कब है निर्जला एकादशी व्रत, क्या है इसकी पूजा विधि, लाभ, शुभ मुहूर्त, दान का महत्व और व्रत पारण का सही समय

Nirjala Ekadashi Vrat 2022, कब है निर्जला एकादशी और व्रत पारण का समय

हिन्दू धर्म में एकादशी के व्रत की बहुत महत्वता है। प्रत्येक वर्ष लगभग चौबीस एकादशियाँ होती हैं और जब अधिकमास या मलमास आ जाता है तो ये बढ़कर 26 तक पहुँच जाती है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है इस व्रत मे पानी भी नहीं पिया जाता इसिलिये इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। निर्जला एकादशी को कठिन व्रतों में से एक माना गया है और इसका दूसरा नाम भीमसेनी एकादशी भी है। निर्जला एकादशी के व्रत को विधि पूर्वक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा एक महीने में २ एकादशी पड़ती है, इसी क्रम में एकादशी व्रत 2022 में 24 एकादशी व्रत है। जिसमे से एक निर्जला एकादशी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी गई है। आइए जानते है निर्जला एकादशी कब है और क्या है इसकी तिथि?

निर्जला एकादशी तिथि आरम्भ व समापन

हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 10 जून 2022 को सुबह 7 बजकर 26 मिनट पर प्रारंभ होगी। इस एकादशी तिथि का समापन 11 जून 2022 को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर होगा। निर्जला एकादशी व्रत पारण का समय 11 जून, दोपहर 01:44 से शाम 04:32 तक रहेगा।

निर्जला एकादशी व्रत के पारण का क्या महत्व है?

एकादशी व्रत में पारण का उतना ही महत्व है जितना की इसके व्रत व पूजा का होता है। ऐसा माना जाता है कि यदि एकादशी व्रत का पारण सही विधि विधान से नहीं किया जाए तो इस व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं होता है। एकादशी व्रत का पारण ठीक अगले दिन यानी द्वादशी को किया जाता है। पारण करते समय शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है, जो इस प्रकार है-

 

निर्जला एकादशी 2022 व्रत के पारण का समय – 11 जून, दोपहर 01:44 से शाम 04:32 तक

निर्जला एकादशी कथा व लाभ

एक बार वेदव्यास जी ने पांडवों को चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी के बारे में बताते हुए व्रत का संकल्प करवाया तो महाबली भीम ने यह निवेदन किया की वे पूरे दिन तो क्या एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकते है। भीम के इस निवेदन पर पितामह ने भीम की समस्या का निदान करते और उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा यदि वे ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला नाम की एक ही एकादशी का व्रत रखेंगे तो उन्हें पूरे वर्ष की समस्त एकादशियों का फल प्राप्त हो जायेगा। इस व्रत के प्रभाव से संसार में सुख, यश और लक्ष्मी प्राप्त होती है और मृत्यु उपरान्त मोक्ष का लाभ होता है।

इतने आश्वासन से भीम ने इस एकादशी का विधिवत व्रत किया और वर्ष भर की एकादशियों का पुण्य लाभ देने वाली इस श्रेष्ठ निर्जला एकादशी का लाभ प्राप्त किया। इसी कारण से निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। भीम ने व्रत के प्रभाव से स्वर्ग प्राप्त किया। निर्जला एकादशी व्रत करने से मृत्यु के बाद स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है और जीवात्मा को लेने के लिए पुष्पक विमान आता है। निर्जला एकादशी के व्रत व पूजा से सभी पाप मिट जाते हैं और मृत्यु उपरान्त स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

निर्जला एकादशी के दिन इन चीजों का दान करना माना जाता है शुभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन दान करना बहुत शुभ माना गया है। इस दिन गरीबों को अनाज, जल, कपडे, जूते, छाता, पंखा, शरबत, फल और गर्मी से राहत देने वाली वस्तुएं इत्यादि का दान करना बहुत अच्छा माना जाता है। इसके अलावा यह भी माना गया है कि इस दिन जो भी व्यक्ति निर्जल रहकर ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को शुद्ध पानी से भरा घड़ा दान करता है उसके भाग्य का उदय होता है।

निर्जला एकादशी व्रत की पूजा विधि सूची

  • निर्जला एकादशी के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान के पश्चातसूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए
  • पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। भगवान को पीले फूल, पंचामृत व चंदन अर्पण करना चाहिए।
  • निर्जला एकादशी के व्रत में जल नहीं लेना चाहिए और जल या जल से भरे पात्र का दान करना चाहिए
  • निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना चाहिए
  • निर्जला एकादशी के दौरान आलस त्याग कर सारे दिन भगवान् के ध्यान करना चाहिए रात को मंदिर जाकर भगवान विष्णु की उपासना करनी चाहिए।
  • निर्जला एकादशी का पारणा, ब्राह्मणों को दान व दक्षिणा देकर करना चाहिए।

निर्जला एकादशी व्रत में ये काम है निषेध

  • निर्जला एकादशी व्रत के दिन पूरा दिन जल नहीं ग्रहण करना चाहिए
  • निर्जला एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए
  • इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए
  • निर्जला एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए नहीं तो वैवाहिक जीवन में समस्या आने का डर रहता है।
  • निर्जला एकादशी के दिन तामसिक भोजन नहीं करना चाहिएचाहे आप व्रत ना भी रख रहे हो।

निर्जला एकादशी व्रत के क्या फायदे है?

  • निर्जला एकादशी व्रत से प्रभु की कृपा प्राप्त होती है।
  • निर्जला एकादशी व्रत का विशेष पुण्य है और जो भी इस व्रत का विधि पूर्वक पालन करता है उसे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • इस व्रत से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
  • निर्जला एकादशी में भगवान विष्णु की विशेष पूजा होती है। निर्जला एकादशी में जल दान का अत्यंत महत्व है। निर्जला एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा व जल का दान करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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