Ram Navami: महत्व, कथा और पूजन विधि से पाए भगवान राम की विशेष कृपा

Ram Navami

हिंदू संस्कृति में प्रत्येक पर्व का बहुत अधिक महत्व है। श्री राम नवमी का पर्व भगवान श्रीराम के जन्मदिवस के रूप में मनाने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार यह त्यौहार चैत्र मास, शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। भारतीय परंपरा में राम नवमी के पर्व को बेहद खास माना गया है। क्योंकि इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ के यहां हुआ था। इस पर्व पर प्रत्येक घर व मंदिर में भगवान श्रीराम की पूजा विधिवत ढंग से की जाती है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार इस दिन भक्तिपूर्वक प्रभु श्री राम व मां सीता जी की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बढ़ती है। 

वर्ष  में चार बार आने वाले मां दुर्गा जी के नवरात्रों में से चैत्र माह की नवरात्रि बेहद खास मानी जाती है। इन दिनों में देवी के नौ विशेष स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के अंतिम दिन राम नवमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन छोटी-छोटी कुमारी कन्याओं को घर पर आमंत्रित करके कन्या जिमाने की परंपरा है। तो चलिए अब आपको बताते हैं रामनवमी/Ram navni 2022 की तारीख, पूजन विधि और मुहूर्त के बारे में। 

राम नवमी 2022 में कब मनाई जाएगी?

इस वर्ष रामनवमी का यह पावन पर्व 10 अप्रैल 2022, रविवार के दिन मनाया जाएगा।

राम नवमी 2022 पूजन मुहूर्त

राम नवमी पूजन मुहूर्त – प्रातः 11:06 से दोपहर 01:39 तक

नवमी तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 10, 2022 को प्रातः 01:24 से  

नवमी तिथि समाप्त – अप्रैल 11, 2022 को प्रातः 03:16 तक  

राम नवमी पूजन विधि

इस पावन दिन पर प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

घर के मंदिर या पूजा स्थल की ठीक प्रकार से साफ-सफाई करें।

अब हाथ में अक्षत व गंगाजल लेकर व्रत और पूजन करने का संकल्प लें।

 अब प्रभु श्रीराम और माता सीता की पूजा प्रारंभ करें।

पूजन में रोली, शुद्ध घी या तेल का दीपक, धूपबत्ती, गंगाजल, पुष्प, पंचफल, पंचमेवा आदि का प्रयोग करें। 

श्री हरि विष्णु जी को तुलसी पत्र अत्यंत प्रिय है और भगवान राम श्री विष्णु के ही अवतार हैं इसलिए पूजा करते समय उन्हें तुलसी जी अवश्य अर्पित करें।

पूजा के दौरान श्री रामचरितमानस, रामायण, श्री राम चालीसा और श्री रामरक्षा स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है।

 पूजा के अंत में विधि पूर्वक भगवान राम व माता सीता की आरती उतारकर अपनी मनोकामना पूर्ण होने के लिए प्रार्थना करें।

अंत में आरती करके अपनी मनोकामना की पूर्ति हेतु प्रार्थना करें।

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