पिछले जन्मों के संचित कर्म ही हमारी कुंडली का निर्माण करते हैं

हमें पता होना चाहिए कि जन्म के समय बनी कुंडली किसी पंडितजी द्वारा तैयार की गई कोई ऐच्छिक दस्तावेज़ या सहज चार्ट नहीं होता हैं ! बल्कि  हमारे पिछले जन्म के कर्मों के आधार पर ग्रहों और ग्रहों की स्थिति का असल चित्रण और आवंटन होता हैं ! यह  केवल एक पिछले जन्म का परिणाम नहीं बल्कि हमारे 108 पिछले जन्मों जितना हो सकता है ! अब चूँकि पिछला जन्म  (जीवन) बीत चुका है, और यह  निश्चित या अडीग है !  तो आप इसे बदल नहीं सकते हैं! उसी तरह, एक बार हमारे लिए आवंटित (बाँटकर दिया हुआ) एक राशिफल किसी के भी द्वारा बदला नहीं जा सकता है ! कोई भी का मतलब कोई भी नहीं है, स्वयं ब्रह्मा (कुंडली के निर्माता) भी इसे बदल नहीं सकते है! फिर, ऐसा क्या है कि ज्योतिष या ज्योतिषी इसका विश्लेषण (छानबीन) करके हमारी मदद कर सकते हैं

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कुंडली क्या संकेत करती है

आपकी जन्मकुंडली आपके पूर्व जन्म या जन्मों के आधार पर दिया गया एक स्पष्ट निर्णय है | अब ये कर्म दोषपूर्ण थे या अच्छे थे, वो कर्म आपको  पिछले जन्म (जन्मो) में अस्वीकार्य थे या आपने छोड़ दिए थे ! यह आपके संचित कर्मों का परिणाम है ! साथ ही साथ आपके वर्तमान जन्म की विशिष्टता और उसके उद्देश्य का स्पष्ट मार्गदर्शन है ! और यह ये भी स्पष्ट रूप से व्याख्या करता है कि आपको वर्तमान जीवन में क्या मिलेगा या क्या नहीं मिलेगा ! हमारे पिछले जन्म (जन्मो) की सभी संवेदनाएं, कुलीनता और सद्गुण हमारी कुंडली में स्पष्ट रूप से चित्रित होते हैं !

कैसे पढ़ें कुंडली कैसे जाने राशिफल

कुंडली को देखने के दो  तरीके हैं। कुंडली में ग्रहों की स्थिति, नकारात्मक दोष और सकारात्मक योगों को पढ़ने का एक तरीका है। एक तरीका है कि सभी सकारात्मक योगों के साथ जातक  को अच्छे योग और परिणाम बताना या गारंटी देना या नकारात्मक रूप से ज्ञात दोषों से तथा सभी खराब प्रभावों और हानि वाले दोषो से व्यक्ति को डराना ! अब यदि यह भारतीय वैदिक ज्योतिष का मूल सिद्धांत था, तो अच्छे योगों के साथ अमीर पैदा हुए सभी व्यक्तियों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को आगे बढ़ाया होता।

कई स्थापित व्यापारिक साम्राज्य गायब नहीं हुए होते। और इसी तरह गरीब पैदा हुए व्यक्ति की आने वाली पीढ़ियां भी गरीब ही रहतीं | और नए व्यापारिक संस्थान या कोई नए स्टार्ट अप होते ही नहीं | और यहीं पर हमारे वर्तमान के कर्म महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं |  यही वह वजह या सत्यार्थ  है जहां मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि प्रत्येक कुंडली में नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ग्रह हैं, लेकिन परिणाम वास्तव में निर्भर करते हैं कि हम उन्हें वर्तमान जीवन के कर्मों के साथ कैसे चलाते हैं।

कर्म सिद्धांत के बिना कुंडली भ्रमित कर सकती हैं

कई बार अधिकांश नकारात्मक ग्रह सर्वोत्तम परिणाम दे सकते  हैं। और कई बार हम सर्वश्रेष्ठ योगो को सक्रिय और फलवान करने में विफल होते हैं और उनके बेहतर परिणाम से वंचित रहते हैं | हमारे पिछले जीवन कर्मो से सीख लें, मार्गदर्शन लें कि हमारे वर्तमान जन्म कर्मो को कैसे प्रबंधित करें | और  न केवल प्रबंधित करे बल्कि अपने वर्तमान में सुधार भी करें तथा अगले जन्म के लिए नीव रखे यदि आप मोक्ष द्वार पर नहीं हैं तो ।

पिछले जन्म, कुंडली और वर्तमान जन्म का सह-संबंध

कुंडली या इसके ग्रहों की स्थिति को बदला नहीं जा सकता है। लेकिन हम ग्रह परिवर्तन, दशा और गोचर का लाभ उठा सकते हैं। ये सभी समय के साथ बदलते रहते हैं। और यहीं से हमारे कर्मों की भूमिका सामने आती है। हमारे वर्तमान जीवन के कर्म हमारे हाथ से बदले या प्रतिबंधित किये जा सकते हैं ! और यही वह जगह है जहाँ एक कुशल ज्योतिषी से सही समय पर मार्गदर्शन से फर्क पड़ सकता है।

भारतीय वैदिक ज्योतिष हमारी कुंडली के विभिन्न पहलुओं को एक-दूसरे के पिछले जन्म और उसमें संचित कर्म के साथ सह-संबंधित करता है। पिछले जन्म के कर्म हमारी जन्मकुंडली का निर्माण करते हैं और जन्म कुंडली  हमारे पिछले जन्म कर्म अच्छे या बुरे  का बहुत स्पष्ट और निश्चित प्रतिबिंब होता  हैं ! हम सकारात्मक रूप से रखे गए ग्रहों (सकारात्मक पूर्वा जन्म कर्म, या सकारात्मक पिछले जन्म कर्म) के लाभों का आनंद लेते हैं और कुंडली में नकारात्मक रूप से रखे गए ग्रहों (नकारात्मक पूर्व जन्म कर्म, या नकारात्मक पिछले जन्म कर्म) के लिए भुगतान करते हैं ! और हम तब तक आनंद लेते रहते हैं या तब तक पीड़ित रहते हैं जब तक कि पिछले जीवन से अर्जित शेष राशि समाप्त नहीं हो जाती। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है, इसमें थोड़ा मोड़ है जिसे कर्म सुधार कहा जाता है।

भारतीय ज्योतिष, पश्चिमी ज्योतिष से भिन्न है

यही वह जगह है जहाँ भारतीय वैदिक ज्योतिष,पश्चिमी ज्योतिष से भिन्न है ! भारतीय ज्योतिष पिछले जीवन कर्मों से संबंधित है और वर्तमान जीवन कर्मों में हेरफेर की दिशा में मार्गदर्शन करता है जबकि पश्चिमी ज्योतिष केवल भविष्य की भविष्यवाणियों में व्यवहार करता है ! मुझे यह संदेह है कि व्यक्ति के अच्छे और दोषपूर्ण कर्मों को पढ़े बिना सही मार्गदर्शन कैसे दिया जा सकता है ! क्योंकि ज्योतिष ग्रहों को बदलने के लिए नहीं है, बल्कि कर्मों को बदलने के लिए है !

जन्म कुंडली जीवन के सभी बड़े फैसलों का आधार होती है

कुंडली जैसा कि ऊपर बताया गया है हमें स्पष्ट संकेत देती है कि किस प्रकार शिक्षा लेनी चाहिए ! यह महत्वपूर्ण रूप से इंगित (इशारा) करता है, हमें किस कैरियर का चयन करना चाहिए, हमें  नौकरी करनी चाहिए या व्यवसाय, और यदि व्यवसाय करें तो किस प्रकार का व्यवसाय करें, किसके साथ और कब कर सकते हैं ! यह काफी हद तक बताती है कि हमें किससे शादी करनी चाहिए और क्या संतान होगी अब ये सभी कारक कुंडली से निकलते हैं जो हमारे पिछले जीवन के अपने संचित कर्म का परिणाम है इसलिए पिछले जीवन का किसी भी कुंडली पर सीधा असर पड़ता है।

कुंडली पिछले जन्म के कर्मों से व्यक्ति के वर्तमान जीवन (life style) को दर्शाती है

1. उदाहरण के साथ समझाने के लिए कि यदि पिछले जन्म (जन्मो) में व्यक्ति के पास कोई आध्यात्मिक अधिकार / प्रवृत्तियां नहीं थीं, मुख्य रूप से पिता या पिता सामान का सम्मान नहीं किया था, कोई नेतृत्व और गुण नहीं था, अभिमानी, ईर्ष्या करने वाला था, तो वर्तमान कुंडली में सूर्य कि स्तिथि सही नहीं होगी ! उसी तरह अगर व्यक्ति आज्ञाकारी था, बड़ों को सम्मान देता या सम्मान अर्जित करता था, तो वर्तमान कुंडली में मजबूत सूर्य के साथ कई अन्य ग्रहों का समर्थन होगा !

2. यदि किसी ने पिछले जन्म (जन्मो) में गुरुओं या बड़ों को सम्मान नहीं दिया, तो वर्तमान जीवन में कुंडली में कमजोर बृहस्पति होगा और व्यक्ति अच्छे शिक्षा अध्ययन, विद्वान बनने के लिए संघर्ष करता रहेगा !

3. जो व्यक्ति पूर्व जन्म  में मुख्य रूप से माता का आदर नहीं करता था, उसकी कुंडली में  कमजोर चंद्रमा होगा और मन हमेशा तैरता (हाथ पैर मारना) रहेगा और वर्तमान में स्त्री लिंग से कभी आदर नहीं मिलेगा  !

4. पूर्व जन्म  में मुख्य रूप से पत्नी को परेशान करने वाले व्यक्ति का विकृत शुक्र होगा ! और शादी, विवाहित जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं !

5. यदि किसी ने पिछले जन्म (जन्मो) में सामान्य प्राणियों को नुकसान पहुंचाया है, तो संतान प्राप्ति  में गंभीर मुद्दों (मामलो) के साथ नाडी दोष होने की सम्भावना बढ़ जाती हैं !

6. कभी-कभी जीवन में चमत्कार होते हैं! किसी को अचानक लाभ मिलता है जैसे लॉटरी, प्रतियोगिताएँ में पुरस्कार, एक अनाथ का किसी अमीर परिवार द्वारा अपनाए जाना! और किसी को अचानक हानि, अचानक मृत्यु, असाध्य रोग हो जाते हैं !

7. किसी को भी लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होना यह दर्शाता है कि व्यक्ति ने दूसरों के साथ अत्याचार किया होगा या बहुत बुरा व्यवहार किया था वर्तमान कुंडली में 2 के घर (सेकंड हाउस) में शनि या राहु विराजमान होगा !

यह सब हमारे संचित कर्म का परिणाम है, संचित कर्म हमारी कुंडली में परिलक्षित (परछाई)  होते हैं जो हमारे वर्तमान जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं !

हमें किस पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए – ज्योतिष उपाय या कर्म सुधार में

अब यदि जन्म कुंडली में कोई नकारात्मक या सकारात्मक ग्रह रखा गया और हम इसके  सटीक कारणों को जानते हैं , तो मुझे लगता है कि वर्तमान जीवन की यात्रा और इसके कर्म काफी सरल हो जाएंगे ! सरल लेकिन प्रासंगिक कर्म सुधार के साथ उपरोक्त पैरा (पैराग्राफ) को समझने के उद्देशय से

सूर्य को मजबूत करने के लिए, अपने से बड़ों का मुख्य रूप से सम्मान करें ! आज्ञाकारी, विनम्र बनें, सम्मान देना सीखें, अहंकार छोड़ें, प्रभुता (प्रबलता) को त्यागे!

शुक्र से संबंधित मुद्दों (मामलो) से छुटकारा पाने के लिए अपनी पत्नी को समान (सही प्रकार) तरीके से सम्मान दें

यदि बृहस्पति आपको परेशान कर रहा है तो अपने शिक्षकों और बड़े बुजुर्गो को सम्मान दें !

और पढ़ें – शनि का गोचर और विभिन्न शनि चरण

मेरा अंतिम ज्योतिष लेकिन कार्मिक सुझाव

ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए अपनी बुद्धि और अच्छे कर्मों को बढ़ाने के लिए अनुष्ठानों का पालन करना, रत्न धारण करना, हवन, यज्ञ करना, दान करना आदि इन सभी अनुष्ठानों को करने से देवता प्रसन्न नहीं होते हैं ! इसी तरह अगर किसी की कुंडली में पितृ दोष है, तो बेहतर हो सकता हैं कि आप अपने माता-पिता को खुश रखें, उनके साथ रहें, उनकी अच्छी देखभाल करें ! उनके अधूरे कार्यों और दायित्वों को पूरा करने की कोशिश करें ! यह श्राद्धों या अन्यथा में केवल ब्राह्मणों को खिलाने, दान करने, बोधगया का दौरा करने की तुलना में पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में मदद करेगा !

इसलिए पिछले जन्मों के आधार पर आबंटित ग्रहों की स्तिथि से सीख लेकर, नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव को दूर (शांत) रखने के लिए और सकारात्मक रूप वाले ग्रह योगों को सक्रिय करने के लिए  अपने वर्तमान कर्मों को संशोधित करें और इससे न केवल अपने वर्तमान को अच्छा करें बल्कि आने वाले अगले जीवन (अगर आप मोक्ष द्वार पर नहीं हैं तो) के लिए भी अच्छी कुंडली का आधार बनायें

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