शुक्र और केतु ग्रह के युति का प्रभाव/ Effect of Venus and Ketu Conjunction

शुक्र केतु युति

 

ग्रहों का प्रभाव जब युति योग में होता है अर्थात जब ग्रह एक साथ एक राशि में बैठते हैं तो युति बनाते हैं. उस समय को एक विशेष समय माना जाता है. दो ग्रहों का अलग अलग प्रभाव होता है, और जब विपरीत विचारधाराओं का एक साथ संगम होता है तो स्थिति काफी रोचक हो जाती है. शुक्र और केतु का एक साथ होना दिलचस्प हो सकता है. इन दोनों की युति जातक के जीवन को गहराई से बदलने वाली होती है. इस समय के दौरान व्यक्ति के लिए किसी एक चीज के प्रति आसक्त होना संभव नहीं होता है, भटकाव भी अधिक होता है. अच्छे और बुरे दोनों ही फल शुक्र केतु/Venus Ketu Conjunction युति में देखने को मिल सकते हैं.

शुक्रकेतु युति

शुक्र केतु युति सिर्फ जातक तक ही सीमित नहीं होती है बल्कि ये युति योग बाहरी ताने बाने पर भी असर डालता है. इसका युति योग जबरदस्त रुप से बदलाव और असर दिखाने में सक्षम होता है. जब दो ऐसे ग्रह साथ होते हैं जिनका पूर्ण अस्तित्व ही एकदम भिन्न होता है तो उस स्थिति में यह काफी गंभीर असर डालता है. इस समय काफी चीजें टकराने वाली होती हैं और बड़े बदलाव भी जल्द से दिखाई देते हैं. बदलावों का असर एक लम्बे समय तक रहता है. इस संबंध में शुक और केतु का युति योग काफी अध्ययन का मामला बनता है क्योंकि इन दोनों का स्वभाव काफी अलग देखने को मिलता है.

कुंडली में शुक्र का प्रभाव 

ज्योतिष में शुक्र ग्रह को शुभ ग्रह माना गया है. शुक्र को भावनाओं, संबंधों, इच्छाओं, भौतिक सुख सुविधाओं, यौन संबंधों, प्रेम संबंधों के लिए विशेष रुप से उत्तरदायी माना जाता है. जीवन में मिलने वाला जो आनंद है उसका अनुभव शुक्र के द्वारा ही अनुभूति को पाता है. इस सुख एवं आनंद को हम कैसे भोग सकते हैं यह शुक्र ग्रह के शुभाशुभ फलों से हमें मिलता है. जन्म कुंडली में शुक्र की स्थिति विवाह संबंधों की परिणीति को दर्शाती है. इसके साथ जीवन में मिलने वाला भौतिक सुख सुविधाएं जैसे भवन, वाहन, वस्त्र आभूषण इत्यादि के लिए शुक्र की स्थिति अत्यधिक जिम्मेदार होती है. जन्म कुंडली में शुक्र व्यक्ति के जीवन में प्रेम रोमांस की स्थिति को भी प्रभावित करने वाला होता है.

कुंडली में केतु का प्रभाव

 वैदिक ज्योतिष में केतु ग्रह का बहुत महत्व है. ज्योतिष में राहु के साथ केतु को छाया ग्रह माना गया है. वैदिक ज्योतिष में इस ग्रह को छाया ग्रह के रूप में बताते हैं, जो स्थिति और अपने साथ बैठे ग्रह के अनुसार फल देता है. कुंडली में केतु किस भाव और किस राशि में बैठा है, यह इसके फलों को बहुत प्रभावित करता है. कुंडली के कुछ भाव ऐसे होते हैं जिनमें केतु की उपस्थिति शुभ फल देती है तो कुछ में नकारात्मक फल देती है. कुंडली में केतु का प्रभाव अध्यात्म, वैराग्य और मोक्ष का ग्रह माना गया है. केतु का प्रभाव व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक रुप से प्रभावित करता है.

शुक्र केतु युति योग फल

जहां शुक्र भोग का कारक होता है वहीं केतु मोक्ष का कारक होता है. ऐसे में इन दोनों का स्वरूप एक दूसरे से काफी अलग दिखाई देता है जब भ्रममाया का ग्रह केतु भौतिक सुखों के ग्रह शुक्र के साथ युति में होता है तो निश्चित रुप से यह गहरे असर डालने वाला होता है.

 

शुक्र केतु योग व्यक्ति की भावनाओं पर गहरा असर डालने वाला हो सकता है. इस समय के दौरान प्राप्ति एवं मुक्ति का योग साथ में फलित होता दिखाई देता है. दुविधा और पाने की इच्छा को लेकर अंतर्विरोध अधिक रह सकता है.

 

शुक्र केतु का एक साथ होना आपको सृजनात्मक तरीके से बेहतरीन परिणाम दे सकता है. नई संभावनाओं का जन्म हो सकता है. कई नवीन चीजों का पता लगाया जा सकता है. यह कला जगत में भी बेहतर होता है. अभिनय में कुशलता दे सकता है लेखन को प्रभावशाली बना सकता रिसर्च को नया रंग दे सकता है. राजनीति में सफलता दिलाने में सहायक बन सकता है. छल कपट या जासूसी जैसे कार्यों में आगे रख सकता है. आध्यात्मिक क्षेत्र में काफी प्रगतिशील बना सकता है.

 

शुक्र और केतु का नकारात्मक प्रभाव प्रेम संबंधों पर दिखाई देता है. रोमांस की अनुभूति को पाना मुश्किल होता है. प्रेम जीवन में निराशा जनक नतीजे सामने सकते हैं. यौन संबंधों में उदासीनता का भाव भी उत्पन्न कर सकता है. केतु अलगाव को जन्म देता है और शुक्र केतु युति में व्यक्ति संबंधों में विच्छेदकारी स्थितियों का सामना कर सकता है.

 

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