क्या पंचम भाव में केतु हमेशा संतान में बाधा देता है?

पंचम भाव में केतु

केतु एक क्रूर, अलगाववादी, उग्र व अग्नि तत्व प्रधान ग्रह है इसलिए पंचम भाव में केतु की स्थिति संतान संबंधी मामलों के लिए सामान्यतः उत्तम नहीं होती है. इस भाव में केतु के स्थित होने से आपकी कुछेक संतानें गर्भ में ही नष्ट हो सकती हैं या संतान उत्पन्न होने में ही अनेक बाधाएं आ सकती हैं लेकिन ये फल तभी देखने में आ सकते हैं अगर आपकी कुंडली में पंचम भाव/Pancham Bhav का स्वामी यानी पंचमेश, संतान के कारक गुरु व सूर्य ये दोनों ग्रह भी कमजोर अवस्था में हो. अगर आपकी कुंडली में पंचमेश, सूर्य व गुरु बलवान अवस्था में हो तो पंचम भाव में बैठा केतु/Pancham bhav me ketu संतान संबंधी मामलों में कोई समस्या नहीं देता है उल्टा इसका एक अर्थ यह है कि आपकी कोई एक संतान आध्यात्मिक प्रकृति की हो सकती है. इस भाव में अगर केतु संतान बाधा उत्पन्न कर रहा हो तो गणेश जी की पूजा, उपासना से ये समस्या दूर हो सकती है.

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