कुंडली में मंगल-शुक्र की युति के क्या है प्रभाव?

venus and mars

शुक्र ग्रह तुला और वृषभ दो प्रसिद्ध राशियों का स्वामी है। शुक्र ग्रह मुख्य रूप से घरेलू सामंजस्य, आजीविका से संबंधित है और इन्ही से संबंधित मामलों को प्रभावित करता है। इसका शुभ प्रभाव जीवन में समृद्धि, आभूषण, प्लाट अथवा प्रोपर्टी डीलिंग के बिजनेस में सफलता प्रदान करता है। शुक्र से प्रभावी व्यक्ति अक्सर पतले और दुबले होते हैं। व्यक्ति की कुंडली में शुक्र इस बात का भी संदेश देता है कि उसका भावी जीवन साथी कैसा होगा और विवाह से जुड़े कई मामलों में महत्वपूर्ण जनकारी दे सकता है। यह संचार, रचनात्मक कला, उपचार और रहस्यमय मंत्रों का संकेत देता है।

दूसरी तरफ, उग्र और ऊर्जावान ग्रह जो पृथ्वी और वराह का पुत्र हैं, अत्यंत मंगलकारी प्रभाव के लिए जाना जाता है। अगर बात करें कुछ प्रसिद्ध कुंडली दोषों की तो मंगल मंगल दोष/Manglik Dosha और दोष की सूचि में बहुत प्रसिद्ध है। मंगल ग्रह क्रोध के लिए जाने जाते हैं और जब कोई व्यक्ति मंगल से प्रभावित होता है तो वह अक्सर छोटी छोटी बातों से क्रोधित हो जाते हैं। लेकिन ऐसा तब होता है जब मंगल कुंडली में अशुभ होता है। एक मजबूत मंगल जीवन के साथ युद्ध करने के लिए व्यक्ति को उत्साह और साहस देता है और आमतौर पर मानव-प्रबंधन में बहुत अच्छा साबित होता है।

शुक्र विलासिता और सभी प्रकार के सांसारिक सुख का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि मंगल सैनिकों और दुर्घटनाओं और चोट को दर्शाता है। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि शुक्र और मंगल का योग पारिवारिक सामंजस्य और कलह के तत्वों को एक साथ लाते हैं।

कुंडली में मंगल-शुक्र का योग कौन से करियर की ओर इशारा करती है?

शुक्र और मंगल योग रचनात्मक कला, फैशन डिजाइन और होटल प्रबंधन से जुड़े करियर की तरफ व्यक्ति को आकर्षित करता है। यह दोनों ग्रह जिस राशि पर नज़र डालते हैं और उन्हें बहुत ज्यादा प्रभावित कर देते हैं।

मंगल-शुक्र के मेल से होने वाले कुंडली पर प्रभावों का विस्तृत वर्णन – 

मंगल और शुक्र का योग अपनी-अपनी ताकत के आधार पर बहुत ज्याद बड़े परिणाम दे सकता है। ऐसे व्यक्ति आंतरिक रूप से आकर्षक होते हैं। वह समाज के बड़े-बड़े लोगों से मेलजोल रखते हैं। नैतिकता और काम के बारे में उनके विचारों में नरमी होती है। हर लिहाज से उनकी गिनती बहुत प्यारे लोगों की सूची में आती है। उनकी समस्या शादी से शुरू होती है। उन्होंने वासनापूर्ण इच्छा और भय रहित कामना को मन में रखा होता है, जो उन्हें साहसिक व्यक्तित्व प्रदान करता है। इन प्रवृत्तियों पर केवल बृहस्पति और शनि का ही दबाव हो सकता है। मेष, सिंह, धनु राशि/Sagittarius Horoscope में यह संयोजन एक अच्छे व्यवहार वाले व्यक्ति को एक क्रूर और उग्र व्यक्ति में बदल सकता है, जिसके कारण व्यक्ति अपनी पत्नी को भावनात्मक और शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार करने वाला बन सकता है। इन प्रवृत्तियों पर केवल बृहस्पति की मज़बूत दृष्टि ही शांत कर सकती हैं।

वैसे तो एक वैवाहिक लोगों के बीच लड़ाई-झगड़ा होना आम बात है। लेकिन यदि यह योग कुंडली के सप्तम भाव में हो तो उस व्यक्ति को हिंसक स्वभाव और भारी सोच रखने वाले जीवनसाथी की प्राप्ति करता है। यह प्रभाव शनि के कुंडली में छठे, आठवें या बारहवें भाव में होने से और बढ़ जाता है। यदि नीच या उच्च का हो, तो यह संयोजन पूरी तरह से विपरीत परिणाम लाता है, जिसके परिणामस्वरूप या तो अत्यधिक प्रतिबंध या अत्यधिक प्रशंसनीय संबंध बनते हैं। यदि यह पुरुष की कुंडली के चतुर्थ भाव में नीच की हो तो यह वैवाहिक जीवन के लिए अशांति और दुख लाता है। दशम भाव में यह योग व्यक्ति को वस्त्र, शल्य चिकित्सा, व्यंजन आदि के माध्यम से धन अर्जित करने में सहायता करता हैं। जाने माने शेफ का जन्म इसी सहयोग के तहत होता देखा गया है। यदि सप्तमेश 6वें, 8वें, या छठे, 7वें, और 8 वें भाव में लग्न, चन्द्र या शुक्र 6वें, 7वें, 8वें या दूसरे भाव में स्थित हो तो वैवाहिक जीवन में कलह होते हैं। यदि अन्य हानिकारक प्रभाव और वही ग्रह योग मौजूद हो, तो आप अपने जीवनसाथी से अलग हो सकते हैं। बृहस्पति की दृष्टि विवाह को टूटने से बचा सकती है।

इन दोषों को रद्द करने के लिए, सबसे उचित तरीका यही है की सबसे पहले आप अपनी जन्म कुंडली/Janam Kundli को एक अच्छे ज्योतिषी से दिखाएं।  जो आपको बताएगा की कुंडली में नवांश और षोडशांश की स्थिति क्या है। इन सबके आधार पर आपको बता पाएंगे कि कुंडली में मौजूद दोषों को निष्प्रभाव कैसे किया जा सकता है। कुंडली में यह दशा व्यक्ति की भक्ति में रूचि, विवाह या तलाक से जुडी संभावनाओं को दर्शाता है। कुंडली में कई योग ऐसे होते हैं जो इस योग से जुड़े दोष को रद्द कर देते हैं। मंगल और शुक्र व्यक्ति के लिए अद्भुत रसायन विज्ञान में रूचि का संकेत देते हैं। मंगल और बृहस्पति पुरुषों के वैवाहिक जीवन के कारक हैं, जबकि महिलाओं के मामले में यह शुक्र है। यदि दोनों जीवनसाथी की कुंडली में यह ग्रह परस्पर योग में हों तो विवाह सफल होता है।

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मंगल और शुक्र का विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

प्रत्येक राशि के लिए मंगल और शुक्र का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। 

  • मकर राशि में मंगल इस युति में शुभ होता है क्योंकि वह मकर राशि में उच्च का होता है और शुक्र के साथ मित्रतापूर्ण रहता है। 
  • उसी प्रकार यदि शुक्र मीन राशि में शुभ हो तो यह उस राशि में उच्च में होता है और मंगल भी मित्रवत होते हैं। 
  • यदि मंगल कर्क राशि में नीच का हो और शुक्र की कोई आत्मीयता न हो तो यह युति घातक साबित हो सकती है। 
  • इसी तरह, जब शुक्र नीच की स्थिति में होता है, तो कन्या राशि में मंगल मित्र स्थिति में नहीं होता। 
  • मेष, सिंह, धनु, मंगल अक्सर शुक्र पर शासन करते हैं, और इसके विपरीत, वृषभ, मिथुन, तुला, कुंभ, शुक्र ग्रह मंगल पर शासन करते है। यदि उनमें से एक भी प्रतिगामी है, तो प्रभाव विपरीत हो सकता है। यह विपरीत प्रभाव अक्सर अशुभ फल प्रदान करता है। 

शुक्र मंगल योग के क्या प्रभाव हैं?

मंगल प्रथम और आठवें भाव का स्वामी है। अष्टम भाव का मज़बूत या कमज़ोर होना विवाह को बना या बिगाड़ सकता है। 
शुक्र प्रेम और साथी पर अपना प्रभाव डालता है। वह दूसरे और सातवें घर का मालिक है। यह भाव एक साथ आने पर भाव का प्रभाव कम करते हैं। शुक्र मंगल योग/Venus Mars Conjunction व्यक्ति पर विशेष प्रभाव डालते हैं। शुक्र मंगल योग का निर्माण तब माना जाता है जब मंगल शुक्र के घर से सप्तम भाव में हो। यह तब भी पाया जाता है जब शुक्र मंगल राशि में हो और मंगल दुर्बल हो। जब ग्रह या राशि के माध्यम से मंगल और शुक्र आपस में मिलते हैं तो यह योग बनता है।

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