मुहूर्त क्या होता है और क्यों पड़ती है इसकी आवश्यकता

मुहूर्त लगभग दो घड़ी अर्थात 48 मिनट का माना गया है। एक सामान्य रूप में अमृत मुहूर्त बेला और ब्रह्म मुहूर्त बहुत उत्तम फल देने वाले बताए गए हैं। मुहूर्त शास्त्र ज्योतिष का प्रमुख अंग है। मुहूर्त के लिए कहा भी गया है कि – “चतुर्भि: कारयेत्कर्म सिद्धिहेतोर्विचक्षण:। तिथिनक्षत्रकरणमुहूर्तेनेति निश्चय: ” अगर सफलता चाहते हो तो तिथि/Tithi, नक्षत्र/Nakshtra, करण/Karn और मुहूर्त/Subh Muhrat का विचार करके ही अपने कार्य को करना चाहिए।

मुहूर्त का शास्त्रोक्त महत्व

हिंदू पंचांग गणना में मुहूर्त का विशेष स्थान रहा है। मुहूर्त चिंतामणि, मुहूर्त पारिजात, धर्म सिंधु, निर्णय सिन्धु, मुहूर्तमार्तण्ड, मुहूर्तमुक्तावली, बृहत्संहिता अथवा अन्य ज्योतिष शास्त्र इन सभी में मुहूर्त को लेकर कुछ न कुछ विशेषता को दर्शाया है। ज्योतिष शास्त्र में मुहूर्त पर विशेष बल दिया गया है। एक शुभ मुहूर्त/Subh Muhurat आपके जीवन की दिशा को बदल सकता है। आपके जीवन में सुख समृद्धि और हर वो चीज आ सकती है जिसकी आपको इच्छा रही हो। धर्म ग्रंथों में महाभारत हो या रामायण या उपनिषदों का ज्ञान इन सभी में मुहूर्त की शुभता और उसकी अशुभता के फलों को विस्तार से दर्शाया गया है।

क्यों पड़ती है एक शुभ मुहूर्त की आवश्यकता

मुहूर्त यानी किसी काम को करने का सबसे अच्छा समय जो हमारे काम को बेस्ट बनाता है। अगर आप ने अभी तक मुहूर्त को नहीं समझा है तो आप ने बहुत सी चीजों को उस तरह से नहीं पाया है जिस रुप में वो आप को मिल सकती थी, लेकिन अभी भी देर नहीं हुई है क्योंकि आपके जीवन में अभी भी बहुत कुछ ऎसा है जो एक अच्छे मुहूर्त के उपयोग से बदला जा सकता है और आप अपने जीवन में खुशी और सुख का अनुभव कर सकते हैं। एक अच्छा ज्योतिषी ही एक शुभ समय का निर्धारण करना जानता है इसलिए ध्यान रखें की आप किसी कुशल और योग्य ज्योतिषी/Best Astrologer को ही इस कार्य के लिए चुनें।

शुभ और अशुभ मुहूर्त से जुड़े पौराणिक एवं आधुनिक संदर्भ

वेदों के निर्माता वेदव्यास के जन्म की कथा हो, प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप का जन्म या रावण के जन्म समय का वर्णन, राम सीता विवाह हो या फिर भगवान शिव द्वारा लंका का निर्माण इन सभी का संबंध मुहूर्त से किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ है और इन सभी के विषय में पौराणिक आख्यानों में विस्तार से दिया गया है।

वेद व्यास जी का शुभ समय जन्म होना वेदों के निर्माण का कारण बना और कहां रावण एवं प्रह्लाद के पिता के जन्म का अशुभ समय पर होना विनाश और कष्ट का कारण बना। इसी तरह एक शुभ मुहूर्त में भास्कराचार्य की पुत्री लीलावती का विवाह न हो पाना उसके दांपत्य सुख की हानि का कारण भी बना। इसके अतिरिक्त भारत की आजादी का समय भी मुहूर्त काल से जुड़ा हुआ है जिस कारण अर्ध रात्रि का समय भारत की स्वतंत्रता के लिए चुना गया जो आज भी प्रासंगिक है।

मुहूर्त नहीं है अंधविश्वास जाने इसका वैज्ञानिक महत्व


वैदिक ज्योतिष शास्त्र में उपयोग की जाने वाली गणनाओं द्वारा समय का वह निश्चित भाग जो किसी कार्य की शुभता को पाने और उसे बढ़ाने के लिए उपयोग होता है वह मुहूर्त होता है। मुहूर्त, पंचांग गणना द्वारा निर्मित किया जाता है और यह पंचांग के पांच अंगों/Five limbs of Panchang तिथि, वार, नक्षत्र/Nakshatra, योग और करण के द्वारा निर्मित होता है। वैदिक ज्योतिष/ Vedic Astrology में किसी भी शुभ काम का आरंभ करने हेतु शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। कई लोग तो छोटी से छोटी बातों के लिए भी मुहूर्त को विशेष महत्व देते हैं और इसके पीछे का कारण उनका अंधविश्वास नही है बल्कि उनकी आस्था और उनका विश्वास मुहूर्त शास्त्र की अहमियत को जानता है।

मुहूर्त का अर्थ सकारात्मकता को पाना है। यह सिर्फ ज्योतिष नहीं है यह विज्ञान भी है। जिस प्रकार एक बेहतर कार्य को करने के लिए हमें ऊर्जा का सकारात्मक रुप चाहिए होता है उसी प्रकार जीवन में शुभता और समृद्धि पाने के लिए शुभ मुहूर्त/Shubh Muhrat का होना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जैसा की हम सभी ने सुना है कि ब्रह्म मुहूर्त  में उठना और साधना करना बहुत उत्तम होता है, इसका कारण यह होता है कि उस विशेष समय में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, प्रकृति एवं काल की स्थिति अपने एक परिष्कृत समय पर होती है और शुभ फल को प्रदान करने में बहुत सहायक बनती है।

शुभ मुहूर्त घड़ी बदल सकती है आपकी किस्मत

एक शुभ मुहूर्त में किया गया काम बिना अवरोध के पूर्ण होता है, कार्य में सफलता की प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। ज्योतिष में होरा स्कंध एवं जन्म कुण्डली यह सभी मुहूर्त पर आधारित होते हैं। संतान जन्म में भी मुहूर्त की विशेष भूमिका है जिसका उल्लेख हमने वेदव्यास के जन्म से जाना है। पंचांग में तिथि नक्षत्र वार करण एवं योग की गणनाएं करके शुभ और अशुभ समय मुहूर्तों का निर्माण किया जाता है। मुहूर्त का उपयोग कई रूपों में किया जाता है।

सोलह संस्कारों में मुहूर्त का महत्व


भारतीय संस्कृति में मौजूद षोडश संस्कार जिसमें विवाह, गर्भाधान, नामकरण से लेकर अन्त्येष्टि संस्कार कर्म इन सभी में मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। इन सभी संस्कारों को करने में किसी न किसी रूप में मुहूर्त को उपयोग में लाया जाता है। इन संस्कार एवं विशिष्ट कार्यों के अतिरिक्त अन्य कार्य भी मुहूर्त की सार्थकता को प्रकट करते हैं।

जानिए क्यों जरूरी है शुभ मुहूर्त/Importance of Shubh Muhrat

कई बार हम कुछ ऐसी चीजें खरीदते हैं जो हमारे लिए बहुत जरूरी होती है और उसके लिए हमने बहुत मेहनत भी की होती है लेकिन गलत समय पर खरीद लेने के कारण हम उसका लाभ नहीं उठा पाते हैं और हमें लाभ के बदले नुकसान झेलना पड़ जाता है। जैसे आपने कोई नई गाड़ी खरीदी लेकिन अगले ही दिन उसमें कोई प्रॉब्लम हो गई या कोई नया इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदा और वो घर आने पर खराब निकला,  कोई जरूरी काम करने के लिए आप बाहर निकले लेकिन रास्ते में ही आप को वापस आना पड़ा और आपका काम अधूरा ही रह गया। ऐसे न जाने कितने उदाहरण आप देख सकते हैं और इन सभी की एक मुख्य वजह शुभ समय मुहूर्त का चयन न कर पाना है। इसलिए आप जो भी काम करते हैं। उसके लिए समय की शुद्धि और शुभ मुहूर्त का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।  शुभ मुहूर्त के लिए आप पंचांग देख सकते हैं। पंचांग को पढ़ना कोई मुश्किल कार्य नहीं है। यदि आपको इसे पढ़ने में समस्या आ रही है तो आप एक अच्छे ज्योतिषी/Astrologer से मिल सकते हैं।

Leave a Reply