नरक चतुर्दशी पर यम देव की पूजा से मिलता है दीर्घायु का वरदान

नरक चतुर्दशी

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी/Narak Chaturdashi के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन यम देव का पूजन एवं यम देव के निमित्त दीपदान किया जाता है। नरक चतुर्दशी को नरक चौदस, नरक पूजन, यम चतुर्दशी इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। कार्तिक मास के दिपावली से एक दिन पहले इस दिन में कई प्रकार के धार्मिक कार्य किए जाते हैं। 

चतुर्दशी तिथि के दिन स्नान एवं शरीर पर तेल लगाने का भी विधान बताया जाता है। जहां संपूर्ण कार्तिक मास में तेल लगाना वर्जित होता है, ऐसे में सिर्फ कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन तेल लगाना शुभ माना गया है। कुछ स्थानों पर लोग अपामार्ग जिसे लोक भाषा में चिचड़ी भी कहते हैं, उसके पत्तों को पानी में डाल कर स्नान करते हैं। इसी प्रकार कुछ न कुछ छोटे-छोटे अनुष्ठान इस दिन विशेष रूप से किए जाते हैं, जिनके द्वारा शरीर को आरोग्य प्राप्त होता है तथा जीवन में मानसिक सुख एवं संतुष्टि बनी रहती है। माना जाता है कि इस दिन स्नान का स्वरूप औषधीय होता है। 

क्या है यम पूजन और इसे कैसे करें?

नरक चतुर्दशी के दिन यम देव की पूजा मुख्य रूप से की जाती है। चतुर्दशी तिथि/Chaturdashi tithi शिव भगवान की पूजा के लिए भी विशेष मानी गई है, ऐसे में कार्तिक मास की यह तिथि का स्वरुप बहुत खास हो जाता है, क्योंकि यम देव जो मृत्यु के देवता माने गए हैं और शिव अकाल मृत्यु भय से मुक्ति देने वाले माने गए हैं, अत: इस दिन यम देवता की पूजा व्यक्ति को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिला सकती है। इस दिन यमदेव के निमित्त संध्या समय पर लोग अपने घरों के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक जलाते हैं और साथ ही यम देव की कथा एवं आरती इत्यादि करते हैं और इस संपूर्ण पूजा कृत्य द्वारा यम देव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यदि इस पूरी प्रक्रिया को पूर्ण विधि के साथ किया जाता है तो व्यक्ति एवं उसके परिवार को दीर्घायु का आशीर्वाद भी मिलता है। 

मान्यता अनुसार इस दिन किया जाने वाला दीपदान कई गुणा शुभ फलों को प्रदान करने में सहायक बनता है। इस दिन किए गए दीपदान द्वारा पितरों को भी सुख एवं संतुष्टि प्राप्त करने वाला होता है। ऐसा करने से यम देव प्रसन्न होते हैं, तथा व्यक्ति को नरक से मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। नरक चतुर्दशी पर की जाने वाली पूजा एवं दान कार्यों का अक्षय फल प्राप्त होता है तथा पाप कर्मों का नाश भी होता है। 

स्वर्ग मार्ग होता है प्रशस्त

नरक चतुर्दशी के दिन घर एवं सभी स्थानों को साफ सुथरा किया जाता है। लोग घरों को बंदनवार एवं रंगोली इत्यादि से सजाते हैं। घर को पवित्र एवं शुद्ध करने हेतु मंगल गीत, भजन कीर्तन व पूजा हवन इत्यादि कार्य होते हैं। यह समय नकारात्मकता को दूर करके प्रकाश के आगमन की पहल के रूप में देखा जाता है।  

अंधकार को दूर करने हेतु संध्या व रात्रि के समय पर विशेष रूप से सभी स्थानों को रोशन किया जाता है। इस समय पर लोग घरों के बाहर, गली एवं चौराहे पर दीप जलाते हैं, जिससे प्रत्येक स्थान प्रकाशित हो उठता है और अंधकार की समाप्ति होती है। इसी उज्जवल स्वरूप में शुभता का आगमन होता है। सुख समृद्धि का वास सभी के जीवन में होता है। कष्टों से मुक्ति पाने का सरल उपाय बनता है, ये कार्तिक नरक चतुर्दशी का पर्व जीवन को हर्षो उल्लास से भर देता है। 

नरक चतुर्दशी कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नरक चतुर्दशी का संबंध यम पूजन/Yama Pujan से जुड़ा हुआ है। इस दिन कथा सुनने व दीपदान का विशेष महत्व रहता है। नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली के रूप में मनाया जाता है। इस दिन दीपों को जलाया जाता है तथा घरों को रोशन किया जाता है। इस दिन की कथा का संबंध श्री कृष्ण एवं नरकासुर की कथा से भी संबंधित है। इसी के साथ एक अन्य कथा भी काफी प्रचलित है जो इस प्रकार है। 

प्राचीन काल में रन्तिदेव नामक राजा शासन किया करता था वह अत्यंत ही धार्मिक एवं परोपकारी राजा था। अपने संपूर्ण जीवनकाल में रन्तिदेव ने कोई गलत या पाप कार्य नहीं किया था, किंतु जब मृत्यु का समय निकट आता है तो यमदूत उसे लेने के लिए आते हैं। उन यमदूतों को देख राजा विस्मित हो जाता है और पूछता है की उसने जीवन में कभी कोई पाप कर्म तो किया नही फिर उसे यमदूतों का सामना क्यों करना पड़ रहा है। आखिर मैंने ऐसा कौन सा अपराध किया जिसके कारण मुझे यमदूत नरक गमन के लिए लेने आए हैं।

इस पर यमदूतों ने उसे याद दिलाया कि उसके द्वार से एक भूखा ब्राह्मण बिना कुछ प्राप्त किए लौट जाता है इस कारण उसे नरक की प्राप्ति हो रही है। इस पर राजा उन यमदूतों से विनती करता है की कृपया वह उसे इस गलती को सुधारने का कुछ समय प्रदान करें। उसके पूर्व में किए गए कार्यों को देख यम दूत उसे कुछ समय प्रदान करते हैं। तब राजा पाप कर्म से मुक्ति पाने हेतु ऋषियों के पास जाता है और उनसे मुक्ति पाने का रास्ता पूछता है। ऋषि राजा को आने वाली कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन यम देव का व्रत पूजन एवं दीपदान करने को कहते हैं जिसके प्रभाव से वह अपने पाप कर्म से मुक्त हो सकता है। 

ऋषियों के कहे अनुसार राजा ने कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन यमदेव का पूजन करना है, ब्राह्मण भोज कराना है तथा अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करता है। इस प्रकार यम देव उसकी भक्ति से प्रसन्न होते हैं और उसे विष्णुधाम की प्राप्ति होती है। इस प्रकार नरक चतुर्दशी के दिन किया जाने वाला व्रत-पूजन व्यक्ति के समस्त पापों का नाश करता है।

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