महाशिवरात्रि की महत्ता क्या है?

Maha Shivratri

शिवरात्रि हर पूर्णिमा से एक दिन पहले होती है ।  महा शिवरात्रि/Maha Shivratri अपने वास्तविक स्वरुप में, एक वर्ष में आने वाली सभी बारह मासिक शिवरात्रियों की एक भव्य पराकाष्ठा है । फरवरी –मार्च माह के आसपास इस दिन का भव्य उत्सव मनाया जाता है, जिसके बहुत से आध्यात्मिक अर्थ भी होते हैं। इस वर्ष शिवरात्रि 1 मार्च को है । 1 मार्च को भगवान शिव का उत्सव मध्य रात्रि 03:16 बजे प्रारम्भ होकर 2 मार्च को मध्य रात्रि 01:00 तक रहेगा। इस समय के दौरान भगवान शिव के भक्त अपनी भक्ति में सराबोर रहेंगे।

इस दिन उत्तरी गोलार्ध की ऊर्जा मानव मात्र में प्रसारित होती है, जो यह बताता है की क्यों इस दिन हम अत्याधिक धार्मिक और शिव की भक्ति में लीन अनुभव करते हैं । शिवरात्रि की रात का प्रयोग अपने भीतर आध्यात्मिकता लाने के लिए किया जाता है, और इसलिए यह ईश्वर के स्मरण में पूरी रात जागने की रात्रि होती है ।

आध्यात्मिक रूप से जागृत लोगों के लिए महाशिवरात्रि, एक ऐसा दिन है जब भगवान शिव ने समाधि की अवस्था प्राप्त की तथा कैलाश पर्वत को अपना निवास बनाया । गृहस्थ लोगों के लिए यह भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का पावन दिन है । देवी सती के देह-त्याग के बाद भगवान शिव गहरी समाधि में चले गए और पार्वती के रूप में सती के अवतरण के बाद उनके  द्वारा पूर्ण निष्ठा से पूजन के उपरान्त ही जागे। जिस दिन देवी और भगवान शिव एक हुए, वह पर्व महाशिवरात्रि के रूप में जाना गया। वह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष का चतुर्दशी तिथि थी । यह वही दिन है जब भगवान शिव ने सांसारिक जनों के सभी शत्रुओं को परास्त किया था।

हमारे आदि ग्रन्थ यह उल्लेख करते हैं कि भगवान शिव ने पोषण, जन्म और मृत्यु के तीन तत्वों को दर्शाने के लिए तांडव नृत्य किया था । एक और कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान सागर की निधियों में से एक विष का प्याला निकला। उस भयंकर विष से विश्व को बचाने के लिए भगवान शिव ने विषपान कर लिया। वह पावन पर्व महाशिवरात्रि के रूप में मनाया गया। एक और पौराणिक कथा के अनुसार इस रात शिव भक्तों को पाप मुक्त होने और देवत्व की यात्रा प्रारम्भ कराने के लिए शिव के प्रतीक प्रदान किये जाते हैं। यह कैलाश पर्वत तक पहुँचने और मोक्ष, ईश्वर से एकाकार प्राप्त करने में हमारी सहायता करता है । ऐसी भी एक मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन मध्यरात्रि में निराकार भगवान शिव एक लिंग स्वरुप में प्रकट हुए। इसी कारण पूरी रात जागकर, लोग भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन भगवान शिव ने सैकड़ों वर्षों तक तपस्या करने के बाद समाधि की अवस्था प्राप्त की । तो यह रात्रि अपनी इन्द्रियों को वश में रखने और अपने चित्त को शांत करने की रात्रि है ।

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शिवरात्रि क्या है?

शिवरात्रि/Shivratri वह दिन है जब आप इस नश्वर शरीर की खिड़की से रात्रि के अन्धकार में ईश्वर के सर्वव्यापी स्वरुप को ढूंढते हैं । असीम आकाश का विस्तार, जो शाति आप इस दिन अनुभव करते हैं, सबका आध्यात्मिक महत्त्व है । रात्रि के इस समय का खालीपन, अपने सार में भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करता है ।

महाशिवरात्रि की महत्ता क्या है?

हम आमतौर पर  हर त्यौहार/Festivals पर भौतिक सुखों की प्राप्ति हेतु प्रार्थना करते हैं ।

परन्तु, इस दिन या रात्रि को वास्तविकता में आप इस धरती पर अपने नश्वर जीवन से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं । आप पूर्व कर्मों से मुक्ति, मोक्ष, वैवाहिक सुख और समृद्ध जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं , और अंतत: कुंवारी कन्याएं भगवान शिव जैसे वर की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं । महाशिवरात्रि के इतिहास से सम्बंधित कुछ बेहतरीन पौराणिक कथाएं है। 

बहुत से तरीकों से लोग महाशिवरात्रि के पर्व/Mahashivratri Festival को मनाते हैं । कुछ लोग प्रात: काल पूजन तथा हवन करते हैं और कुछ रात्रि के समय पूजन तथा जागरण करते हैं। परन्तु समस्त श्रद्धालु पूरी रात व्रत रखते हैं । ऐसा मनुष्य के  दृढ़ निश्चय की परीक्षा हेतु किया जाता है।

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महाशिवरात्रि पर क्या क्या किया जाना चाहिए?

कुछ ऐसे अनूठे माध्यम हैं जिनके द्वारा आप भगवान शिव/Lord Shiva की कृपा प्राप्त कर सकते हैं । यहाँ आपको कुछ ऐसे तरीकों के विषय में पता चलेगा, जिससे आप उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में प्रगति कर सकते हैं।  

  • व्रत

आप इस त्यौहार के अवसर पर व्रत, ध्यान मंत्रोच्चार, रूद्र पूजन और शिवलिंग पूजन कर सकते हैं । व्रत आपके शरीर को पवित्र करता है, जो ध्यान क्रिया में आपके लिए सहायक होता है। व्रत के दौरान फल तथा सुपाच्य भोजन ग्रहण करना चाहिए । हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत करना भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में आपकी सहायता कर सकता है ।

  • महाशिवरात्रि पर ध्यान करें 

इस दिन पूरी रात जागकर ध्यान करें । पुराने लोग यह कहते थे कि हर दिन ध्यान लगाना संभव नहीं है, इसलिए कम से कम शिवरात्रि के दिन ध्यान लगाएं । ऐसा करने से आपके मन मस्तिष्क पर इसका बहुत प्रबल प्रभाव होगा ।

  • ओम नमः शिवाय का जाप करें

यह मन्त्र इस दिन के लिए सर्वथा उपर्युक्त   है, क्योंकि यह समस्त पञ्च महाभूतों को शान्त करता है, जो की शान्ति और उल्लास उतपन्न करता है । ओम नमः शिवाय के साथ-साथ आप शिव तांडव स्त्रोत और काल-भैरव अष्टक का भी जाप कर सकते हैं ।

  • महाशिवरात्रि पूजन तथा रूद्र पूजन में भाग लें 

रूद्र पूजा और महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए वैदिक मन्त्रों के साथ एक विशेष पूजा की जाती है । सकारात्मकता और शुद्धता वातावरण में घुल जाती हैं और वातावरण की  नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर देती हैं । पूजा में भाग लें, मंत्रोच्चार सुनें और अपनी अंतरात्मा को दिव्यता से जोड़ें।

  • शिवलिंग का पूजन करें 

शिवलिंग, निराकार शिव का एक साकार रूप है। शिवलिंग पूजन में बेलपत्र चढ़ाना, इस बात को दर्शाता है की आज के दिन आपकी सात्विक, राजसिक और तामसिक प्रवृत्तियां, देवाधिदेव को अर्पण हो जायेंगी। ऐसा करना आपको शान्ति और एक प्रकार की स्वतन्त्रता का अनुभव कराता है जो कि आपके सम्पूर्ण अस्तित्व में व्याप्त हो जाती है।

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