मिथुन और कन्या राशि के स्वामी बुध होंगे अस्त

mercury

मई 2022 का महीना प्रारम्भ होते ही साल का पहला सूर्य ग्रहण लगा था, या यूं कहें तो मई 2022 की शुरूआत एक बहुत ही प्रमुख खगोलीय घटना से हुई। ज्योतिषियों के हिसाब से मई का महीना अत्यंत ही विशेष है। सूर्य ग्रहण/Solar Eclipse के साथ-साथ साल का पहला चंद्र ग्रहण/Lunar Eclipse भी मई के महीने में ही लगने जा रहा है। ग्रहों की चाल या राशि परिवर्तन का प्रभाव सम्पूर्ण विश्व पर पड़ता है और संसार का प्रत्येक व्यक्ति इससे प्रभावित होता है। ये बात और है की कुछ पर इसका प्रभाव ज़्यादा तो कुछ पर इसका प्रभाव कम रहता है। मई में ग्रह बुध की चाल में बहुत अधिक परिवर्तन देखने को मिलेंगे। ये ग्रह मई में किस तरह से अपनी चाल में परिवर्तन कर रहा है, आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं

3 जून को वृषभ राशि में बुध ग्रह होंगे मार्गी

वक्री व अस्त अवस्था के पश्चात बुध ग्रह 3 जून को अपनी मार्गी अवस्था में वापस आ जायेगा। बुध ग्रह वृषभ राशि में 2 जुलाई तक गोचर करेंगे/Mercury Transit in Taurus जो लगभग 68 दिन तक की अवधि का रहेगा। सीधे शब्दों में कहें तो वृषभ राशि में 68 दिन तक रहते हुए बुध 24 दिन वक्री और 27 दिन तक अस्त रहेगा। साधारणतया बुध ग्रह प्रत्येक 21 दिन में अपनी राशि बदलता है लेकिन गोचर काल में कभी-कभी यह समय अवधि बढ़ जाती है। बुध ग्रह का गोचर/Mercury Transit की इस दीर्घ कालीन अवस्था को ज्योतिषीय भाषा में अतिचारी कहा जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह 

ज्योतिष में बुध को एक शुभ फल देने वाला ग्रह कहा गया है और ये जिस ग्रह के साथ युति बनाता है, उसी के अनुसार फल देता है। यदि यह शुभ ग्रहों जैसे गुरु, शुक्र और बढ़ते चंद्रमा के साथ हो तो शुभ और यदि अशुभ ग्रहों जैसे मंगल, केतु, शनि या राहु के साथ हो तो अशुभ फल प्रदायक होता है। ज्योतिष के अनुसार बुध सदैव ही सूर्य के सानिध्य में ही रहता है। जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यंत समीप आ जाता है तो वह सूर्य की किरणों से अस्त हो जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यदि बुध सूर्य के 14 डिग्री या उससे कम डिग्री के अंतराल पर हो तो उसे अस्त माना जाता है। बुध ग्रह, मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है। ज्योतिष शास्त्र कहता है जब कोई ग्रह अस्त हो जाता है तो उसकी शक्ति कम हो जाती है।  वह कुंडली/Kundli मैं अपना पूरा प्रभाव नहीं दे पाता है और इसके शुभ फलों में कमी आ जाती है। बुध ग्रह वाणी और बुद्धि का कारक ग्रह है और इसके अस्त होने से कुछ लोगों को निवेश व खुदरा व्यापार में नुकसान हो सकता है। बुध के अंतर्गत कागजी काम, वकील, व्यापार, वित्त प्रबंध आदि आते हैं।

10 मई को वृषभ राशि में बुध चलेंगे वक्री चाल

मई के महीने में बुध की चाल में पहला परिवर्तन 10 मई को होने जा रहा है। इस दिन बुध ग्रह, वृषभ राशि में रहते हुए वक्री गति से चलने लगेंगे यानि अपनी उल्टी चाल चलेंगे।  ज्योतिष शास्त्र में बुध, लेखन, गणित, एकाउंट्स, व्यापार और कम्युनिकेशन आदि का कारक माना गया है। बुध के लिए मान्यता है कि बुद्ध ग्रह साल में 3 से 4 बार वक्री गति में भ्रमण करते हैं। हिन्दू पंचांग/Hindu Panchnag के अनुसार ग्रह बुध, 10 मई 2022 को शाम 5 बजकर 16 मिनट पर वृषभ राशि में वक्री हो जायेंगे।  

13 मई को वृषभ राशि में बुध ग्रह होंगे अस्त

10 मई को बुध के वक्री हो जाने के उपरान्त जब सूर्य का भी गोचर वृषभ राशि में होगा/Sun Transit in Taurus तो उनके सानिध्य से बुध 13 मई को पंचांग के अनुसार अस्त हो जाएंगे। सूर्य के बेहद नजदीक आ जाने के कारण बुध अपनी किरणें खो देगा हो शक्तिहीन हो अस्त हो जायेगा। बुध अस्त होने पर अपने पूर्ण शुभ फल प्रदान करने में असमर्थ हो जाते हैं। हिन्दू पंचांग की गणनानुसार, 13 मई की सुबह 12 बजकर 56 मिनट पर बुध वृषभ राशि में अस्त हो जायेगा और फिर 30 मई, 2022 को पुनः वृषभ में ही उदित हो जाएगा।  

किन जातकों पर पड़ेगा बुद्ध के अस्त होने का अधिक असर 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मिथुन और कन्या राशि के स्वामी होने के कारण बुध ग्रह की गति परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव इन्ही दो राशियों पर पड़ता है। इसके अलावा जिन जातकों की कुंडली में बुध यदि दसवें घर का स्वामी हो या शिक्षा का स्वामी हो या फिर कुंडली में बुध की दशा-अंतर दशा चल रही हो तो ऐसे जातकों पर बुध की चाल व राशि परिवर्तन/Planetary Transit का अधिक असर पड़ेगा। ऐसे जातकों को बुद्ध के शुभ फल प्राप्त करने के लिए, उपाय अवश्य करने चाहिए। बुध के अस्त हो जाने पर गणेश जी व मां दुर्गा की आराधना करनी चाहिए, साथ ही गणेश चालीसा व दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। बुध मंत्र का जाप भी करना चाहिए और गाय को हरी घास खिलानी चाहिए। बुध से शुभ फल प्राप्त करने के लिए पन्ना रत्न पहना जाता है।

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