राहु का चतुर्थ भाव में क्या प्रभाव है?

rahu chauthe bhav me

राहु का कुंडली के चौथे भाव में/rahu chauthe bhav me होना उथल-पुथल को दिखाता है। वैसे तो राहु जिस भी भाव में होता है अपने असर को ऎसे फैलाता है की उससे बच पाना आसान नहीं होता है। हर भाव को अपने अनुसार कर देने की उसकी क्षमता भी काफी विस्मृत कर देने वाली होती है। कुंडली में ग्रह की स्थिति और भाव की स्थिति के आधार पर ही फलों का निर्धारण होता है। एक सामान्य अध्ययन के रुप में यदि हम राहु का चतुर्थ भाव में/rahu chauthe bhav me होना देखें तो ये मिलाजुला असर दिखाने वाला होता है। जीवन के कुछ पक्ष इससे प्रभावित होकर कमजोर होंगे तो कुछ स्थानों पर विजय भी दिला सकता है।

कुंडली में राहु: राहु अपने खराब असर के कारण अधिक प्रसिद्ध रहा है। राहु व्यक्ति को धोखे में रखने वाला ग्रह है। यह जीवन को बदलावों से उलझाए रखता है। व्यक्ति को संतुष्टि नहीं मिल पाती है, मृगतृष्णा व्यक्ति में बनी रहती है। राहु गुस्सा, असंतोष, अव्यवस्था, परेशानी, चिंता, शंकाएं बनाए रखता है। अंधकार, झूठ, फरेब राहु के द्वारा ही देखने को मिलता है। गुप्त रुप से होने वाले काम राहु की देन होते हैं। राहु लालच और द्वेष से भर देने वाला होता है। राहु आध्यात्मिक राह पर ले जाने वाला होता है। धर्म के नए भेद दिखाता है, स्थितियों को अपने अनुसार कर देने की चाह राहु में होती है। नई विचारधारा और नई आवश्यकताओं की मांग इसी राहु के कारण दिखाई देती हैं। 

कुंडली का चतुर्थ भाव: जन्म कुंडली/Janam Kundli का चौथा भाव काफी शुभ स्थान माना जाता है। चतुर्थ भाव केन्द्र भाव होकर अपनी शुभता पाता है। इस भाव के फलों को यदि देखें तो इस घर से व्यक्ति के जीवन का सुख देखा जाता है। यह सुख उसके जीवन के भौतिक स्वरूप एवं आत्मिक स्वरुप दोनों ही पक्षों से जुड़ा होता है। चतुर्थ भाव के कारक तत्वों की बात की जाए तो यहां से हम कई तरह की बातों का विश्लेषण करने की योग्यता प्राप्त करते हैं।

जन्म कुंडली के इस भाव से भौतिक सुख संपत्ति का पता चलता है, इस घर से माता का सुख मातृत्व की धूप छांव का बोध होता है। चतुर्थ भाव/Chaturth bhav व्यक्ति के वाहन का सुख दर्शाता है, इस भाव स्थान से व्यक्ति को मिलने वाले वस्त्र एवं आभूषण इत्यादि का पता चलता है। इस घर से व्यक्ति के भवन मकान का पता चलता है। घर का फ़र्नीचर एवं अन्य प्रकार की चीज़ें जिनसे सुख एवं आरामकी प्राप्ति होती है वह इस स्थान से देखी जाती हैं। इस भाव से व्यक्ति की प्रारंभिक शिक्षा को भी देखा जाता है। शरीर के अंगों में यह स्थान छाती, स्तन और फेफड़ों को विशेष रुप से इंगित करता है। परिवार में लोगों के साथ संबंधों की स्थिति भी इस घर से पता की जा सकती है।

चतुर्थ भाव में राहु के होने का फल/Chauthe bhav me Rahu ka prabhav

अब इन दो मुख्य पहलुओं के बाद हम अगर चीजों को देखें तो जब ये दोनों एक साथ होते हैं तो इस तरह से अपने असर दिखाते हैं। राहु एक पाप ग्रह होकर जब हमारे सुख में आता है तो वह हमारे सुख को दूषित कर सकता है। राहु को विष की भांति भी कहा गया है यह अपने इस असर को सुख में जब घोलता है तो सुख की अनुभूति को ग्रहण कर पाना अत्यंत ही कठिन काम होता है। राहु यहां बैठ कर मन को बेचैन बनाए रखता है। राहु का असर व्यक्ति के मानसिक संतोष को उथल-पुथल से भर देने की क्षमता रखता है। राहु का गुण भौतिक सुख सुविधाओं में विशेष असर डाल सकती है व्यक्ति इसे प्राप्त कर सकता है तो इसे खो भी सकता है। अब आईये जानते हैं ये कब अपने अच्छे फल देगा यहां और कैसे आपका सुख होगा इसके प्रभाव से- 

राहु के दो पहलू यहां काम करेंगे। पहला राहु की स्थिति अगर इस घर में अच्छी और मजबूत है। अर्थात राहु कुछ बेहतर स्थिति में है किसी शुभ ग्रह की दृष्टि योग से प्रभावित हो रहा है। राजयोग कारक बन रहा है। अपनी मित्र राशि एवं अनुकूल राशि में है, राहु नक्षत्र की शुभता से प्रभावित है तो इन स्थितियों में राहु का सुख भाव में होना कुछ मामलों में सकारात्मक फलों को देने वाला बनता है। अब इस स्थिति में राहु व्यक्ति को भूमि-मकान का सुख दिला सकता है, राहु के प्रभाव/Rahu ka prabhav से संपत्ति से लाभ की उम्मीद की जा सकती है। राहु व्यक्ति को एक से बढ़ कर एक अच्छा वाहन भी दिला सकता है। राहु भौतिक संपदा को प्रदान कर सकता है। व्यक्ति को कई तरह की वस्तुएं प्राप्त हो सकती हैं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गैजेट्स उसके पास हो सकते हैं। व्यक्ति परिवार में अपनी धाक जमाने में भी कामयाब हो सकता है। व्यक्ति को अपने कर्म क्षेत्र में कई तरह की उपलब्धियां भी प्राप्त हो सकती हैं।

अब दूसरे पक्ष को देखें यदि राहु खराब स्थिति में, चौथे घर में किसी अन्य पाप ग्रह के साथ में हो दृष्टि में हो, खराब नक्षत्रों/Nakshatra में हो, अपने शत्रु की राशि इत्यादि में हो तब इस कारण वह खराब होने लगता है। अब बिगड़े के साथ कोई दूसरी बिगड़ी चीज मिलेगी तो स्थिति अनियंत्रित ही होगी। राहु के सुख घर में/Rahu in the fourth house खराब स्थिति में होने के कारण व्यक्ति काफी चिंता में दिखाई देगा। उसके जीवन में सुख का अभाव बना रहेगा। वह अनेक कोशिशों के बावजूद भी अपने लिए सुख को पाने में कमजोर होगा। संपत्ति इत्यादि से उसे कष्ट हो सकता है। संपत्ति उसके लिए परेशानियों का सबब बन सकती है। वाहन का सुख कमजोर होगा। वाहन इत्यादि से दुर्घटनाओं का योग बनेगा। वाहन पर खर्च की अधिकता बनी रह सकती है। कई बार वाहन प्राप्त ही न हो पाए ऐसी स्थिति भी बन सकती है।

सुख का भाव माता का कारक भी है तो खराब राहु माता के सुख को कम कर देने वाला होगा। माता का स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है, माता से मिलने वाला प्रेम बाधित हो सकता है। माता के साथ संबंध बिगड़ सकते हैं। खराब राहु का असर/Kharab Rahu ka prabhav व्यक्ति को रोग के रुप में छाती और फेफड़ों से संबंधित बीमारी दे सकता है।

विशेष: राहु का चतुर्थ भाव में/Rahu chauthe bhav me होना काफी गहरे शब्दों की अभिव्यक्ति दर्शाता है। यह सुख ही राहु के साथ जब मिलता है तब राहु इसमें जो रंग भरता है वो सिर्फ किसी एक तर्क से नहीं बताया जा सकता है, इसके लिए कुंडली का अध्ययन करके ही इसकी सत्यता को परखा जा सकता है।

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