साल का सबसे बड़ा त्यौहार और सूर्य ग्रहण का साया

Surya Grahan

दीपावली देश के सबसे बड़े त्यहारों में से एक गिना जाता है। इस दिन का मुख्यतः सम्बन्ध भगवान् श्री राम से है और इस दिन देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए अधिकतर लोग प्रयासरत दिखाई देते हैं। भगवान राम से इसका सम्बन्ध यानि सूर्य ग्रह से इसका सम्बन्ध होना। ज्योतिष में भगवान् राम, सूर्य को प्रदर्शित करते हैं। अब यह कैसा अवसर आया है कि ठीक दिवाली यानि भगवान् राम के ही दिन, सूर्य को ग्रहण लगेगा। ज्योतिष में जब राक्षस ग्रह कहे जाने वाले राहु और केतु, सूर्य को अपने प्रभाव में ले लेते हैं तो ग्रहण लगता है। दिवाली से ठीक अगले दिन, केतु व सूर्य की समीपता के कारण सूर्य ग्रहण/Surya Grahan का निर्माण होगा।

पर क्या यह ग्रहण साल के इस सबसे बड़े त्यौहार की सार्थकता को हानि पहुंचाएगा? क्या इस बार लक्ष्मी पूजन होगा? क्या गोवर्धन पूजा करना उचित होगा ? ऐसे बहुत से अनसुलझे सवालों का जवाब पाने के लिए आगे पढ़ें –    

आखिर ज्योतिष में ग्रहण का क्या अर्थ है ?

सूर्य ग्रहण के प्रभाव को जानने से पहले ज्योतिष में इसके क्या मतलब है, को समझना बहुत ज़रूरी है। क्यों ग्रहण को अच्छा नहीं माना गया? खगोल शास्त्र में ग्रहण का अर्थ है सूर्य या चन्द्रमा के प्रकाश का धरती तक न पहुँच पाना। ज्योतिष विद्या में भी हम ग्रहण को इस प्रकार समझते हैं की जब सूर्य या चन्द्रमा, राहु-केतु के प्रभाव/Rahu Ketu ka Prabhav में आ जाएं। जब भी ऐसा होता है तो दोनों ग्रह यानि सूर्य व चन्द्रमा अपनी चमक खो देते हैं। ज्योतिष में सूर्य हमारी आत्मा और चन्द्रमा हमारे मन को दर्शाता है। जब मन व आत्मा किसी में भी उजाला न हो तो हमारे जीवन में उजाला कहा से आएगा ? यही कारण है कि कुंडली/Kundli में सूर्य व चन्द्रमा का राहु-केतु के साथ होने ग्रहण योग का निर्माण करता है जो बिलकुल भी अच्छा नहीं माना गया है। 

Surya Grahan

ऐसे व्यक्ति को नकारात्मकता घेरे रखती है और वह सदैव ही किसी न किसी विवाद में फंसा रहता है। उसे मान-सम्मान की प्राप्ति नहीं होती और उसे रूपये-पैसे की हमेशा कमी बनी रहती है। ज्योतिष में राहु-केतु का सम्बन्ध सूर्य चन्द्रमा से हो तो यह ग्रहण दोष के साथ साथ पितृ दोष/Pitra Dosha का भी निर्माण करता है। दोनों ही दोष जीवन में कठिनाई उत्पन्न करने वाले माने गए है। अतः कुंडली में बना ग्रहण योग/Kundli me Grahan Yoga सदैव दुखप्रदायक है।

एक अलग नज़रिये से देखें तो ग्रहण योग गहरी आध्यात्मिक समझ भी देता है जो यदि सही तरीके से उपयोग में लायी जाये तो व्यक्ति को जीवन में बहुत अधिक आध्यात्मिक उन्नति भी दे सकती है।      

कब है सूर्य ग्रहण ?

साल 2022 में 24 अक्टूबर को कार्तिक अमावस्या तिथि शाम 5:29:35 से प्रारम्भ होगी और अगले दिन अक्टूबर 25, 2022 को सांय 4:20:38 तक रहेगी। दीपावली का त्यौहार 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। सूर्य ग्रहण, दिवाली के अगले दिन यानि 25 अक्टूबर को लगेगा। हालांकि यह साल का पहला सूर्यग्रहण होगा जो भारत में दिखाई देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिष के अनुसार, यह साल का दूसरा सूर्य ग्रहण है जो सूर्य देवता के तुला राशि में/Tula Rashi me Surya विराजमान रहने के समय बनेगा। ऐसे में इस राशि के व्यक्ति के जीवन पर इस ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। सूर्य ग्रहण लगभग 4 घंटे 3 मिनट का रहेगा। इस ग्रहण का दिवाली पर तो नहीं पर गोवर्धन पूजा/Govardhan Puja पर अवश्य प्रभाव पड़ेगा।  

कब से कब तक रहेगा सूर्य ग्रहण का सूतक काल 

ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रहण/Surya Grahan शुरू होने के लगभग 12 घंटे पहले से ही सूतक लग जाता है। इस अवधि के दौरान मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और कोई भी धार्मिक कार्य जैसे पूजा-पाठ आदि नहीं किए जाते हैं। लेकिन यदि इस दिवाली पर पड़ने वाले सूर्य ग्रहण/Surya Grahan की बात करें तो सूतक काल इतना प्रभावी नहीं होगा और लोग अपनी दिवाली पूजा को यथा विधि संपन्न कर पायेंगें।    

क्या इस दिवाली पर सूर्य ग्रहण का रहेगा साया?

दिवाली से अगले दिन लगने वाले सूर्य ग्रहण/Surya Grahan ने सभी लोगों को दुविधा में डाल दिया है कि वे कैसे इस सबसे बड़े त्यौहार को सही तरीके से मना पायेंगें? पर जैसा कि बताया गया है कि सूर्य ग्रहण का सूतक काल दिवाली पूजा/Diwali Puja 2022 में व्यवधान उत्पन्न नहीं करेगा और इसका कोई भी बुरा साया दिवाली की पूजा व उल्लास पर नहीं पड़ेगा। दिवाली के आस-पास ग्रहण का माहौल ज़रूर रहेगा पर इसका कोई भी दुष्प्रभाव त्यौहार पर नहीं देखा जा सकेगा।   

यह सूर्य ग्रहण मुख्यतः यूरोप, नोर्थ-ईस्ट अफ्रीका, साउथ-वेस्ट एशिया और अटलांटिक में दिखाई देगा। इसके बाद नवंबर में चंद्र ग्रहण/Lunar Eclipse लगेगा जो साल का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। यह चंद्र ग्रहण 7-8 नवंबर को लगेगा। साल 2022 में चार ग्रहण लगेंगे जिनमें दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण शामिल हैं। ऐसा बीते वर्ष 2021 में हुआ था जब चार ग्रहण लगे थे।

दिपावली का शुभ मुहूर्त

दिवाली का शुभ मुहूर्त: 24 अक्टूबर को सांय 5 बजकर 28 मिनट से शुरू होकर 25 अक्टूबर शाम 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। 

 

महानिशीथ काल: दिवाली पर महानिशीथ काल भी लग रहा है, यह काल तंत्र-पूजा के लिए बहुत अच्छा कहा गया है। यह महानिशीथ काल 24 अक्टूबर को रात्रि 10 :55 से लेकर 25 अक्टूबर रात्रि 1:53 तक रहेगा। 

 

प्रदोष व्रत तिथि एवं शुभ मुहूर्त: दिवाली के दिन प्रदोष व्रत/Pradosh Vrat भी रखा जाएगा जिसकी पूजा का समय शाम 5:50 से लेकर रात 8:22 तक है।

क्या ग्रहण के साये में होगी गोवर्धन पूजा

सूर्य ग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा व भाई दूज 26.10.22, बुधवार को मनाई जाएगी। 

हिन्दू पंचांग/Panchang के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, बलि पूजा व गौ क्रीड़ा का पर्व मनाया जाता है। परन्तु यदि प्रतिपदा को चंद्र दर्शन हो तो ये पर्व अमावस्या को ही मनाये जाते हैं। इस वर्ष यानि 2022 को चंद्र दर्शन हो जायेंगें जिसके कारण भाई दूज, और गोवर्धन पूजा का पर्व अमावस्या को होना चाहिए लेकिन उस दिन सूर्य ग्रहण है। और सूर्य ग्रहण/Surya Grahan का सूतक काल सूर्योदय पूर्व ही लग जायेगा। 

यही कारण है कि ये सभी पर्व अमावस्या/Amavasya को नहीं मनाये जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में समस्त शास्त्रीय नियमों को ध्यान में रखते हुए भाई दूज/Bhai Dooj, गोवर्धन पूजा, अन्नकूट पूजा/Annakut Puja व गौ क्रीड़ा के पर्व बुधवार को यानि 26.10.22, बुधवार को मनाये जायेंगें। ऐसा करना ही शास्त्र सम्मत है। 

सूर्य ग्रहण के प्रतिकूल प्रभाव का असर कम करने के लिए कुछ उपाय 

सूर्यग्रहण के तुरंत बाद सूर्य से संबंधित वस्तुएं जैसे गेहूं, गुड़, मसूर दाल, ताम्बा आदि दान करना शुभ माना गया है। आदित्यहृदयस्त्रोत का पाठ करने से ग्रहण के दुष्प्रभाव नष्ट होते हैं।

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