क्या है पारिजात योग और जन्म कुंडली में इस योग का क्या अर्थ है?

ज्योतिष शास्त्र/Astrology में अनेकों योगों का उल्लेख मिलता है। इनमें से कुछ शुभों की श्रेणी में आते हैं तो कुछ अशुभ योगों में। ज्योतिष शास्त्र में एक शुभ योग का नाम पारिजात योग/parijat yoga के नाम से मिलता है। पारिजात योग संस्कृत भाषा में खुशबू व पुष्प के संदर्भ में उपयोग किया जाता है और एक पारिजात नामक वृक्ष का वर्णन भी हम विष्णु पुराण में भी पाते हैं। पारिजात चाहे प्रकृति में मौजूद हो या फिर जातक की कुंडली/Kundli में समस्त स्थान पर यह अपनी शुभता का प्रभाव ही छोड़ता है और इसके प्रभाव से जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन भी होता है।

पारिजात योग निर्माण

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पारिजात योग के बनने में कई सारी चीजों को ध्यान में रखा जाता है और कई सारे नियमों का पालन होता है। पारिजात योग निर्माण संबंधी कुछ बातें मुख्य रुप से इस योग को बनाने में सफल होती हैं।

कुडली में लग्नेश जिस राशि में भी स्थित हो उस राशि का अधिपति केन्द्र या त्रिकोण भाव में स्थित होता है, तब उस स्थिति में पारिजात योग का निर्माण होता है।

जन्म कुंडली में लग्नेश अर्थात लग्न का स्वामी जिस राशि में स्थित हो और उस राशि का स्वामी यदि उच्चस्थ हो, दिग्बली अवस्था में हो या फिर शुभ स्थिति में हो तो परिजात योग का निर्माण होता है।

जन्म कुंडली में लग्न का स्वामी/Lord Ascendant जिस भी राशि में स्थित हो उस राशि का स्वामी यदि अपने ही भाव स्थान में स्थित हो तो पारिजात योग का निर्माण होता है।

लग्न के स्वामी जिस राशि में बैठा हो, उस राशि का स्वामी या लग्न नवांश के राशि का स्वामी केन्द्र भाव में, त्रिकोण भाव में, स्वराशि में या फिर उच्च राशि में स्थिति होने पर पारिजात योग का निर्माण होता है।

पारिजात योग तब भी बनता है जब लग्नेश जिस राशि में हो उस राशि में नवम भाव का स्वामी भी स्थित हो और उस राशि का स्वामी नवम भाव में उच्च स्थिति में बैठा हो तो यह इस योग को दर्शाने वाली स्थिति होती है।

पारिजात योग का शुभ फल

पारिजात योग के द्वारा जीवन में व्यक्ति को कई प्रकार से सुख की प्राप्ति होती है। यदि पारिजात योग में स्थित ग्रह की दशा व्यक्ति को मिलती है, तो उस दशा में इस योग का असर प्रभावशाली रुप से देखने को मिलता है। पारिजात योग के द्वारा जातक साहस और विश्वास के द्वारा जीवन को जीता है। असफलताओं से निकल कर सफलताओं को छूने का दम भी उस व्यक्ति में होता है। जातक का ज्ञान, बुद्धि उत्तम स्तर की होती है। जीवन में आर्थिक क्षेत्र में कई प्रकार से लाभ और धनार्जन के अवसर भी प्राप्त होते हैं। निर्वाह योग्य आय की प्राप्ति किसी न किसी रुप से होती रहती है।

इस योग द्वारा व्यक्ति में प्रतिभा का विकास होता है, सामाजिक क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त होती है। सरकार की ओर से लाभ की प्राप्ति संभव हो पाती है। परंपराओं व आध्यात्मिक क्षेत्र में नए विचार एवं शुभता का प्रभाव प्राप्त होता है।

पारिजात योग में केन्द्र त्रिकोण भावों का प्रभाव व ग्रह की उच्च स्थिति कई तरह से जातक के जीवन में सकारात्मक फलों को प्रदान करने में सहायक बनती है। ज्योतिष अनुसार जन्म कुंडली के केन्द्र व त्रिकोण भाव अत्यंत शुभ स्थान माने जाते हैं जो चहुंमुखी विकास में काफी योगदान देते हैं व्यक्ति को यदि इन भावों के स्वामी की दशा शुभ स्वरुप से प्राप्त हो तो सफलताओं को पाने से उसे कोई रोक नहीं सकता है। पारिजात योग दशा प्रभाव जातक को जीवन में शुभ फल देने वाली होती है।

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