क्या पितृ दोष में सकारात्मक परिणाम मिल सकता है?

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पितृ दोष/Pitra Dosha हमारे पूर्वजों की अपूर्ण इच्छाओं और असम्बद्ध कार्यों के कारण गठित को दर्शाता है। लेकिन एक सवाल यहां उत्पन्न होता है। अब जब पूर्वज चले गए हैं, तो  वंशज अपने वर्तमान जीवन में क्या कर सकते हैं? चलिए इसके लिए पितृ दोष के प्रभाव को भावों के आधार पर समझते हैं।

राहु के द्वारा उत्पन्न पितृ दोष का सभी भावों पर प्रभाव

नकारात्मकता  / शाप / दुःख, पितृ दोष ला सकता है। राहु द्वारा उत्पन्न पितृ दोष विभिन्न तरीकों से कुंडली के विभिन्न भावों को प्रभावित करता है। आम तौर पर बहुत कम ज्योतिषी इसे समझाते हैं। लेकिन मैं इसे सरल भाषा में समझाने का प्रयास करुंगा। इस विषय में अधिक समझने के लिए आपको एक बात समझनी पडेगी कि किसी भी तरह के पितृ दोष को कुंडली विश्लेषण/Kundli Analysis से ठीक किया जा सकता है।

चलिए अब राहु के द्वारा उत्पन्न  पितृ दोष के बारह भावों पर प्रभाव को समझते हैं।

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प्रथम भाव में पितृ दोष

व्यक्ति अपने जीवन में खराब स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन में समस्या, करियर में समस्या, बच्चों और माता पिता के बीच में दूरी का कारण बन सकता है।

द्वितीय भाव में पितृ दोष

इस दौरान व्यक्ति अपनी बात कहने में असमर्थ रहता है, चेहरे और मुंह से संबंधित समस्या होगी, बैंक बैलेंस में असंतुलन को दिखाएगा और परिवार के साथ नोक झोंक के संकेत देता है।

तृतीय भाव में पितृ दोष

इस प्रभाव के कारण भाई बहन के रिश्ते में समस्या आएगी, वैवाहिक जीवन में उथल पुथल होगी और पत्नी की आयु पर इसका प्रभाव जाएगा।

चौथे भाव में पितृ दोष

जब पितृ दोष चौथे भाव में होगा तो व्यक्ति अत्यंत रूढ़िवादी बनता है। साथ में उसका स्वभाव हिंसक होता है और उस व्यक्ति की मां के साथ संबंध अच्छे नहीं होते हैं। इसके साथ साथ उच्च शिक्षा और मानसिक स्थिति भी प्रभावित होती है।

पांचवे भाव में पितृ दोष

इस दोष का पांचवें भाव में होने के कारण बच्चों को समस्या हो सकती है, लव मैरिज में परेशानी, यौन संबंध में मुश्किलें और बौद्धिक क्षमता प्रभावित होती है।

छठे भाव में पितृ दोष

जब पितृ दोष छठे भाव से संबंध रखे तो व्यक्ति को अपने जीवन से घृणा होती है और उसे दूसरों के द्वारा गलत समझा जाता है। वह लगातार बीमार भी रहता है।

सातवें भाव में पितृ दोष

जब पितृ दोष सातवें भाव से संबंध रखे तो उस व्यक्ति के मन में अशांति रहती है, वैवाहिक सुख नहीं मिलता और जीवनसाथी का अनैतिक व्यवहार बना रहता है। इसके साथ साथ व्यक्ति को धन संबंधित समस्या भी हो सकती है।

आठवें भाव में पितृ दोष

इसके दौरान व्यक्ति बीमार रहता है, बच्चों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और उन व्यक्तियों को अकसर अपमान और आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे व्यक्तियों की शारीरिक संबंध में आग्रह उच्च हो सकती है।

नौवें भाव में पितृ दोष

नौवें भाव में पितृ दोष के कारण पिता पुत्र में नहीं बनती, दांपत्य जीवन में हमेशा मुश्किलें बनी रहती है और भाग्य उनका साथ नहीं देता है।

दसवें भाव में पितृ दोष

दसवें भाव में यह दोष व्यक्ति को असफलता प्रयास प्रदान करता है साथ में सम्मान में नुकसान को दर्शाता है। इसके दौरान व्यक्ति के सामने कर्ज की स्थिति भी बनती है।

ग्यारहवें भाव में पितृ दोष

ग्यारहवें भाव में इस दोष के संबंध से व्यक्ति की संगति अच्छी नहीं होती। यह व्यक्ति की संपत्ति नष्ट कर सकता है और आकस्मिक मृत्यु भी हो सकती है।

बारहवें भाव में पितृ दोष

पितृ दोष कुंडली में बारहवें भाव से संबंधित  होता हो  तो व्यक्ति के कर्ज में बढ़ोतरी होगी, लंबी अवधि के लिए रोग से पीड़ित होगा, आंखों की बीमारी हो सकती है और यौन जीवन में समस्या आ सकती है।

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राहु के द्वारा पितृ दोष में सकारात्मक परिणाम कैसा प्राप्त करें?

इसका एकमात्र तरीका यह है कि वंशजों को अपने कर्मों को अपने वर्तमान जीवन में समायोजित करना चाहिए। कुछ कर्म सुधार/Karma Correction पितृ दोष को सकारात्मक पितृ दोष/Positive pitra dosh में परिवर्तित कर सकते हैं।

 लेकिन आपको एक बात का खास ख्याल रखने की आवश्यकता है कि कर्म सुधार के लिए आपको अपनी कुंडली का विश्लेषण कराना होगा। यह दोनों प्रक्रिया के लिए आप डॉ विनय बजरंगी से संपर्क कर सकते हैं।

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