr. Vinay Bajrangi

यह एकादशी अश्विन माह के शुक्ल पक्ष में होती है | इस व्रत के प्रभाव से उपासक रोगहीन एवं धनवान होता है एवं यम का द्वार नहीं देखना पड़ता |

रमा एकादशी –

rama ekaadashi dr.Vinay Bajrangi

यह कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में होती है | इस व्रत को करने से मनुष्य को कई हज़ार  यज्ञ करने के बराबर फल की प्राप्ति होती है एवं उपासक सभी पापों से छूटकर श्री विष्णु लोक को प्राप्त होता है |

प्रबोधिनी एकादशी –

prabodhani ekadashi dr.Vinay Bajrangi

यह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष में होती है इसे देव उत्थान एकादशी भी कहते हैं | आज के दिन भगवान विष्णु चार माह बाद शयन से जागते हैं | इस दिन से सभी शुभ कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं |

उत्पन्ना एकादशी –

utpanna ekadashi dr. Vinay Bajrangi

यह मार्गषीर्श के शुक्ल पक्ष में पड़ती है | इसे मोक्षदा एकादशी भी कहते हैं | इसी दिन से एकादशी की उत्पत्ति हुई थी अतः इस व्रत का अनुष्ठान इसी दिन से करना चाहिए |

मोक्षदा एकादशी –

mokshda ekadashi dr.Viany Bajrangi

यह एकादशी कल्याणमयी मोक्षदा एकादशी होती है | यह व्रत रखने से उपासक को भाव – बंधन से मुक्ति प्राप्त होती है एवं उसकी  सभी कामनायें पूरी होती हैं | इस एकादशी के दिन थोड़ी देर गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए |

सफला एकादशी –

safala ekadashi dr.Vinay Bajrangi

यह व्रत अति मंगलकारी और पुण्यदायी है | सफला एकादशी का व्रत अपने नामानुसार अनुकूल फल देता है |

पुत्रदा एकादशी –

putrda ekadashi dr.Viany Bajrnagi

श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को पुत्रदा एकादशी होती है | यह व्रत करने से  पूर्वजन्म के पापों का शमन कर भगवान विष्णु संतान प्राप्ति का फल प्रदान करते हैं |

षटतिला एकादशी –

shatatila ekadashi dr.Viany Bajrangi

यह एकादशी माघ के कृष्ण पक्ष में पड़ती है | माघ का महीना अति पवित्र होता है | इस माह में व्रत  ,पूजन , तप करने का अति महत्व होता है | इस एकादशी के दिन उपासक को १०८ बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाये स्वाहा  मंत्र का जाप करना चाहिए |

पध्दनी एकादशी –

paddhani ekadashi dr.Viany Bajrangi

यह अधिक मास  शुक्ल पक्ष की एकादशी है | यह व्रत रखने से उपासक का जीवन सफल होता है तथा जीवन का सुख भोगकर श्री हरी के लोक में स्थान प्राप्त करता है |

परमा एकादशी –

parma ekadashi dr.Viany Bajrangi

यह अधिक माह के कृष्ण पक्ष में पड़ती है | यह बहुत ही कठिन व्रत होता है | यह व्रत पांच दिन निराहार रहकर किया जाता है | उपासक को इस एकादशी से पांच दिन तक निराहार रहकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए , पांचवें दिन ब्राह्मण को भोजन करा स्वयं ग्रहण करना चाहिए | यह समस्त कष्टों को हरने वाला व्रत है |

 क्यों मानते हैं एकादशी –

जब भगवान ने इस संसार (प्रकृति) की उत्पत्ति की तब भगवान ने ही पाप-पुरुष यानि पाप की रचना की | इसके साथ ही पाप को नियंत्रित करने के लिए लिए यमराज की उत्पत्ति की अर्थात जो व्यक्ति अपने जीवन काल में पाप का भागी बनता उसे मृत्युपरांत यमराज के पास भेज दिया जाता और यमराज उन्हें नरक लोक भेज देते जहाँ वह अपने पापों के फलस्वरूप अनेक प्रकार के दंड भोगते |

एक बार भगवान विष्णु ने भ्रमण के दौरान नरक लोक में जब इतनी सारी जीवात्माओं को कष्ट भोगते देखा तो भगवान को बुरा लगा और उन्होंने उनकी सहायता करने के लिए अपने स्वरुप से एक रूप अवतरित किया , जिसे पाक्षिक एकादशी कहा गया | भगवान ने बताया कि जो जीवात्मा एकादशी का व्रत करेगी उसे अत्यधिक पुण्य -कर्मों का फल मिलेगा | उसके समस्त पापों का हरण होगा एवं वैकुण्ठ को प्राप्त होगा |

उसके बाद से सभी जीवात्माएं एकादशी का व्रत कर सुख भोग वैकुण्ठ धाम जाने लगी , तब पाप -पुरुष (पाप का स्वरुप ) भगवान के समक्ष जा प्रार्थना करने लगा कि हे !प्रभु मैं भी आप ही के द्वारा निर्मित हूँ परन्तु अब एकादशी के प्रभाव से मैं धीरे – धीरे समाप्त हो रहा हूँ | कृपया आप मुझे एकादशी से भयमुक्त होने का उपाय बताएं | तब भगवान विष्णु ने पाप से अन्न कि शरण में जाने को कहा | उन्होंने बताया कि जो भी व्यक्ति एकादशी के दिन अन्न ग्रहण करेगा वह पाप का भागीदार होगा | इसीलिये वह मनुष्य जो एकादशी के आधार-भूत लाभ को सजग होते हैं वह कभी एकादशी के दिन अन्न ग्रहण नहीं करते हैं क्योंकि एकादशी के दिन अन्न में पाप का वास होता है |

क्या करें और क्या न करें –

* एकादशी के दिन वृक्ष से फूल औ र पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए |

* इस दिन किसी तरह के मंजन से दातुन नहीं करनी चाहिए |

* इस दिन झूठ छल – कपट , क्रोध ,झगड़ा इत्यादि नहीं करना चाहिए |

* जौ और चावल का सेवन नहीं करना चाहिए |

* इस दिन मांस -मदिरा ,लहसुन-प्याज ,अंडा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए |

* एकादशी के एक दिन पहले से सेम कि फली और मसूर कि दाल त्याग देनी चाहिए | इससे संतान को हानि होती है |

* इस दिन पान भी नहीं खाना चाहिए |

* बाल -नाखून एवं दाढ़ी नहीं कटवानी चाहिए |

* अपनी इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहिए |

*   एकादशी पर पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाये क्योंकि पीपल में श्री विष्णु जी का वास होता है | ऐसा करने से ऋण मुक्ति होती है |

* इस दिन तुलसी माँ के सामने घी का दीपक जला कर ॐ वासुदेवाय नमः बोलते हुए परिक्रमा करें | इससे घर में सुख शांति बनीं रहती है |

* एकादशी पर दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करने से भगवान विष्णु व् माता लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं | इससे धन लाभ होता है |

* इस दिन स्त्रियों को सुहागिन स्त्रियों को बुलाकर फलाहार करा सुहाग का सामान भेंट करना चाहिए | इससे सौभाग्य कि प्राप्ति होती है |

एकादशी के दिन क्यों है चावल खाना वर्जित –

एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित होता है इसका भी एक कारण है प्रचीन कथा के अनुसार एकादशी के दिन माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेघा ने अपने योग बल से शरीर का त्याग कर दिया था और तब उनका शरीर भूमि में समा गया  और उस स्थान से धान और जौ के पौधे उत्पन्न हुए | इसीलिये धान और जौ को महर्षि मेघा के शरीर का अंश माना जाता है | यही कारण है की एकादशी को चावल और जौ का सेवन वर्जित है | अधिक जानकारी के लिए क्लिक |

Read More: Hindustan Times also captures Karma Korrection techniques of Dr. Vinay Bajrangi

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The Horoscope once allotted to us, cannot be changed. Not even the creator of it Lord Brahma can change it. Then how can astrology or astrologers help us? Let’s understand that Horoscope is a chart which is tabulated based on our Past Life Karmas. The karmas of past have gone past and are fixed, same way horoscope is fixed & none can be changed.
However with changing Planetary Transit and Dasha, we have flexibility in our present life karmas to impact the results of what is allotted to us in Horoscope. All planets (like Earth, Sun, Moon etc) keep moving which is called planetary transit. Dasha also keep changing. That is where a right astrological guidance by a competent astrologer plays the role. My practical experience of 20 Years with a PhD IN Astrology makes me write very categorically that each horoscope has both negative and positive planetary positions but actual results depend on how we drive them through our karmas of present life. Best of positive Yogas in Horoscope may not ignite for its expected positive results. Same way most negative Doshas in Horoscope can give best positive results. Important is Karma & not the so called astrology rituals. You cannot appease the God with rituals.
Indian Vedic astrology means co-relating your horoscope with your own karmas of past life, identifying flawed and good of them. Then guiding the person how to mould karmas in present life to win over impact of flawed ones.
Accurate birth time is the soul of Indian Vedic Astrology; any doubts pls go for birth time synchronization then only go for any astrological predictions. Career astrology, business astrology, marriage astrology, good progeny, negative doshas in horoscope, positive yogas in horoscope are all embedded in Vedic Astrology depending on astrologer what way want to deal with it.

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