राहु और मंगल की युति का फल क्या है?

मंगल और राहु

राहु के साथ मंगल का होना काफी कठोरता और उग्रता को दिखाता है। राहु और मंगल का असर अग्नि युक्त ग्रहों के योग की स्थिति का समय होता है। यह दोनों ही ग्रह ज्योतिष शास्त्र में कठोर ग्रहों में स्थान पाते हैं जिनका गुण कुछ उग्र फलों का प्रभाव दिखाता है। राहु का असर ज्योतिष में अस्थिरता, उद्वेग, धुएं से भरे वातावरण बेचैनी का होता है। वहीं मंगल ज्योतिष में उग्र आक्रामक तीव्र ग्रह माना जाता है। राहु और मंगल का जन्म कुंडली में/Janam Kundli me Rahu Mangal एक साथ होना या फिर ग्रह गोचर में एक साथ आना दोनों ही मामले गहरे परिणाम देने वाला होता है। यह युति योग ज्योतिष में खराब योगों की श्रेणी में स्थान पाता है। इस योग का असर व्यक्ति में असंतोष, विद्रोह, उत्पात के मसले उत्पन्न करने वाला होता है।

राहु के साथ मंगल के होने एवं युति योग गहराई से समझने के लिए जरुरत है की हम इन दो ग्रहों की प्रकृति को समझें। इन ग्रहों के गुण शुभ अशुभ फलों को जानकर समझा जा सकता है की ये दोनों जब मिलेंगे तो ये कैसा असर देने में सक्षम होंगे।

राहु ग्रह: राहु दिशाओं में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाला ग्रह है। आलस्य, विलंब और काम में बाधा उत्पन्न करने वाला होता है। ज्योतिष अनुसार राहु एक छाया ग्रह जिसका भौतिक अस्तित्व नहीं है। यह क्रुर, कठोर, तपिश युक्त, रहस्यमय, गूढ,  आध्यात्मिक सोच का प्रतीक बनता है। राहु को चंद्रमा और सूर्य को ग्रहण लगाने वाला कहा गया है। यह जहां मौजूद होता है वहां भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर देने में सक्षम होता है। जिस भी भाव में मौजूद होता है वहां के फलों पर भी ग्रहण लगाने का कार्य कर सकता है। भाव राशि या ग्रह के साथ होने पर यह अपना अलग ही रुप दिखाता है और उनके कारक तत्वों को समाप्त करने की कोशिश करता है। राहु गलत सही के निर्णय को स्पष्ट नहीं होने देता है। हर ओर इसका छ्द्म जाल मौजूद रहता है और जब इसके नजदीक कोई आता है तो वह इसके अनुसार काम करने लग सकता है।

मंगल ग्रह: मंगल सेनानायक है, ज्योतिष अनुसार मंगल की प्रवृत्ती तीव्र होती है। साहस, पराक्रम मंगल के गुण हैं। मंगल अग्नि तत्व युक्त ग्रह है लाल रंग का ओर रक्त में इसकी शक्ति मौजूद होती है। स्वाभिमान एवं आत्मसम्मान मंगल के विशेष गुण भी होते हैं। यह जहां मौजूद होता है वहां उत्साह एवं शक्ति को दिखाने वाला होता है। मंगल व्यक्ति को जल्द से फैसले लेने के लिए तैयार करने वाला होता है। काम में देरी न करना, मुश्किलों से लड़ना मंगल की खासियत है। मंगल अपनी मजबूत स्थिति में दुनिया को बदल देने की ताकत रखता है। जल्द और निर्णायक स्थिति को पाने की चाह मंगल ग्रह से प्राप्त होती है।

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राहु मंगल युति परिणाम प्रभाव 

अब जब इन दोनों के गुणों को देखें तो एक में आगे बढ़ने की जो तेजी है वहीं दूसरे में भी है। एक क्रूर, कठोर है तो दूसरा उससे दो कदम आगे रहने वाला है। ऐसे में जब ये दोनों साथ आते हैं तो स्वाभाविक रुप से इन गुणों में वृद्धि कर देंगे। अब क्रोध और उत्तेजना कितनी उचित है और कितनी अनुचित इस प्रश्न को समझ पाना मुश्किल नही होगा। इसलिए इन दोनों का एक साथ होना काफी गंभीर असर दिखाता है और जो असर पड़ता है उसकी लम्बे समय तक छाप भी देखी जा सकती है। पर अगर बात की जाए इसके दूसरे पक्ष की तो कई बार कठोर होना लाभ भी दिलाता है। कहा भी गया है भय बिना प्रीति नहीं है तो ये कुछ ऎसा ही योग है जो अपनी नकारात्मकता के असर में भी कुछ तो अलग दिखाता है।

राहु मंगल का युति योग बनाता है अंगारक योग 

ज्योतिष शास्त्र में राहु और मंगल का एक साथ होना/Rahu and Mars together अंगारक नामक योग से जाना जाता है। यह दोनों ही विकट अग्नि तत्व युक्त स्थितियों को बनाते हैं इसलिए इन दोनों के एक साथ होने पर अंगारक जैसा असर देखने को मिलता है। अब ये योग वैसे तो अशुभ योगों की श्रेणी में स्थान पाता है लेकिन इसके अपने कुछ अच्छे प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। इस योग को व्यक्ति के लिए संघर्ष की अधिकता करने वाला माना जाता है। इसके असर से व्यक्ति के भीतर गुस्सा अधिक रह सकता है। जातक स्वभाव से कुछ अधिक सख्त भी हो सकता है। मनमानी करने में आगे रह सकता है। इस योग का असर जातक के रिश्तों पर भी देखने को मिलता है। व्यक्ति में लड़ाकू प्रवृत्ति अधिक रह सकती है।

 

राहु-मंगल के युति योग का निर्माण कुंडली के जिस भाव में/Kundli me Rahu Mangal Yoga होता है उस भाव से संबंधित फलों पर इसका असर पड़ता है। भाव फल एवं कारक तत्व में कमी देखने को मिल सकती है। व्यक्ति को अपने जीवन में उस भाव से संबंधित अधिक परेशानियां भी झेलनी पड़ सकती हैं।

राहु मंगल युति का फल कब और कैसे मिलता है ?

राहु और मंगल यदि अनुकूल स्थिति व भाव राशि में हों तो सकारात्मक परिणाम देने में सक्षम होते हैं। इन दोनों का साथ अशांत स्थिति का परिचायक होता है लेकिन फिर भी ये सफलताओं और उपलब्धियों को दिलाने में भी सहयोगात्मक हो सकता है। इन दोनों का योग होने पर व्यक्ति को अधिक सतर्क-सजग रहने की आवश्यकता होती है क्योंकि उत्साह एवं जोश दिशाहीन होता है। अब अगर हम अपनी शक्ति को उचित जगह पर नहीं लगा पाते हैं तो हम स्वयं के लिए ही परेशानियां उत्पन्न कर सकते हैं। व्यक्ति में आक्रामकता का गुण होता है अतः: यदि इस गुण को सही स्थान पर लगाया जाए तो बशर्ते ये काफी कमाल के असर दिखाने वाला हो सकता है।

 

वैदिक ज्योतिष में यह योग/Yoga हमारे सुख दुख को दर्शाने वाला होता है। इससे मिलने वाली चीजों का फल अच्छे रुप में मिलेगा या खराब रुप में ये ग्रहों की शुभ-अशुभ स्थिति पर अधिक निर्भर करता है। आपके जीवन में इसकी स्थिति का असर किस तरह का है वह भी आपकी कुंडली/Kundli का अध्ययन करके ही अधिक सटीकता के साथ बताया जा सकता है। इसलिए योग से मिलने वाले फलों को बेहतर रुप से समझने हेतु एक योग्य ज्योतिषी आपकी कुंडली में राहु-मंगल युति/Kundli me Rahu Mangal ki Yuti का असर किस तरह से पड़ेगा बता सकता है।


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