जानिए राहु किस ग्रह के साथ हमारी लाइफ पर क्या असर डालता है?

Rahu ka anya Graho ke sath Yuti

राहु के साथ जब कोई ग्रह युति में होता है तो ये संबंध/Rahu ka anya Graho ke sath Yuti काफी विशेष माना गया है. ग्रहों की युति ज्योतिष शास्त्र में कई तरह के फलों को दिखाने वाली होती है. ग्रहों का संयोग चाहे कुंडली में हो या फिर गोचर में दोनों ही स्थानों पर इसका प्रभावी असर पड़ता है. जब हम बात करते हैं राहु के अन्य ग्रहों के साथ संबंध/Rahu ka anya Graho ke sath Yuti की तो इस युति का और भी अधिक गहन अध्ययन करने की आवश्यकता पड़ती है. कोई ग्रह जब विशेष रुप से राहु के साथ होता है तो इस ग्रह की छाया में अपनी मूल शक्ति खो सकता है. राहु कुछ के साथ अच्छा भी होता है तो कुछ के साथ खराब होता है. आइये जानते हैं राहु का अन्य ग्रहों के साथ संबंध/ Rahu ka anya Graho ke sath Yuti

राहु का सूर्य के साथ संबंध

राहु का सूर्य के साथ संबंध बहुत खास होता है क्योंकि राहु ही सूर्य के साथ जब होता है तो ग्रहण की स्थिति को उत्पन्न करता है. सभी ग्रहों में सूर्य को राजा और आत्मा का कारक माना गया है. जीवन में मान सम्मान, प्रतिष्ठा को दिलाने में सूर्य की विशेष भूमिका होती है. यह जीवों की आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है. यह चाहे एक क्रूर ग्रह हो किंतु जीवन का आधार इसी से होता है. यह पिता का सुख दर्शाता है, शक्ति, स्वाभिमान और अधिकार की स्थिति को दिखाता है. दुनिया में अपने प्रभुत्व को स्थापित करने में सूर्य विशेष ग्रह होता है. अब जब राहु के साथ सूर्य का संबंध बनता है तब सूर्य के ये सभी गुण काफी गहरे रुप से प्रभावित होते हैं. आत्मा का दूषित होना भी राहु के प्रभाव से ही संभव हो पाता है और जब आत्मा दूषित होती है तब नकारात्मक उर्जा ही अधिक फैलती है. राहु के नकारात्मक प्रभाव/Rahu ka Prabhav में सूर्य की शक्ति उचित स्थान की जगह गलत रुख को दिखा सकती है. यह एक परेशानी और हानि को दिखाने वाली स्थिति हो सकती है.

राहु का चंद्रमा के साथ संबंध

राहु का चंद्र के साथ होना भी अनुकूलता की कमी का कारण बनता है. चंद्रमा को मन और माता का कारक माना गया है. चंद्रमा के प्रभाव से कैसे एक व्यक्ति खुद को दुनिया में कैसे प्रस्तुत करता है देखा जाता है. यदि चंद्रमा मजबूत होगा तो ऊर्जा और स्वामित्व को मजबूती मिलेगी. आत्मबल मजबूत होगा. वहीं कमजोर चंद्रमा व्यक्ति को चिंताशील, अहंकारी, आत्मविश्वासी की कमी का कारण बनता है. जीवन में जब आत्मबल की मजबूती चाहिए तो चंद्रमा की शुभता आवश्यक होती है. राहु के साथ चंद्रमा का योग भी ग्रहण का योग बनाता है. राहु चंद्र योग/Rahu Chandra Yoga प्रेम, मन की शांति, सकारात्मकता और भावनाओं को खराब करता है.  एक मजबूत चंद्रमा व्यक्ति की जीवन के कई स्थानों में मदद करता है, लेकिन राहु के साथ चंद्रमा कमजोर हो जाता है और इस कारण से मन की चंचलता, अवसाद जैसी परेशानी जीवन पर गहरा असर डालती है.

राहु के साथ मंगल का संबंध

राहु के साथ मंगल का होना भी बहुत अधिक शुभ स्थिति को नहीं दर्शाता है. यह दोनों ग्रह क्रूरता एवं क्रोध की अधिकता को दिखाने वाले होते हैं. ऐसे में जब एक साथ होते है, तो उपद्रव का होना स्वाभाविक ही दिखाई देता है. वाद-विवाद, झगड़े, मतभेद, दंगा फसाद जैसी स्थितियां राहु मंगल की युति/Rahu Mangal ki Yuti संयोग द्वारा ही बनती हैं. मंगल ग्रह को साहस, जुनून, शक्ति, ताकत और आत्मविश्वास का कारक माना गया है. राहु जब मंगल के साथ योग बनाता है तो इतनी आक्रामकता को संभाल पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है. इन दोनों के द्वारा मुश्किलें और कठिनाइयां सामने आती है लेकिन इन पर विजय प्राप्ति भी इन दोनों के होने से ही संभव भी हो पाती है.

राहु का बुध के साथ संबंध

राहु का संबंध बुध के साथ होना कुछ मामलों में अच्छा भी माना जाता है. वैसे राहु अपनी छाया तो देता ही है लेकिन बुध के साथ इसका संगम कई मामलों में बेहतर परिणाम दिलाने में भी सक्षम होता है.  बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क क्षमता, त्वचा इत्यादि का कारक माना गया है. जब राहु का संबंध बुध के साथ होता है तब इन दोनों का संबंध नई चीजों के आविष्कार हेतु भी विशेष माना गया है. बुध राहु का योग/Budh Rahu ka Yoga व्यक्ति को जन संपर्क में अच्छी पकड़ बनाने का अवसर भी देता है. आज के युग में इंटरनेट के इस समय पर बुध राहु का संबंध कई तरह से लाभ देने में सक्षम होता है. कुछ मामलों में राहु बुध का योग बुद्धि की जड़ता की ओर भी इशारा करता है , लेकिन यदि इन दोनों का योग शुभ रुप से से बने तो अच्छा परिणाम दे सकता है.

राहु का बृहस्पति के साथ संबंध

राहु का संबंध जब बृहस्पति अर्थात गुरु के साथ होती है/Guru se Rahu ka sambandh तो ये स्थिति कई मिले जुले फलों को देने वाली होती है. यहां यह योग कई बार कुछ कमजोर स्थिति को दिखाता है. इसका कारण बृहस्पति ग्रह ज्ञान का कारक है और जब राहु ज्ञान के साथ मिलेगा तो ज्ञान में अज्ञान का समावेश होने लगता है. इसी के साथ बृहस्पति धर्म को दर्शाता है. आध्यात्मिक गुणों से युक्त इस ग्रह के साथ राहु की छाया पड़ने से राहु स्वयं तो शुभ हो जाता है लेकिन गुरु को प्रभावित कर बैठता है. इस स्थिति में व्यक्ति कई बार धर्म में अपनी विचारधारा को अधिक स्थान देना चाहता है. बाहरी धर्म संस्कृति के प्रति भी रुझान बढ़ाता है.

राहु का शुक्र के साथ संबंध

राहु का शुक्र के साथ संबंध शुभता की कमी का संकेत देता है, इस योग को खराब योगों के रुप में भी देखा जाता है. शुक्र ग्रह को भावनाओं, प्रेम, संबंधों, सौंदर्य, यौन संबंधों का कारक माना गया है. भौतिक जीवन से मिलने वाले सभी सुख किसी न किसी रुप से शुक्र के साथ संबंधित होते हैं. अब जब राहु का संबंध शुक्र के साथ होता है/Rahu Shukra ka sambandh तो व्यक्ति की इच्छाएं इस ओर अधिक उन्मुख दिखाई देती हैं, इन चीजों को पाने हेतु कई तरह के उलटफेर करने की ओर भी व्यक्ति आगे रह सकता है. राहु का शुक्र के साथ होना व्यक्ति को गलत आदतों की ओर ले जाने वाला होता है.

राहु का शनि के साथ संबंध

राहु के साथ शनि का संबंध/Rahu Shani ka sambandh शुभता की कमी को दर्शाता है. यह दोनों साथ में होकर कर्मों की शुभता का संकेत भी देते हैं. शनि कर्म का ग्रह है और जब राहु इसके साथ जुड़ता है तब व्यक्ति के लिए जीवन में संघर्ष, कष्ट एवं चिंताओं का जाल सा बना रहता है. जीवन को लेकर निराशा का भाव व्यक्ति में अधिक देखने को मिलता है. इस योग के कारण व्यक्ति को अधिक परिश्रम करना होता है. सफलताओं के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धाएं बनी रहती हैं.

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