क्या होगा वैवाहिक जीवन पर असर जब मंगल और शुक्र करेंगे मकर राशि में प्रवेश

Venus and Mars Conjunction

शुक्र यह दर्शाता है कि हम किस प्रकार अपने संबंधों को महत्त्व देते हैं ओर अपने साथी की भावनाओं पर किस प्रकार कि प्रतिक्रया देते हैं। यह मुख्य तौर पर रोमांटिक संबंधों को दर्शाता है। इसके अलावा शुक्र जीवनसाथियों के मध्य एक प्यार भरे और सौहार्दपूर्ण वातावरण के निर्माण से जुड़ा है। मंगल इच्छाशक्ति और पहल को भी दर्शाता है। यह दबे हुए गुस्से और हताशा का संकेतक है, जो हमें अपने जीवन के संघर्षों से जूझने के लिए कुछ हद तक आश्वस्त करता है। वह ज्योतिषी जो जीवनसाथी के बारे में अपने ज्योतिषीय ज्ञान से बता सकते हैं, वही इस प्रश्न का उतार बड़ी ही कुशलता से दे सकते हैं। इस ब्लॉग में हम यह बता रहे हैं  कि किस प्रकार “मंगल और शुक्र की युति वैवाहिक जीवन को प्रभावित कर सकती है।” 

मंगल और शुक्र क्रमश: 26 और 27 फरवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे

शुक्र और मंगल ग्रह योग के पहलू 

राशि और अंशों की स्थिति के अनुसार, हम यह ज्ञात कर सकते हैं कि विवाह ज्योतिष/marriage astrology के सन्दर्भ में दोनों ग्रहों में से अधिक बलशाली ग्रह कौन सा है। यह एक व्यक्ति में शुक्र से सम्बंधित गुणों में वृद्धि करता है। यह ग्रह योग अभिनय, कला, डिजाइन, सौन्दर्य, फैशन और होटल मैनेजमेंट से सम्बंधित गुणों का विकास करता है और उसके बारे में संकेत देता है।

ज्योतिष में शुक्र ग्रह का महत्व

शुक्र भोग विलास एवं आनंद का संकेतक है। शुक्र को विलासी ग्रह भी कहा जा सकता है।  एक पुरुष की कुंडली में शुक्र उसकी पत्नि या उसके जीवन में आने वाली स्त्रियों को दर्शाता है। 

ज्योतिष में मंगल ग्रह का महत्व

आज के दौर में मंगल ग्रह सैनिक, खिलाड़ियों और हथियारों के विक्रेताओं, दुर्घटना या उस दुर्घटना में लगी चोट को दर्शाता है। मंगल और शुक्र का संयोजन दो परिवर्तनशील ग्रहों को साथ लाता है, जिसमें एक प्यार तथा दूसरा तकरार को दर्शाता है। परन्तु किसी भी अन्य ग्रह योग की तरह, इसके भी अनुकूल तथा प्रतिकूल दोनों प्रभाव होते हैं।

जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल और शुक्र की युति होती है, वह देखने में अत्यंत ही प्रभावशील होता है। उन्हें सदा प्रभावशाली तथा प्रतिष्ठित लोगों की संगती प्राप्त होगी। शुक्र का मंगल का प्रभाव उनके दृष्टिकोण को नीति और कर्म के प्रति नर्म कर देता है। यह युति एक व्ताक्ति को अधिक सौम्य एवं आकर्षक बनाती है।

शुक्र और मंगल के ग्रह योग का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव

वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्याएँ काफी विस्तृत हो सकती हैं। कुंडली के द्वितीय, सप्तम, प्रथम और अष्टम भावों के स्वामियों की युति एक व्यक्ति को  सशक्त तथा विलासी बना सकती है। यदि इस युति पर गुरु अथवा शनि की दृष्टि है, तो शारीरिक इच्छाएं बहुत हद तक कम हो जायेंगी। मेष, सिंह और धनु राशि में मंगल अथवा शुक्र की स्थिति, एक शांत पुरुष को भी पत्नि पर अत्याचार करने वाला बना सकती है। यही संयोजन यह भी दर्शाता है की क्या स्त्रियाँ अपने जीवनसाथियों द्वारा अत्याचार और उत्पीड़न की शिकार तो नहीं बनेंगी। परन्तु गुरु की दृष्टि निश्चित तौर पर परिस्थितियों को शांत करने की क्षमता रखती है। 

शुक्र और मंगल का संयोजन निरंतर होने वाली झड़पों को दर्शाता है, क्योंकि मंगल ग्रह शक्र और आक्रामकता का सत्रोत है। यदि इन दोनों ग्रहों की युति सप्तम भाव में होती है तो इसके परिणाम हितकर या अनुकूल नहीं होंगे, क्योंकि इस योग के कारण जीवनसाथी गुसैल तथा अहंकारी होगा। यह युति इतनी हानिकारक नहीं है जितनी की प्रतीत होती है, क्योंकि इसका सबसे बुरा प्रभाव तभी पड़ता है जब यह युति छठे या अष्टम भाव में हों और यदि शनि से छठे, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो। इनमें से किसी भी ग्रह में नीच और उच्च होने का अर्थ दो विपरीत चीजें हो सकती हैं। इन ग्रहों की उच्चता से प्रभावित कपल या तो अत्यधिक कामुक या प्रतिबद्ध भागीदार हो सकते हैं।

इसके उलट यदि यह दोनों ग्रह नीच के हैं तो वह यौन उत्पीडन करने वाले रह सकते हैं। इस संयोजन का चतुर्थ भाव में होना एक और खतरनाक संकेत देता है। यदि यह दो ग्रह दशम भाव में संयोजित होते हैं अथवा उसपर दृष्टि भी डालते हैं तो व्यक्ति परिधान, आपराधिक न्याय, खदान, भूविज्ञान, शल्य चिकित्सा आदि के माध्यम से जीविकोपार्जन करेगा। सबसे शानदार बावर्ची और खानसामों की कुंडली में यह ग्रह संयोजन होता है, जिसका अर्थ हो सकता है कि ऐसे लोग होटल मैनेजमेंट, सौदर्य, फैशन,डिजाइन जैसे कार्यों के लिए सर्वथा उपर्युक्त होते हैं।

जब लग्न, चन्द्र या शुक्र से सप्तम भाव का स्वामी छठे या या अष्टम, सप्तम और अष्टम भाव में छठे , सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में स्थित हो तो वैवाहिक जीवन में समस्या का संकेत मिलता है।

तलाक सा अलगाव की भविष्यवाणी करने के लिए इस पर किसी भी प्रकार का प्रबल नकारात्मक प्रभाव होना चाहिए। यदी गुरु की दृष्टि इस संयोजन पर है तो शादी बच सकती है।

निष्कर्ष 

दोषों को काटने के लिए कुंडली मिलान प्रक्रिया के दौरान मंगल और शुक्र की स्थिति नवमांश एवं षोडशमांश में देखी जानी चाहिए। यदि दोष कट जाते हैं तो विवाह संभव है। इसके अतितिक्त उस समय व्यक्ति की दशाओं को भी विवाह का समर्थन करना चाहिए, अन्यथा आपके वैवाहिक जीवन में कई प्रकार की समस्याएँ आ सकती हैं।

मंगल और शुक्र ग्रह वैवाहिक जीवन में बेहतरीन आपसी-समझ, प्रेम तथा विश्वास को दर्शाता है। मंगल और गुरु दोनों ग्रह पुरुषों के लिए विवाह के कारक हैं और वहीं मंगल स्त्रियों के लिए विवाह का कारक होता है। यदि इन सब में से एक दूसरे के साथ एक ही राशि अथवा अगली-पिछली राशियों में है तथा दोनों के मध्य कोइ अन्य ग्रह उपस्थित नहीं है, तो यह एक कपल के मध्य बेहतर समझ को दर्शाता है। यदि मंगल शुक्र के पीछे है तो यह बताता है की पुरुष अपनी पत्नि को अधिक प्रेम करता है। एक-दूसरे की कुंडली में परस्पर पाए जाने वाले यह ग्रह परस्पर आकर्षण का संकेत भी देता है। उदहारण के लिए , यदि एक कुंडली में शुक्र कर्क राशि में स्थित है और वहीं दूसरी कुंडली में और मंगल मकर राशि में स्थित है तो यह पारस्परिक दृष्टि का एक उदाहरण है।

Leave a Reply