राहु की महादशा का अंत कैसा होगा यदि राहु अच्छा ना हो तो?

Rahu ka Antim Padav

राहु की महादशा 18 वर्ष तक असर डालती है और जाती हुई दशा जीवन में बड़े बदलाव दिखाती है। राहु के अंतिम पड़ाव/Rahu ka Antim Padav में मंगल की अंतर्दशा मिलती है। ऐसे में राहु महादशा में मंगल अंतरदशा का समय अवश्य ही विशेष होता है। राहु जो एक पाप ग्रह है और मंगल भी पाप ग्रह की श्रेणी में ही आता है। ऐसे में व्यक्ति दो पाप ग्रहों की दशा का फल पाता है। इसी के साथ राहु और मंगल को कठोर ग्रह के रुप में भी जाना जाता है। इस कारण से भी ये दोनों जब एक साथ अंतिम समय पर आते हैं तो व्यक्ति के लिए समय चुनौतियों का तो रहता ही है क्योंकि दशा इन दो पाप ग्रहों की होती है लेकिन इस दशा का असर इस बात से भी मिलता है की किसी जातक की कुंडली में ये दोनों किस स्थान में तथा किस स्थिति में उपस्थित हैं।

सामान्य रुप से राहु महादशा का अंत व्यक्ति के लिए काफी कुछ परिवर्तन दे सकता है। इस समय के दौरान सामाजिक स्थिति में भी चेंज होता है। व्यक्ति को अपने कार्य क्षेत्र में नई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। क्रोध एवं उग्रता भी व्यक्ति के स्वभाव में दिखाई दे सकती है। क्या करें और क्या न करें जैसी स्थिति भी देता है। मानसिक रुप से काफी दबाव का अनुभव होता है। वाद विवाद की स्थिति भी व्यक्ति को अधिक परेशान कर सकती है। बेकार की बातों में उलझ कर आवश्यक चीजों से दूर हो सकता है। दुर्घटना या किसी प्रकार की आकस्मिक घटनाओं से रुबरु भी होना पड़ सकता है। व्यक्ति की भाषा शैली में भी कठोरता और चातुर्य समाहित होता है। अपनी बातों में दुराव छिपाव की स्थिति भी शामिल कर सकते हैं। कुछ अधिक दुस्साहसिक हो सकते हैं। अग्नि, शस्त्र, वाहन, विषाक्तता, संक्रमण एवं रक्त संबंधी विकार परेशान कर सकते हैं। स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। 

अब दूसरा तथ्य यहां यह भी होगा की राहु हमारी कुंडली में कैसी स्थिति में है, यदि राहु खराब होगा तो वह अपने खराब फलों में अधिकता करेगा। पर अगर राहु सही स्थिति में होगा तो बचाव भी होगा। इसी तरह अगर मंगल कुंडली के लिए शुभस्थ है, योगकारक है या फिर कुछ अच्छे प्रभाव में तो व्यक्ति को मंगल के शुभ फल राहु मंगल अंतर्दशा/Rahu-Mangal Antardasha के समय बचाव करने में भी सहायक होंगे। इसी के दूसरे पक्ष में अगर मंगल कुंडली में अशुभ स्थिति में है तो यह अच्छा फल नहीं दे पाएगा।

अब अगर राहु कुंडली में/Rahu in the Horoscope खराब हो तो ये देखना आवश्यक होगा की उसके अंतिम साथी महादशा स्वामी मंगल की कुंडली में स्थिति कैसी है अगर मंगल अच्छा होगा तो यहां व्यक्ति को राहु की अशुभता और मंगल की शुभता का कुछ फल अवश्य मिलेगा जो मिश्रित फलों को देने वाला होगा। अब इसका दूसरा पक्ष देखें की अगर राहु तो कुंडली में खराब ही है लेकिन मंगल भी खराब हो तो यह समय चिंताजनक बनता है। ऐसे में राहु की जाती हुई महादशा कष्टदायक हो सकती है। दुष्प्रभावों का असर व्यक्ति पर पड़ सकता है।

राहु महादशा का अंतिम प्रभाव 

राहु की महादशा का आखिरी पड़ाव मंगल की अंतर्दशा/Mangal Antardasha से होता है। इस कारण से से इस महादशा के समय पर कुछ विशेष चीजों का असर जातक पर होते देखा जा सकता है। इस दशा के समय व्यक्ति के स्वभाव एवं उसके आस पास के वातावरण में बदलाव दिखाई देने लगते हैं। अब मंगल जिस भी भाव का स्वामी होगा वह राहु दशा/Rahu Dasha के साथ मेल बना कर उस भाव के फलों से प्रभावित करने वाला होगा। यदि यह मंगल लग्न का स्वामी होगा तो शरीर पर इसका असर दिखाई देगा तथा व्यवहार में उत्साह भरेगा। यदि मंगल दूसरे घर का स्वामी होगा तो धन का असर इस दशा में आप पर असर डालने वाला होगा। परिवार में लोगों के साथ संबंध बदले बदले से दिखाई देंगे। अगर मंगल तीसरे घर का स्वामी होगा तो राहु के साथ मिलकर यात्राओं को कराने वाला हो सकता है या फिर छोटे भाई बंधुओं को लेकर कुछ चिंता एवं मतभेद दे सकता है। यदि चौथे घर का स्वामी हुआ तो घर से कहीं दूर जाने के योग दे सकता है। संपत्ति की खरीद फरोख्त इत्यादि से जुड़े मसले उभरेंगे मंगल पंचम का स्वामी हुआ तो संतान, शिक्षा और प्रेम के मुद्दे विशेष रुप से इस समय उभरेंगे। छठे का स्वामी हुआ तो संघर्ष का समय होगा। सप्तम का हुआ तो वैवाहिक जीवन प्रभावित होगा/Marriage Life Issues अष्टम का संबंध बना तो अचानक होने वाली घटनाओं का सामना करना होगा। इसी तरह से मंगल जिस भी घर से संबंधित होगा उसके असर भी दिखाएगा।

राहु अच्छा हो या खराब मंगल के साथ जुड़ कर यह आक्रामक तो हो ही जाता है। इसलिए इस दशा को विशेष दशा कहा जाता है। कई बार राहु दशा अपने साथ बहुत कुछ ले भी जाती है। इसलिए राहु के अंतिम पड़ाव/Rahu ka Antim Padav का असर सटीक रुप से समझने के लिए जरूरी है कि कुंडली/Kundli में राहु की स्थिति को देखा जाए। उसी के अनुसार राहु अपना फल देने में सक्षम हो सकता है। राहु के अंतिम पड़ाव/Rahu ka Antim Padav में व्यक्ति को काफी राहत भी दिखाई देते हैं राहु के असर के हटने पर व्यक्ति का जीवन कुछ धीमा भी होता है क्योंकि आने वाला ग्रह बृहस्पति होता है तो अब ये समय आने वाली दशा का भी रंग देने का समय होता है। इस समय पर शांति स्थिरता और ध्यान को बनाए रखता है।

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