व्यापार और व्यवसाय मेँ अचानक गिरावट के ज्योतिष्य कारण

व्यापार और व्यवसाय

हम सभी अपने व्यवसाय और व्यापार को विकसित करना चाहते हैं और इस से भी महत्वपूर्ण बात यह हैं की इसे और आगे बढ़ाना चाहते हैं! सभी जीवन में ऊपर उठाना चाहते हैं इन सब बातों में कोई  अपवाद नहीं है ! व्यवसाय और पेशे को जीवन में ऊँचा उठाना अत्यंत महत्वपूर्ण हैं! लेकिन इसकी बढ़ोतरी को बनाए रखने के लिए ये जरुरी नहीं की आप किसी जाल में फंस जाए और पूरी तरह से लुप्त हो जाएँ ! व्यापार और पेशे में वृद्धि और वृद्धि की खोज में, कभी-कभी हम पुण्य के माध्यम से पापी कर्मों में उतर जाते हैं वर्तमान में कई जीवित मामलों के ऐसे उदाहरण प्रचलित हैं जंहा अभूतपूर्व वृद्धि के बाद भी लोगो को असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ा ! और यह सत्य प्राचीन काल से भी पता चलता हैं ! जहाँ भगवान विष्णु जी ने नारद जी से कहा था की दुसरो से अधिक वृद्धि प्राप्त करने की चाह में भी बुद्धिमान व्यक्ति सही और गलत के बीच की पतली रेखा को भी भेद नहीं पाते हैं और अधिकांश लोगो को आनंद की अनुभूति में पाप की और बढ़ते देर नहीं लगती !

व्यवसाय और व्यापार आकस्मिक बदलाव – कुछ प्रासंगिक उदाहरण

कई बिल्डर और डेवलेपर्स जो एक समय में उत्कर्ष पर थे अब वो ही लोग मुश्किल और भयंकर सरकारी और अदालती शिकंजों में फंसे है !

बहुत अच्छी तरह से स्थापित और मुनाफा कमाने वाली इकाइयां जो लगातार पनपने की राह पर थीं  अब वो चलना बंद हो गई हैं !

जो लोग सत्ता के दलाल थे और सरकार  के सभी शौर्य और लाभ वाले शासक थे वो अब सरकार के दवाबो के आधीन  हो गए हैं !

समय के साथ अलग अलग व्यवसाय और व्यापार में कुछ भी ऐसा लगता हैं कि जो कुछ भी उन्होंने जमा किया था वह खो रहा हैं और यह केवल धन कि हानि तक ही सीमित नहीं हैं ब्लकि इस से आपकी प्रतिष्ठा और मान सम्मान भी फीकी पड़ रही हैं

ज्योतिषीय अंतर्दृष्टि – सभी व्यवसाय और व्यापार के लिए सामान्य

हर कुंडली में मित्र ग्रह भी होते है जो हमारे मित्र होते हैं तथा शत्रु हानिकारक ग्रह भी होते हैं जो हमें क्षति पहुंचाने वाले शत्रु होते हैं और इन से भी बढ़कर कुछ भटकाने  वाले ग्रह भी होते हैं जैसे कि हमारे पास कुछ दुश्मन हैं जो मित्र के रूप में प्रच्छन्न (छिपे) होते हैं ! इसी प्रकार कुछ ग्रह भी सन्देह प्रद होते हैं और यह सभी ग्रह अपनी दशा (अवधि )  और गोचर (गोचर ) के अनुसार कार्य करते हैं ! प्रतक्ष्य रूप से नकारात्मक या साकारत्मक ग्रहों के परिणाम समझना कुछ हद तक आसान हैं। लेकिन प्रच्छन्न ग्रहों का प्रभाव ऐसा होता है कि जब वे कार्य करते हैं तो वे मूल निवासी को अनपेक्षित सुख और ऊंचाइयों  को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं चाहे वह गलत तरीके से ही क्यों ना हो ! और जब वो कार्य करना बंद कर देते हैं या उनका प्रभाव कम हो जाता हैं तो शत्रु ग्रह मूल निवासी को ज्यादा परेशानियाँ देते हैं

एक छोटी सी सावधानी

इसलिए यह जरुरी हैं कि लोग किसी भी व्यवसाय या पेशे में हो इन नरम व् प्रच्छन्न तथा हानिकारक ग्रहो के प्रभाव से ज्यादा लाड नहीं करना चाहिए क्योंकि स्पष्ट रूप से अच्छे दिखने वाले परिणाम हमेशा के लिए नहीं रहते हैं। एक सक्षम कुंडली विश्लेषक उन सीमाओं को निर्धारित कर सकता है जिनके भीतर आपको इन प्रच्छन्न या अकुशल ग्रहों पर भरोसा करना चाहिए।

ऐसा क्यों होता हैं ?

ज्योतषीय रूप से यह सूर्य का पिछला ( छुपा हुआ) हिस्सा हैं और एक बार सक्रिय होने के बाद यह क्रूर हो जाता  हैं जहाँ  सूर्य एक तरफ शक्ति , वीरता , शौर्य तथा  सभी सरकारी कार्यो का आश्वाशन,  उच्च पद और जनता पर शासन करने कि शक्ति देता हैं वहीँ पर  यही  सूर्य जब बेकाबू हो जाता हैं तो निर्दयता के साथ घातक भी होता हैं क्योंकि यह अनैतिकता, अहंकार, क्रूरता को प्रभावित करता है ! और कुछ प्रवृतियां जैसे कि – मैं किसी की परवाह नहीं करता, सरकार के नियमो के प्रति अवहेलना, छेड़ खानी करना, सबको हीन समझना आदि!  अप्रत्यक्ष रूप से यह आपके  दुश्मनो को भविष्य मेँ आपके ऊपर हावी होने का मार्ग बनता है ! सूर्य का एक बार कुंडली में अस्त होना आगे और सरल विस्तार के लिए भाग्य में पूर्ण अंधकार लाता हैं और सूर्य इतना मजबूत ग्रह हैं कि जब सूर्य खुद अंधेरे में रहता हैं तो अन्य ग्रह सूर्य का सामना नहीं कर पाते और समस्याओं को कम करने के लिए सबल नहीं होते ! जब सूर्य ऐसी नकारात्मकताओं को लागू करने वाला होता है तो जातक को मजबूत संकेत मिलने लगते हैं ये संकेत सिर दर्द ,पेट दर्द, हड्डियों और आँखों कि बीमारियों कि तरह  होते हैं इस से यह अभिप्राय हैं कि जातक को पूर्वाभास हो जाता हैं कि सूर्य खराब हो रहा हैं इसलिए इसे नियंत्रित करने का प्रयास करें फिर भी अगर हम इस तरह के संकेतों को नजर अंदाज करते हैं, तो हमें ग्रहों को नहीं वरन खुद को दोषी मानना होगा !

कौन इस तरह के प्रभाव का सामना कर सकता है?

एक उत्तम योग लक्ष्मी योग या राज योग वाले जातक की कुंडली में भी एक नकारात्मक योग होता हैं जो सरकारी मामलो में परेशान  कर सकता हैं और एक अजीब लेकिन सबसे बुरी बात यह है कि यह नकारात्मक योग भी एक साथ सक्रिय हो जाते है। यद्यपि सरकारी या कानूनी, अदालती मामले एक ही घर से दिखाई दे जाते हैं, लेकिन इन समस्याओं के बीच अंतर करने के लिए बहुत पतली रेखा होती है !  इन सहायक घरों (HOUSES) में ऊर्जा का निरंतर स्रोत होता हैं और अचानक अनियंत्रित होने वाली समस्याओं का पूर्वाभास करा सकते हैं और एक दूसरे को बदल भी सकते हैं ! एक मजबूत सहायक चंद्रमा और समान रूप से मजबूत लगन और उसके स्वामी वाले लोग इस तरह के निरंतर दबावों को संभालने में सक्षम हैं लेकिन एक ख़राब चंद्रमा और कमजोर लगन वाले लोग ऐसी परिस्थितियों में लड़ने में नाकाम रहते हैं और दबाव के आगे झुक जाते हैं ! बाद में सरकारी समस्याओं के अलावा लोगो को स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों जैसी कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं ! आगे वे अन्य नकारात्मकताओं का सामना कर सकते हैं जैसे ऋण नियंत्रण से परे हो जाना, दुश्मनों में वृद्धि, भागीदारों और शुभचिंतकों को खोना, स्वास्थ्य पीड़ा का दूर न होना आदि हो सकते है ! इस स्तिथि मेँ  बहुत भाग्यशाली लोग ही  दिव्य सामरिक हस्तक्षेप के लिए एक सक्षम ज्योतिषी से मिल कर अपने आप को सक्षम बना पाते हैं.

सभी व्यवसाय और व्यापार के लिए एक छोटी सी सलाह

लगभग 2 दशकों के अपने अनुभव में, मैंने कई कुंडलियाँ देखी हैं जिनमें सूर्य कुंडली मेँ ऐसे स्थान पर स्तिथ होता  है कि वह किसी भी तरफ  रुख कर सकता है ! और  यही कारण हैं कि कुंडली मेँ  चन्द्रमा ( चन्द्रमा अगर सशक्त ) और आत्म ( लगन अगर मजबूत हैं ) जैसा की ऊपर बताया गया हैं वो ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं !  ये दोनों कारक एक साथ मिलकर असहनीय सूर्य की नकारात्मकता से लड़ते हैं इसलिए यदि आपकी कुंडली में सूर्य अच्छी तरह से स्थित है, तो भी उसकी स्थिति D10 और D60 चार्ट से अवश्य जाँच कराएं  मुझे यकीन हैं की इसकी आंतरिक प्रकृति यह सब स्वयं प्रकट करेगी अंत में आपको इन विभाजन चार्टों के गहन अध्ययन के आधार पर कर्म सुधार की सलाह दी जाती हैं  

शीर्षक का इस लेख से प्रसंग और सह सम्बन्ध

अब अगर मेँ इस लेख के आरम्भ मेँ जाता हूँ तो हमारे जीवन, व्यवसाय और व्यापार में वृद्धि का महत्व तो  है लेकिन अधिक महत्वपूर्ण यह हैं कि आप जहां हैं या जहां रहना चाहते हैं, वहां से गिरें या गायब न हों। हमे एक ऐसे संघ या साथ  से लाभ उठाना चाहिए चाहे जो हमारे लिए लाभदायक हो फिर चाहे  वह मित्र हो या हमारे ग्रह ! हमको ये नहीं भूलना चाहिए कि मित्र दायक दिखने वाले ग्रह या व्यक्ति ही कभी कभी वास्तव मेँ अत्यंत हानिकारक हो सकते हैं क्योंकि उनका असली स्वरुप छुपा हुआ होता है जो कि दर्दनाक परिस्थियाँ दे सकते हैं ! भारतीय वैदिक ज्योतिष का एक कुशल वक्ता यहाँ आपकी मदद कर सकता है और ध्यान रहे कि ये ज्योतिष वक्ता आपको कर्म सुधारने की सलाह देने वाला होना चाहिए न कि आपको भारी भारी उपाय और अनुष्ठान करने के लिए प्रेरित करे.!  

Leave a Reply