राहु और केतु से कौन-कौन से रोग होते हैं?

राहु के प्रभाव

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यदि चिकित्सा ज्योतिष/medical astrology को देखें तो हम पाएंगे की सभी ग्रहों को किसी न किसी रोग, शरीर के किसी अंग से संबंधित किया गया है। चिकित्सा ज्योतिष में राहु और केतु को विष के रुप में चित्रित किया गया है। राहु और केतु एक सर्प की भांति भी दर्शाए गए हैं अत: इन का शरीर पर असर विषैले प्रभाव से होने वाले रोगों का मुख्य कारण बनता है। इसके अतिरिक्त राहु-केतु को विषाणुओं से उत्पन्न होने वाले रोग के लिए भी जिम्मेदार माना गया है। व्यक्ति को जब को ऐसा रोग लगता है जिसका सही हो पाना मुश्किल दिखाई देता है तो उसके पीछे का कारण राहु-केतु को ही माना गया है।

राहु और केतु दो ऎसे पाप ग्रह हैं जो जीवन में होने वाली व्याधियों का घातक स्वरूप भी होते हैं। राहु एक भ्रम का जाल है ऐसे में कहा जाता है कि राहु दशा/Rahu Dasha के समय यदि कोई रोग उत्पन्न हो रहा है तो उसके बारे में उचित रुप से जान पाना असंभव ही होता है। राहु रोग की स्थिति को बेहतर रुप से समझने नहीं देता है। कई बार राहु दशा में जब रोग होता है तो व्यक्ति की चिकित्सीय रिपोर्ट में संदेह बना रहता है। रोग किस कारण से हुआ है इस बात का पता नहीं चल पाता है। इसलिए कहा जाता है की यदि किसी को राहु केतु की दशा/Rahu Ketu Dasha समय रोग हुआ है तो उस व्यक्ति को एक से अधिक डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए

कुंडली में राहु/Kundli me Rahu के खराब होने या कमजोर होने पर व्यक्ति को तंत्रिका तंत्र से संबंधी रोग परेशान कर सकते हैं। तंत्रिकाएं हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में एक विशेष भूमिका निभाती हैं। इन तंत्रिकाओं के जाल द्वारा ही शरीर का हर अंग अपने अनुरूप कार्य भी करता है। किंतु जब हमारी तंत्रिकाओं में कोई गतिरोध उत्पन्न होता है तो उस के कारण रोग हमें परेशानी देने में आगे रहते हैं। इसके कारण देह की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है। राहु मुख्य रुप से व्यक्ति को बेचैनी से होने वाले रोग दे सकता है, अवसाद उन्माद की स्थिति को देने वाला भी राहु ही होता है। विभिन्न प्रकार के मनोवैज्ञानिक विकार राहु के कारण उत्पन्न होते देखे जा सकते हैं।

 

राहु का असर/Rahu ka Prabhav जब शरीर पर गलत रुप में पड़ता है तो उस के कारण व्यक्ति को अपने आप पर नियंत्रण नहीं रह पाता है। मानसिक विचारधारा उसे ऎसे क्षतिग्रस्त कर सकती है कि वह शरीर की सुध बुध भी खो सकता है। इच्छा की कमी, असुरक्षा, भय का असर राहु अवश्य देता है। राहु व्यक्ति को भ्रम से उत्पन्न होने वाले रोग भी दे सकता है। भूलने की बीमारी, याददाश्त की कमी भी इसके द्वारा हो सकती है। राहु की वात प्रकृति के प्रभाव के कारण व्यक्ति को वायु विकार हो सकते हैं। गैस्ट्रिक से होने वाली समस्याएं भोजन का पाचन उचित रुप से नहीं हो पाना इत्यादि बातें राहु के कारण शरीर को रोग ग्रस्त कर सकती हैं।

 

Dealy in Marriage: विवाह में हो रही है देरी तो ले ज्योतिष उपाय

राहु के प्रभाव से ही विषैले पदार्थों के कारण जीवन पर गंभीर खतरा भी पड़ सकता है। जहरीले जानवरों से होने वाला आघात भी व्यक्ति को इस समय पर अधिक कष्ट दे सकता है। राहु के कारण कैंसर जैसे रोग होने की संभावना भी अधिक प्रभाव डाल सकती है। जानवरों के कारण भी व्यक्ति को कष्ट हो सकता है। आपदाओं के कारण होने वाली घटनाओं से होने वाली दुर्घटनाओं का प्रभाव भी व्यक्ति के लिए हानिकारक होता है। जैविक विकृतियां, ड्रग्स, शराब इत्यादि नशीले पदार्थों से होने वाले रोग, विभिन्न प्रकार के व्यसन, बिजली इत्यादि से होने वाली दुर्घटनाएं हमें रोग दे सकती हैं।

 

यह भी पढ़ें: राहु न सिर्फ सताता है बल्कि राजपाट भी दिलाता है?

 

Leave a Reply