क्या मंगल दोष के कारण विवाह में हो रही है देरी

delay in marriage due to Mangal Dosha

जब आप विवाह करने के लिए दिलो दिमाग से पूरी तरह तैयार हों, लेकिन विवाह में लगातार व्यवधान आ रहा हो, तो यह निश्चित ही आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। उस समय, आपका मन-मस्तिष्क बेचैन हो जाता है, और आपके अंदर तमाम नकारात्मक विचार घर कर जाते हैं। आपके मित्र और रिश्तेदार अक्सर यह प्रश्न  पूछते हैं की आपके विवाह में होने वाली देरी का कारण क्या है? कभी-कभी आपके पास इस प्रश्न का कोई तर्कसंगत उत्तर नहीं होता है। बहरहाल, इसका वास्तविक कारण, किसी योग्य ज्योतिषी द्वारा अपनी कुंडली  का विश्लेषण करा ज्ञात किया जा सकता है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया से यह भी स्पष्ट हो सकता है कि, क्या आपकी कुंडली में मंगल दोष के कारण विवाह में देरी हो रही है/ Is the delay in marriage due to Mangal Dosha? अथवा इसका कोई अन्य कारण है।

मंगल ग्रह के विषय में मिथक ?

ऐसा देखा गया है कि कई लोग विवाह में देरी के लिए केवल मंगल को ही उत्तरदायी समझते हैं, परन्तु यह पूर्ण रूप से सत्य तथा तार्किक नहीं है। यदि आपकी कुंडली में मंगल की स्थिति अनुकूल नहीं है, और यह पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें, बारहवें भावों में स्थित होता है, तो जातक की कुंडली में मांगलिक दोष/Manglik Dosha होता है। विवाह में देरी होने का मांगलिक दोष अकेला कारण नहीं है, तथा सभी को इसके लिए उत्तरदायी अन्य कारणों के विषय में जानने की चेष्टा करनी चाहिए।

मंगल हर बार वैवाहिक देरी का कारण नहीं बनता

यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल दोष है तो विवाह में देरी इसके प्रभावों में से एक है। लेकिन क्या मंगल ग्रह के लिए यह सब अकेले करना संभव है? इसका उत्तर है नहीं। विवाह में देरी के कारण का आंकलन करते समय अन्य ग्रहों की स्थिति को भी महत्व दिया जाना चाहिए। हो सकता है, कोई और ग्रह आपके लिए विवाह में देरी/Delay in marriage का कारण बन रहा हो; मंगल केवल उस समस्या की विकटता में वृद्धि करने का कार्य कर रहा है। इसलिए विवाह में देरी के पूरे प्रकरण के लिए मंगल अथवा मांगलिक दोष को ही एक अकेला कारण नहीं मानना चाहिए।

विवाह में देरी के अन्य कारण क्या हो सकते हैं?

विवाह में देरी का सटीक कारण जानने के लिए हमें सदा ही एक योग्य वैदिक ज्योतिषी/Learned Astrologer का रुख करना चाहिए और इस संबंध में कुंडली का उचित विश्लेषण करना चाहिए। यहां ग्रहों के कुछ सामान्य संयोजन दिए हैं, जो किसी व्यक्ति के विवाह में विलम्ब का कारण बन सकते हैं।

• यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सप्तम भाव में मंगल, शनि और शुक्र विराजमान हैं तो यह इस बात का संकेतक है कि विवाह में विलम्ब हो सकता है।

• लड़की की कुंडली के लग्न भाव/First House में यदि मंगल, सूर्य और बुध की तिकड़ी हो और गुरु/Jupiter बारहवें भाव में हो तो यह स्थिति उसके लिए विवाह में देरी का योग बनाता है ।

• किसी जातक की कुंडली में सूर्य के सप्तम भाव में स्थित होने पर उसके विवाह में व्यवधान आने का योग होता है, और वह परिणय सूत्र में देर से बंधता है ।

• यदि किसी की नवमांश कुण्डली में शनि सप्तम भाव या लग्न में हो तो यह स्थिति भी विवाह में विलम्ब का संकेत देता है।

किसी योग्य वैदिक ज्योतिषी से परामर्श  

कुंडली में उपस्थित मंगल दोष से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि आपके विवाह में देरी/ delay in marriage हो रही है, तो आप वैदिक ज्योतिष के अग्रणी डॉ विनय बजरंगी से अपनी कुंडली की समीक्षा करवा सकते हैं और इस विलम्ब का सटीक कारण जान सकते हैं। यह ग्रहों की दशा अथवा आपकी अपनी खामियों के कारण हो सकता है, जैसे कि सही समय पर विवाह के लिए तैयार ना होना, करियर के लिए विवाह की उपेक्षा करना आदि।

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