जानें अपने ही पूर्वज हमें क्यों देते हैं दु:ख और क्या है इसका महाउपाय ?

Pitra Dosh

क्या आपने कभी सोचने की कोशिश की है खूब मेहनत और प्रयास के बाद भी आपको मनचाही सफलता क्यों नहीं मिलती? क्या कारण है कि घर की आमदनी से ज्यादा आपके खर्च बढ़ते जाते हैं? क्या कारण है कि घर के सदस्यों का आपस में तालमेल नहीं बैठता है? क्या कारण है कि आपके बने बनाए काम अंतिम समय में बिगड़ जाते हैं? यदि नहीं सोचा तो अब जरूर सोचिए। वैसे तो आपकी इन तमाम समस्याओं के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं लेकिन इनके साथ आपको अपनी कुंडली में पितृदोष के बारे जरूर पता लगाना चाहिए। पितृ दोष एक अदृश्य बाधा है, जो कि पितरों के नाराज होने के कारण हमारे जीवन से जुड़ जाता है।  

क्यों होता है पितृदोष

पितरों का संबंध हमारे उन पूर्वजों से जो आज हमारे बीच नहीं हैं। जिन्हें असमय मृत्यु के कारण मुक्ति नहीं मिली और वे अभी भी हमारे बीच किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। अब सवाल यह है कि आखिर हमारे पितृ हमसे नाराज क्यों हो जाते हैं। मृत्यु के पश्चात हमारे पूर्वजों की आत्मा किसी कारण मोक्ष न पाने के चलते पृथ्वी पर भटकती रहती हैं। इन्ही पितरों से जुड़ी जीवन की कुछेक गलतियां पितृदोष का कारण बनती हैं। जैसे —

1. पितरों को प्रसन्न किया जाने वाला श्राद्ध कर्म का न होना।

2. जिन्हें हम अपना पूर्वज मानते आए हैं, उन्हें भुला देना। विभिन्न अवसरों पर उन्हें उचित सम्मान देते हुए याद न करना।

3. बात—बात में अपने पूर्वजों को कोसना और उनका अपमान करना।

4. धर्म विरुद्ध अनैतिक आचरण करने से पितृ नाराज हो जाते हैं।

5. किसी सर्प की हत्या करना या करवाना भी पितृदोष का कारण बनता है।

6. तैंतीस करोड़ देवताओं को अपने शरीर में वास कराने वाली गोमाता की हत्या या उसका निरादर करना।

7. किसी नदी या कुएं में मूत्र या मल विसर्जन करना।

8. धार्मिक एवं शुभ कार्यों के समय कुल देवता, कुलदेवी या लोकदेवता की पूजा न करना।

9. किसी पवित्र तीर्थ स्थल पर धर्मविरुद्ध कार्य करना।

10. अमावस्या की तिथि पर संभोग करना।

11. किसी पुरुष द्वारा गुरु की पत्नी या पुत्री या वेश्या के साथ संबंध बनाना अथवा परिवार की स्त्रियों का चरित्रहीन होना।

12. कोख में पल रहे भू्रण की हत्या या गर्भपात कराना। 

कैसे करें पितृदोष की पहचान?

ज्योतिष के माध्यम से किसी भी जातक के जीवन से जुड़े पितृदोष (Pitra dosh) की पहचान की जा सकती है। इसे किसी भी जातक की जन्मकुंडली में ग्रहों से बनने वाले योगों से जाना जा सकता है। जैसे किसी जातक की कुंडली में सूर्य जब शनि के प्रभाव में अथवा दृष्टिगत होता है तो वह पितृदोष (Pitra dosh) का कारण बनता है। इसी तरह राहु—शुक्र, राहु—सूर्य, राहु—चंद्र, राहु—मंगल की युति से बनने वाले योग और ग्रहों की विभिन्न स्थितियां पितृदोष के बारे में स्पष्ट रूप से बताती हैं। इनमें से किसी भी एक ग्रह का सूर्य के साथ संयोजन पितृ दोष का कारण बना सकता है। लेकिन इनका प्रभाव अलग—अलग होगा जो कि सूर्य पर निर्भर करेगा।

पितृदोष का पूर्वजन्म से संबंध

पितृदोष (Pitra dosh) हमारे पिछले जीवन का प्रत्यक्ष परिणाम है। भारतीय वैदिक ज्योतिष स्पष्ट रूप से बताता है कि एक विशेष परिवार में हुआ आपका जन्म, आपका धन, आपकी उपलब्धियां इन सभी का संबंध आपके पूर्व जन्म से है। वहीं पिछले जन्मों में आपके द्वारा अपने बुजुर्गों का अनादर इसी पितृ दोष का परिणाम होता है। यदि आप इस जीवन में भी अपने घर के बुजुर्गों का अपमान करना जारी रखते हैं तो फिर इससे होने वाले पितृदोष के कई गुना परिणाम को झेलने के लिए तैयार हो जाइए।

सही मायने में आपकी जो कुंडली है, वह आपके बीते जन्मों के कुकृत्य या फिर सत्कर्म की एक छिपी हुई मार्गदर्शिका है। यह शीशे की तरह सब कुछ दिखाती है कि आपने अपने पिछले जीवन में क्या कुछ गलत किया था। इसे इस तरह से समझें —

  • जब राहु सूर्य के साथ योग करके पितृदोष (Pitra dosh) बनाता है तो इसका तात्पर्य है कि आपने पिछले जन्म में अपनी पारिवारिक परंपराओं को तोड़ा और अपने परिवार के लिए अपमान का कारण बने।
  • जब केतु सूर्य के साथ संयोग करके पितृदोष (Pitra dosh) बनाता है तो इसका अर्थ होता है कि आपने अपने पिछले जन्म में शायद ही कभी अपने बुजुर्गों से सच बोला हो। बल्कि उन्हें बुरा—भला कहा है।
  • शनि के साथ सूर्य के संयोग से बनने वाला पितृदोष (Pitra dosh) बताता है कि आपने अपने पिछले जन्म में कभी भी अपने बड़ों की परवाह नहीं की, जैसा कि एक अच्छे बच्चे को अपने बड़ों की देखभाल करनी चाहिए।
  • यदि मंगल के साथ सूर्य के संयोग से यह पितृदोष (Pitra dosh) बनता है तो इसका अर्थ है कि आपने अपने बुजुर्गों के साथ बहुत ज्यादा दुर्व्यवहार किया।

ऐसे में ज्योतिष के माध्यम से बताने वाली यह मार्गदर्शिका न सिर्फ आपको इस जन्म के लिए अपने कर्मों को सुधारने में मदद करती है बल्कि आपको अगले जन्म को बेहतर बनाने का रास्ता भी दिखाती है। हालांकि पितृदोष और उसकी गंभीरता को न सिर्फ ज्योतिष के माध्यम से पिछले जन्मों के परिणाम से जाना जा सकता है बल्कि वर्तमान में घट रही घटनाएं भी इसका स्पष्ट संकेत देती हैं। जिसे हम आम जीवन से जुड़ी कई बातों से भी पता लगा सकते हैं। जैसे —

  • अत्यधिक परिश्रम के बाद भी अपेक्षा के अनुसार आय न हो।
  • घर का होने वाला खर्च आय के मुकाबले कम हो।
  • घर का मुखिया कमा कर तो लाए लेकिन घर की बरकत न हो।
  • अक्सर बने—बनाए काम बिगड़ जाना।
  • घर में कलह का वातावरण बना रहे और परिजनों का आपस में कोई तालमेल न बैठता हो।
  • बात बात में क्रोध आना।
  • पैतृक संपत्ति की प्राप्ति में अड़चनें आना।
  • संतान के होने में दिक्कतें और अगर हो भी जाए तो वह दिव्यांग या मंदबुद्धि हो।
  • परीक्षा में बार बार फेल हो जाना।
  • संतान के विवाह में दिक्कतें आना।
  • कठिन परिश्रम के बावजूद बिजनेस में घाटा होना।
  • आत्मविश्वास में कमी आ जाना।

पितृ दोष के उपाय

कुंडली में पितृदोष का पता चल जाने के बाद एक बात शाश्वत सत्य की तरह है कि इसे कुंडली से दूर नहीं किया जा सकता है। ऐसे में हमें पितृ दोष के उपचार के बारे में वृहद स्तर पर जानने की कोशिश करनी चाहिए। यहां मैं आपको पितृदोष दूर करने के लिए 3 महाउपाय को तीन तरीके से करने के लिए बताउंगा, जिसमें अनुष्ठान कम और आपके कर्मों का सुधार ज्यादा शामिल होगा।

1. प्रचलित उपाय

ईश्वर ने आपको अपने गलत कार्यों के लिए पश्चाताप करने का एक माध्यम दिया है। चूंकि पिछले जन्मों के कर्म ही हमारा पितृ दोष (Pitra dosh) है इसलिए इसके उपाय भी हमारे कर्मों में ही निहित हैं। मेरे दर्शन के अनुसार यह न केवल पितृदोष के लिए बल्कि अन्य दोषों के लिए भी लाभकारी है। पुराणों के अनुसार मृत्यु के देवता यम सभी आत्माओं को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पृथ्वी पर वापस जाने के लिए मुक्त करते हैं। इस समय दिवंगत आत्माओं को भोग—प्रसाद प्रस्तुत करते हुए उनके प्रति सम्मान प्रकट करना आपका प्रमुख कर्तव्य है। अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष (Pitra dosh) अगर वाकई मौजूद है तो आप इन उपायों को कर सकते हैं —

  • त्रिपंडी श्राद्ध
  • बहुपिंडी श्राद्ध
  • जिस तिथि को परिवार के सदस्य का निधन हुआ, उस दिन श्राद्ध करें।
  • बरगद के पेड़ को जल अर्पित कर सकते हैं।
  • श्राद्ध पक्ष के समय पितरों को जल और प्रसाद अर्पित करें।
  • अमावस्या पर ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
  • श्राद्ध पक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध करें, जिस तिथि पर परिवार के सदस्य का निधन हुआ हो। गौरतलब है कि श्राद्ध के लिए पितृपक्ष हर साल सितंबर में आता है। इसकी सही तिथियों के बारे में जानने के लिए पंचांग से जांच कर लें।

एक और अहम बात ये कि इन उपायों और अनुष्ठानों का तब तक लाभ नहीं होता है जब त​क आप आप कर्मों में सुधार नहीं लाते हैं।

2. कर्मों में सुधार

पितृदोष दूर करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका अपने कर्मों में सुधार करना है। कर्म सुधारक होने के नाते यह मेरा कर्त्तव्य है कि न सिर्फ पितृदोष के लिए बल्कि अन्य दोषों को दूर करने के लिए कर्म सुधार की व्याख्या करूं। इनका निश्चित रूप से पालन किया जाना चाहिए क्योंकि इस जन्म के आपके कर्म अगले जन्म की कुंडली में अच्छे या बुरे योग के रूप में सामने आने वाले हैं।

बहरहाल, यदि आप अपने अगले अगले जन्म की परवाह नहीं करते हैं, तो भी ये उपाय आपके इस जीवन को जरूर लाभ पहुंचाएंगे। आइए जानते हैं कि आपको इसके लिए करना क्या है —

  • अपने परिवार के सदस्यों खासकर बुजुर्गों का जरूर सम्मान करें।
  • उन्हें उनकी जरूरी चीजों से बिल्कुल न वंचित करें।
  • उनके साथ ज्यादा से ज्यादा बेहतर समय बिताएं।
  • उन्हें जीवन का स्तर उसी तरह बेहतर बनाए रखें, जैसी बेहतर लाइफ आप जी रहे हैं।
  • उनके लिए कोई कटु या बुरे शब्द न निकालें।
  • उनके लिए कभी मुंह से गाली न निकालें।

यदि आप इस कर्म सुधार का पालन नहीं कर रहे हैं, तो आप स्वयं पितृ दोष (Pitra dosh) के घाव को गहरा कर रहे हैं और इससे आपको कोई राहत नहीं मिल सकती है।

3. पितृदोष के ज्योतिषीय उपाय

पितृदोष (Pitra dosh) को दूर करने के लिए यह उपाय उनके लिए खास तौर पर है जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर है और नकारात्मक ग्रहों का प्रभाव है। यह उपाय सूर्य को मजबूत करने और उस ग्रह को कमजोर करने के लिए हैं जो इस दोष को उत्पन्न कर रहा है। वैसे आप चिंता न करें, मैं इस दोष को दूर करने के लिए कुछ ज्योतिषीय अनुष्ठानों के बारे में भी बताउंगा। लेकिन इसका तब तक कोई शुभ फल नहीं मिलेगा जब तक कि आप अपने कर्म में सुधार नहीं करते हैं।

1. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष (Pitra dosh) है, उन्हें प्रतिदिन सूर्योदय से पहले सुबह जल्दी उठना चाहिए और उगते सूर्य को अर्ध्य के रूप में जल चढ़ाना चाहिए। इस अनुष्ठान को पूरा करने के लिए आपको बाजार से अघ्र्य के लिए एक बर्तन लाना है, जिसमें लाल चंदन, कुछ लाल फूल, थोड़े से चावल और थोड़े से दूध के साथ ताज़े पानी को डालकर उगते हुए सूर्य के सामने खड़े होकर इस मिश्रण को सूर्य देव को अर्पित करना है। इस अनुष्ठान को करते समय निम्नलिखित मंत्र का पाठ करना चाहिए:

”ॐ घृणि सूर्य आदित्य नमः”

2. पितृ दोष (Pitra dosh) से मुक्ति के लिए पितृ रत्न अभिषेकम् भी कर सकते हैं।

3. पितृदोष (Pitra dosh) को दूर करने के लिए आप बिहार (भारत) के गया जी की यात्रा कर सकते हैं। जिसे लोग पितृनगरी के नाम से जानते हैं। गया जी में बड़ी संख्या में लोग पितृ दोष को दूर करने के लिए अनुष्ठान कराने जाते हैं।

3. सूर्य को मजबूत करने के लिए भोजन का दान भी पितृदोष को दूर करने का बहुत ही असरकारक उपाय है।

4. प्रतिदिन सूर्य गायत्री मंत्र का पाठ करने से भी पितृ दोष (Pitra dosh) का प्रभाव कम होता है।

5. किसी भी प्रकार के पितृ दोष से जुड़े दु:ख को दूर करने के लिए सूर्य तांत्रिक मंत्र, द्वादश सूर्य मंत्र, आदित्य ह्रदय स्तोत्र या सूर्य अष्टोत्तर नामावली का पाठ कर सकते हैं।

6. श्री सूर्य कवच का पाठ करके भी पितृदोष को दूर करने के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।

पितृ दोष दूर करने का मंत्र

पितृ संबंधी दोष को दूर करने के लिए बहुत सारे मंत्र बताए गए हैं। मैं आपको उनमें से सबसे सरल और प्रभावी मंत्र बताता हूं और वो है — ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:।’  इस मंत्र का पूरी श्रद्धा और भक्ति् के साथ मंत्र जप करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और पितृ दोष (Pitra dosh) से मिलने वाले कष्टों से मुक्ति् मिलती है।

किसी भी उपाय को करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

पितृ दोष (Pitra dosh) को दूर करने के लिए कई उपाय हैं, लेकिन सभी को एक साथ लागू नहीं किया जा सकता है और न ही किया जाना चाहिए। एक और अहम बात यह कि इसके लिए कोई पूर्वनिर्धारित विधि नहीं है जो सार्वभौमिक रूप से सभी लोगों पर लागू होती है। यह सब निर्भर करता है कि किसी कुंडली में सूर्य कितना कमजोर है। ऐसे में उपाय करने से पहले एक अच्छे कुंडली पढ़ने वाले जानकार से जरूर परामर्श करना चाहिए। इसके पश्चात् ही किसी विशेष अनुष्ठान या विधि का पालन करना चाहिए। यह नियम न सिर्फ पितृदोष (Pitra dosh) के लिए बल्कि अन्य दोषों को दूर करने के लिए लागू होता है।

अपनी जन्मकुंडली में पितृ दोष को जानने और पितृ दोष को दूर करने के लिए यहां क्लिक करें

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