जानें अपने ही पूर्वज हमें क्यों देते हैं दुख और क्या है इसका महाउपाय ?

pitra dosha remedies

पितरों का संबंध हमारे उन पूर्वजों से होता है जो आज हमारे बीच नहीं हैं। जिन्हें असमय मृत्यु के कारण मुक्ति नहीं मिली और वह अभी भी हमारे बीच किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। मृत्यु के पश्चात हमारे पूर्वजों की आत्मा किसी कारण मोक्ष न पाने के चलते पृथ्वी पर भटकती रहती है। और इसी कारण व्यक्तियों की कुंडली में पितृ दोष/Pitra Dosha बनता है और लोगों को इसके उपाय/Remedies की आवश्यकता पड़ती है।

 इनके कुछ कारण हो सकते हैं जैसे —

1. पितरों के लिए श्राद्ध कर्म का न होना।

2. विभिन्न अवसरों पर उन्हें उचित सम्मान ना देना।

3. बात – बात में अपने पूर्वजों को कोसना।

4. धर्म विरुद्ध अनैतिक आचरण से पितरों की नाराजगी।

5. किसी सर्प की हत्या करना या करवाना भी पितृदोष का कारण बनता है।

6. तैंतीस करोड़ देवताओं को अपने शरीर में वास कराने वाली गोमाता की हत्या या उसका निरादर करना।

7. किसी नदी या कुएं में मूत्र या मल विसर्जन करना।

8. धार्मिक एवं शुभ कार्यों के समय कुल देवता, कुलदेवी या लोक देवता की पूजा न करना।

9. किसी पवित्र तीर्थ स्थल पर धर्म विरुद्ध कार्य करना।

10. अमावस्या की तिथि पर संभोग करना।

11. किसी पुरुष द्वारा गुरु की पत्नी या पुत्री या वेश्या के साथ संबंध बनाना अथवा परिवार की स्त्रियों का चरित्रहीन होना।

12. कोख में पल रहे भ्रूण की हत्या या गर्भपात कराना। 

कैसे करें पितृ दोष की पहचान?

ज्योतिष के माध्यम से किसी भी व्यक्ति के जीवन से जुड़े पितृ दोषकी पहचान की जा सकती है। इसे किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली में ग्रहों से बनने वाले योगों का पता लगाया जा सकता है। जैसे कुंडली में सूर्य जब शनि के प्रभाव में अथवा दृष्टिगत होता है तो वह पितृ दोष का कारण बनता है। इसी तरह राहु—शुक्र, राहु—सूर्य, राहु—चंद्र, राहु—मंगल की युति से बनने वाले योग और ग्रहों की विभिन्न स्थितियां पितृ दोष के बारे में स्पष्ट रूप से बताती हैं। इनमें से किसी भी एक ग्रह का सूर्य के साथ संयोजन पितृ दोष का कारण बन सकता है। लेकिन इसका प्रभाव अलग—अलग होगा जो कि सूर्य पर निर्भर करेगा।

पितृदोष हमारे पिछले जीवन का प्रत्यक्ष परिणाम है। भारतीय वैदिक ज्योतिष स्पष्ट रूप से बताता है कि एक विशेष परिवार में हुआ आपका जन्म, आपका धन, आपकी उपलब्धियां इन सभी का संबंध आपके पूर्व जन्म से है। वहीं पिछले जन्मों में आपके द्वारा अपने बुजुर्गों का अनादर इसी पितृ दोष का परिणाम होता है। यदि आप इस जीवन में भी अपने घर के बुजुर्गों का अपमान करना जारी रखते हैं तो फिर इससे होने वाले पितृदोष के कई गुना परिणाम को झेलने के लिए तैयार हो जाइए।

पितृ दोष के उपाय

कुंडली में पितृ दोष का पता चल जाने के बाद एक बात शाश्वत सत्य की तरह है कि इसे कुंडली से दूर नहीं किया जा सकता है। ऐसे में हमें पितृ दोष के उपचार के बारे में वृहद स्तर पर जानने की कोशिश करनी चाहिए। यहां मैं आपको पितृ दोष दूर करने के लिए 3 महाउपाय बताउंगा, जिसमें अनुष्ठान कम और आपके कर्मों का सुधार ज्यादा शामिल होगा।

1. श्राद्ध/Shraddh हर स्थिति के लिए अलग अलग श्राद्ध होते हैं, इसलिए किसी भी तरह के निर्णय लेने से पहले किसी विशेषज्ञ से मिलें।

2. कर्म सुधार/Karma Correction कोई भी उपाय कर लो। वह तब तक कार्य नहीं करेगा, जब तक आप अपने कर्मों में सुधार नहीं करेंगे।

3. पितृदोष के ज्योतिषीय उपाय कर्म सुधार भी ज्योतिषीय उपाय है। लेकिन आपकी कुंडली के पूर्ण आंकलन से कुछ उपायों का पता लगाया जा सकता है।

किसी भी उपाय को करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

पितृ दोष (Pitra dosh) को दूर करने के लिए कई उपाय हैं, लेकिन सभी को एक साथ लागू नहीं किया जा सकता है और न ही किया जाना चाहिए। एक और अहम बात यह कि इसके लिए कोई पूर्वनिर्धारित विधि नहीं है जो सार्वभौमिक रूप से सभी लोगों पर लागू होती है। यह सब निर्भर करता है कि किसी कुंडली में सूर्य कितना कमजोर है। ऐसे में उपाय करने से पहले एक अच्छे कुंडली पढ़ने वाले जानकार से जरूर परामर्श करना चाहिए। इसके पश्चात ही किसी विशेष अनुष्ठान या विधि का पालन करना चाहिए। यह नियम न सिर्फ पितृ दोष के लिए बल्कि अन्य दोषों को दूर करने के लिए लागू होता है।

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