इस शारदीय नवरात्रि बनेंगे पांच विशेष योग

Shardiya Navratri 2022

Shardiya Navratri 2022: यह तो हम सभी जानते हैं कि श्राद्ध पक्ष के समाप्त होते ही साल के सबसे शुभ दिन यानि नवरात्रों की शुरुआत होती है। वर्ष 2022 में नवरात्रि 26 सितम्बर से शुरू हो रहे हैं। इस शारदीय नवरात्रि पर होगा ग्रहों का चतुर्ग्रही योग, यह अत्यंत ही शुभ स्थिति है। आपको बता दें कि नवरात्रि पूरे साल में कुल चार बार आते हैं। दो प्रत्यक्ष और दो गुप्त। शारदीय व चैत्र नवरात्रि/Chaitra Navratri को प्रत्यक्ष नवरात्रि कहा गया है और आषाढ़ व माघ महीने में गुप्त नवरात्रि आते है। शारदीय नवरात्रि 2022/Shardiya Navratri 2022 अपने आप में बहुत अधिक विशिष्ट है और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यधिक विशेष हैं। नवरात्रि के प्रारम्भ में ही शुभ ग्रहों के चतुर्ग्रही योग के कारण इस बार नवरात्री हर मनोकामना को पूर्ण करने वाले व हर परेशानी को हर लेने वाले सिद्ध होंगें। आइयें जानें कैसे आप इस विशिष्ट योग का फायदा उठा अपने जीवन में सुख व समृद्धि को आमंत्रण दे सकते हैं।

आपके जीवन में क्या दे सकता है ग्रहों का चतुर्ग्रही योग का निर्माण ?   

ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति के आधार पर ही अच्छे व बुरे समय का विश्लेषण किया जाता है। कुंडली/Kundli के किसी एक घर में दो या दो से अधिक ग्रहों का होना एक अत्यंत विशिष्ट स्थिति को दर्शाता है। इस शारदीय नवरात्री दो- तीन नहीं बल्कि चार -चार ग्रह एक साथ कन्या राशि में चतुर्ग्रही योग का निर्माण करेंगें। नवरात्री अपने आप में ही अत्यंत शुभ है और जब इनकी शुरुआत आकाश में बने अत्यंत शुभ योग से होगी तो ये नवरात्री, माता के भक्तों को क्या कुछ नहीं दे जायेंगें ? 

आकाश में कन्या राशि जो बुध ग्रह की स्व व उच्च राशि कही गयी है, में स्वयं बुध, सूर्य, शुक्र व चन्द्रमा मिलकर चतुर्ग्रही योग बनायेंगें। शुक्र ग्रह कन्या राशि में/Kanya Rashi me Shukra नीच के होते हैं लेकिन बुध के साथ होने की स्थिति में नीच भंग राजयोग का निर्माण होगा और शुक्र अत्यंत ही शुभ फल देने वाले ग्रह बन जायेंगें। शुक्र ग्रह, माता लक्ष्मी को भी दर्शाते है और माता के दिनों में ही इनका नीच भंग हो जाना इन्हें लक्ष्मी-प्रदायक ग्रह बनाता है। वहीँ सूर्य व बुध बुधादित्य योग/Budhaditya yoga का निर्माण करेंगें जो बुद्धि प्रदायक योग है। शुक्र सभी प्रकार के ऐशो-आराम व समृद्धि को दर्शाते हैं और वहीँ बुद्ध, सद्बुद्धि व वाक्पटुता के स्वामी है। अब ऐसे में बुद्धि व ऐश्वर्य का संगम बहुत ही आलौकिक व अनूठा अवसर है। 

चन्द्रमा भी एक स्त्री ग्रह है और अन्य स्त्री ग्रह यानी शुक्र के साथ इनकी निकटता माता के आशीर्वाद को भली-भाँती दर्शाती है। शारदीय नवरात्रि 2022/Shardiya Navratri 2022 अवश्य ही माता की कृपा सच्चे भक्तों तक पहुंचाने में सर्वथा शुभ साबित होंगें। ऐसा माना जा रहा है कि इस बार नवरात्रि संतान की शिक्षा और स्त्रियों के लिए धन प्राप्ति के विशेष अवसर प्रदान करेंगे। 

शारदीय नवरात्री 2022 में चतुर्ग्रही योग के साथ-साथ मिलेगा सर्वार्थसिद्धि योग का भी साथ 

ऐसा लग रहा है कि माता दुर्गा इस बार अत्यंत ही प्रसन्न हैं। इस बार शारदीय नवरात्री 2022/Shardiya Navratri 2022 में 29 व 30 सितंबर बनने वाले सर्वार्थ सिद्धि योग से भी भक्तों को अपरम्पार कृपा प्राप्त होगी। इस योग में की गई साधना विशेष फलप्रदायी है। हिन्दू पंचांग/Hindu Panchang के अनुसार सर्वार्थसिद्धि योग 29 सितंबर की मध्यरात्रि से शुरू होकर, अगले दिन 30 सितंबर की सम्पूर्ण रात्रि तक रहेगा।  

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि 2022/Shardiya Navratri 2022 बस अब आने ही वाले हैं ऐसे में ज़रूरी है कि आप नवरात्रि के पहले दिन/First Day Navratri (प्रतिपदा तिथि) की जाने वाली घट स्थापना के बारे में आवश्यक जानकारी प्राप्त कर लें। मां दुर्गा को समर्पित नवरात्रि 26 सितंबर, सोमवार से शुरू होकर 4 अक्टूबर, मंगलवार तक समाप्त होंगें। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी 26 सितंबर को घटस्थापना की जाएगी। 

  • प्रतिपदा तिथि – सितम्बर 26, 2022 को दोपहर 03:23 प्रारम्भ – सितम्बर 27, 2022 को दोपहर 03:08 तक समाप्त। 
  • घटस्थापना दिन – सोमवार, सितम्बर 26, 2022 
  • घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 06:11 से लेकर सुबह 07:51 तक 
  • समय काल – 01 घंटा 40 मिनट
  • अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:48 से लेकर दोपहर 12:36 तक 
  • समय काल – 48 मिनट

नौ दिनों तक देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा 

नवरात्रि/Navratri पर देवी के नौ रूपों की पूजा और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है। माता के विभिन्न रूपों की पूजा कर व उन्हें उनका प्रिय भोग चढ़ा कर सभी देवियों की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है।    

पहला दिन (प्रतिपदा) – मां शैलपुत्री

भोग – मां शैलपुत्री को सफेद चीज़ें जो गाय के घी में बनी हों का भोग लगाने से रोगों से मुक्ति मिलती है।  

दूसरा दिन (द्वितीया)- मां ब्रह्मचारिणी

भोग- मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, पंचामृत और चीनी का भोग लगाने से दीर्घायु प्राप्त होती है।  

तीसरा दिन (तृतीया)  – मां चंद्रघंटा

भोग – मां चंद्रघंटा को दूध व उससे बनी चीजों का भोग लगाने से सभी दुखों का नाश होता है।  

चौथा दिन (चतुर्थी) – मां कुष्मांडा

भोग – मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाने से बौद्धिक विकास होता है।   

पांचवां दिन (पंचमी) – मां स्कंदमाता

भोग – मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है।  

छठा दिन (षष्ठी)- मां कात्यायनी

भोग – मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाने से सुन्दर व्यक्तित्व की प्राप्ति होती है।  

सांतवां दिन (सप्तमी) – मां कालरात्रि

भोग – मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाने से व्यक्ति शोकमुक्त होता है 

आठवां दिन (अष्टमी)- मां महागौरी

भोग- मां महागौरी को हलवे का भोग लगाने से सभी मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं। 

नौवां दिन (नवमी) – मां सिद्धिदात्री

मां सिद्धिदात्री को विभिन्न प्रकार के अनाजों का भोग जैसे- हलवा, चना, पूरी आदि का भोग लगाने से जीवन में सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।   

शारदीय नवरात्रि पूजा विधि 

  • सर्वप्रथम ब्रह्म मुहूर्त स्नान करें।  
  • मंदिर को साफ करें और कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालें और उसमें जौ बोएं। 
  • इसके बाद एक तांबे का कलश लेकर उस पर कलावा बांधें व रोली से स्वास्तिक बनाएं। 
  • कलश में गंगाजल व जल भरें और इसमें दूर्वा, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें।   
  • कलश पर अशोक या आम के पांच पत्ते सजाएं।   
  • इसके बाद नारियल को लाल कपड़े से बांधकर कलश पर रख दें।  
  • नौ व्रतों को रखने का संकल्प लें व माता के नाम की अखंड ज्योति जलाएं।

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