लक्ष्मी योग – धन और संपत्ति का योग

Laxmi Yoga

लक्ष्मी योग/Laxmi Yoga का प्रभाव जीवन को सुख समृद्धि और ऐश्वर्य से भर देने वाला होता है। इस योग का निर्माण ज्योतिष शास्त्र द्वारा बताए गए कुछ नियमों के अनुसार होता है। जन्म कुंडली/Natal Chart में मौजूद लक्ष्मी योग/Laxmi Yoga कई प्रकार की आर्थिक चिंताओं से मुक्ति दिलाने वाला होता है। यदि यह योग किसी निर्धन व्यक्ति की कुंडली में होगा तो भी उस व्यक्ति को धन संपदा का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है।

यदि कुंडली में यह योग बनता है तो उसके भाग्य द्वारा समस्त लोगों का कल्याण होता है तथा उस व्यक्ति को धन की प्राप्ति किसी न किसी रूप से निर्बाध गति से होती है। 

कैसे बनता है लक्ष्मी योग 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार धन योग/Dhan Yoga एक प्रकार का लक्ष्मी योग होता है। इसके अतिरिक्त जन्म कुंडली में यदि मौजूदा केंद्र और त्रिकोण भावों का संगम एक दूसरे के साथ शुभता पूर्वक होता है, तब एक उत्तम लक्ष्मी योग निर्मित होता है। कुंडली में केंद्र और त्रिकोण स्थान को विष्णु स्थान एवं लक्ष्मी स्थान कहा गया है इसलिए जब दोनों साथ में होते हैं अर्थात इन भावों के स्वामी यदि इसी स्थान पर एक साथ मौजूद होंगे तो शुभ राजयोग बनेगा जो लक्ष्मी योग का प्रभाव देगा और उस व्यक्ति को अपने जीवन में अपार धन संपदा एवं वैभव का जीवन प्राप्त हो सकता है। 

लक्ष्मी योग में केंद्र और त्रिकोण का महत्व

लक्ष्मी योग में यदि कुंडली में लग्न का स्वामी मजबूत स्थिति में हो और लग्न भी शुभ तथा बली हो, इसके साथ ही कुंडली का नवम भाव और उसका स्वामी अपनी उच्च राशि में स्थित हो तो यह लक्ष्मी योग का निर्माण करता है। कुंडली में नवम लग्न का स्वामी उच्च राशि में हो या अपनी स्वराशि में स्थित हो तो लक्ष्मी योग बनता है।

  • यदि भाग्य भाव का स्वामी केंद्र स्थान में अपनी मूल त्रिकोण राशि में स्थित होता है, तो लक्ष्मी योग बनता है।
  • यदि नवम भाव का स्वामी केंद्र भावों में उच्च राशि में स्थित होता है तो लक्ष्मी योग का निर्माण होता है।
  • यदि कुंडली में लग्न के स्वामी और नवम भाव के स्वामी की युति होती है अर्थात वह एक साथ होंगे तो लक्ष्मी योग का निर्माण होता है। लग्नेश और नवमेश की युति एक अच्छा शुभ लक्ष्मी योग बनाती है। 

इस योग की शुभता का प्रभाव किस रूप में हमें प्राप्त होगा इसके लिए ग्रहों की शुभता को भी समझना महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि यदि ग्रह एक मजबूत स्थिति में होगा और पूर्ण रूप से शुभ होगा तब ही अपने योग के अच्छे प्रभावों को देने में भी सक्षम होगा। आंशिक रूप से बनने वाला लक्ष्मी योग अपना पूर्ण फल देने में सक्षम नहीं होगा इसलिए कुंडली में मौजूद लक्ष्मी योग की शुभता को समझने के लिए उस योग की कुंडली में उपस्थिति और वर्ग कुंडलियों/Divisional charts एवं नक्षत्र इत्यादि को भी समझना अत्यंत ही आवश्यक होता है।

लक्ष्मी योग ऐश्वर्य की प्राप्ति का मार्ग

लक्ष्मी योग द्वारा देवी लक्ष्मी की कृपा सदैव ही व्यक्ति पर बनी रहती है। इस योग का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में आर्थिक स्थिति को अच्छा बनाए रखने में सहायक होता है। जीवन में समृद्धि, विलासिता के साथ साथ यश एवं प्रतिष्ठा भी प्राप्त होती है। समाज में व्यक्ति उत्तम स्थान को प्राप्त करता है। जीवन के कठिन मार्गों में भी उसे अपनों का सहयोग मिलता है। किसी योग्य व्यक्ति का साथ उसके जीवन को उत्तम दिशा देने वाला साबित हो सकता है। व्यक्ति अपने कर्म के द्वारा अपने लिए सफलता का रास्ता बनाता है।

कुंडली में लक्ष्मी योग के होना दर्शाता है कि व्यक्ति सुन्दर और सौभाग्य होगा। ऐसे व्यक्ति दूसरों को प्रभावित करने में सक्षम होते हैं और वह दूसरों का सम्मान करते हैं। वह व्यक्ति आध्यात्मिक दृष्टि से भी मजबूत होता है और परंपरा एवं लोक कल्याण की भावना उसके भीतर सदैव मौजूद रहती हैं। लक्ष्मी योग में जन्मा व्यक्ति समाज में उत्तम स्थान को प्राप्त करता है। अपने परिवार तथा कुल के लिए भी वह शुभदायक होता है।

Read more about Auspicious Yoga in Astrology 

Leave a Reply