शनि जयंती 2020: जानें कैसे खत्म होगी शनि की सनसनी और दूर होंगे शनि के सभी दोष

Shani Jayanti 2020

ज्योतिष में जब कभी भी शनि की बात होती है तो अक्सर डरते हुए उन्हें एक शत्रु के रूप में देखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ थोड़े से उपाय, थोड़ी सी पूजा, थोड़ी साधना और थोड़ा सा कर्म करके आप उनकी कृपा पा सकते हैं। जी हां, शनि को मनाने का सबसे बड़ा पावन पर्व है शनि जयंती जो इसी मई माह की 22 तारीख को पड़ने जा रहा है। इस दिन यदि आप चाहें तो अपनी राशि के अनुसार शनिदेव के उपाय करके उन्हें अपना मित्र बना सकते हैं। उनका आाशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। शनि की पूजा करने से पहले ये जरूर जान लें कि आपकी कुंडली में शनिदेव की क्या स्थिति है और उनसे जुड़े  दोष के लिए आपको क्या विशेष साधना—अराधना करनी है।

शनि दोष दूर करने का महाउपाय जानने के लिए यहां क्लिक करें

किसी भी जातक की कुंडली में शनि की स्थिति काफी मायने रखती है। गौरतलब है कि इस समय शनिदेव अपनी ही मकर राशि में चल रहे हैं। 11 मई से 29 सितंबर तक शनि उलटी चाल चलेंगे। शनि की इस उलटी चाल का निश्चित रूप से सभी 12 राशियों पर बड़ा असर पड़ेगा। जिसे जानने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके अपनी राशि पर शनि की वक्री चाल का असर जान सकते हैं।

बजरंगी की पूजा से दूर होगा शनि दोष

कलयुग में ऐसी कोई समस्या या संकट नहीं है जिसका समाधान बजरंग बली की पूजा—साधना से न निकलता हो। इस कोरोना काल में आपके उपर शनि का संकट हो या फिर कोई दूसरी परेशानी हनुमत साधना से जरूर दूर हो जाएगी। शनि के संकट से बचने के लिए शनि जयंती या फिर शनिवार के दिन श्री हनुमान चालीसा का सात बार पाठ करें। साथ ही बंदरों को गुड़—चना और केला खिलाएं। यदि बंदर न मिले तो श्री हनुमान जी के मंदिर में इसे प्रसाद रूप में चढ़ा सकते हैं। इस महाउपाय निश्चित रूप से चमत्कारिक लाभ होगा। संभव हो तो शनिवार को काले कुत्ते को तेल की चुपड़ी रोटी खिलाएं। शनि जयंती या फिर शनिवार के दिन काले घोड़े की नाल विधि—विधान से पूजा करके दरवाजे पर लगाएं।

शनि जयंती पर विशेष पूजा से दूर करें शनि की वक्री चाल के बुरे प्रभाव

शनि की साढ़े साती या ढैय्या का महाउपाय

  • शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटें।
  • सूत लपेटते समय शनि देव का ध्यान करें या फिर उनका मंत्र जपें।
  • इसके बाद पीपल देवता की पूजा करें एवं दीप जलाएं।
  • शनिवार के दिन एक समय नमक का त्याग करें।
  • शनि जयंती पर किसी गरीब, अपाहिज (चूंकि शनि स्वयं दिव्यांग हैं, इसलिए किसी दिव्यांग व्यक्ति को दान  करने पर विशेष लाभ मिलेगा।) को शाम के समय शनि संबंधित वस्तुएं दान में दें।
  • शनि का दुष्प्रभाव दूर करने के लिए शनि जयंती के दिन राजा दशरथ विरचित शनि स्तोत्र का पाठ अथवा इन मंत्रों का जाप करें— (1) सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्षः शिव प्रियः। मंदाचारह प्रसन्नात्मा पीडां दहतु में शनिः।।’ (2) ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम:’

कुंडली में शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती के बारे जानने के लिए यहां क्लिक करें

शनि के साधक न करें ये भूल

कुंडली में शनि से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए की जाने वाली पूजा में आपको कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए। कभी भूलकर भी शनि की मूर्ति के ठीक सामने खड़े होकर पूजा न करें क्योंकि उनकी दृष्टि से जीवन में परेशानियां बढ़ती हैं। ऐसे ही शनिदेव को लाल रंग के फूल कभी भी न चढ़ाएं। ऐसा करने पर शनिदेव नाराज हो जाते हैं क्योंकि ज्योतिष में मंगल और शनिदेव के बीच शत्रुता है। शनि के साधक को भूलकर भी मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि आप शनिदोष से पीड़ित हैं तो भूलकर भी कमजोर एवं मजदूर वर्ग को नाराज न करें। ध्यान रखें यदि आप के ऊपर शनि अशुभ दशा चल रही हो तो न तो भवन निर्माण करें और न ही नया मकान खरीदें। अन्यथा आपको काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ सकता है।

शनि की वक्री चाल का अपनी राशि पर प्रभाव जानने के लिए यहां पर क्लिक करें

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